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जंगल की अर्थव्यवस्था चाहे कुछ भी हो , शेर कभी घास नहीं खाता...

प्यार के बिना जीवन उस वृक्ष की तरह है,जिस पर कभी फल नहीं लगते हैं।

गलतियाँ ज़रूर माफ कर देनी चाहिए, पर चालाकियाँ नहीं……..

अहमियत यहां हैसियत को मिलती है और हम जज़्बात लिए घूम रहे हैं!

बर्फ़ से रिश्तों का मौसम गुनगुना हो जाएगा मिल के आपस में रहें तो ख़ुशनुमा हो जाएगा बीच की दीवार पहले तुम गिराओ तो सही देखना आँगन वही फिर दो-गुना हो जाएगा राघवेंद्र द्विवेदी

रोक कर बैठे है ज़िंदगी को तुम आओ तो जिना शुरू करेंगे..

ये सोचना ग़लत है के’ तुम पर नज़र नहीं,मसरूफ़ हम बहुत हैं, मगर बे-ख़बर नहीं हम आपके इशारे पे घर-बार छोड़ दें ?दीवाने हैं ज़रूर ! मगर इस क़दर नहीं !! ~ आलोक श्रीवास्तव

मुमकिन नहीं मेरा पहले जैसा हो पाना खुद को बहुत पीछे छोड़ आई हूँ मैं

मुझे तुम्हारा साथ चहिए,तुम्हारी सलाह नहीं…

अफ़वाहें बहुत थी मेरे बारे में समय किसको था जो सच टटोले...

गम से खाली नहीं जिस्म का कोना कोई हम रहे न रहे हम पे मत रोना कोई..!!

खुशियां हर तरफ हैं.... इंसान है की बस देखता एक तरफ है..!!

तुम तो सूरज से आंख मिलाते नहीं थकते थोड़ा और ऊपर उठो आसमान बहुत हैं

आपका आत्मसम्मान अगर किसी कोघमंड लगता है,तो उसे बिल्कुल लगने देना चाहिए..!!

संघर्षो के दिनों में, तन्हा हर इंसान होता है। साथ न कोई यार होता है, और न इतवार होता है।।

दो चार मिस यूनिवर्स तो उस पर यूँ ही कुर्बान कर दूँ, आपने देखी कहा है साड़ी मे तस्वीरें मेरी जान की ..

अपमान से भरी गुलामी की जिंदगी से तो मौत हजार गुना अच्छी है । भगत सिंह

अंत में दुश्मनों के कहे शब्द नहीं, दोस्तों की चुप्पी याद रहती है। मार्टिन लूथर

कौन आगे है, कौन पीछे इससे मुझे क्या? मेरा मुकाबला ख़ुदसे है, औरों से नहीं।

मुझे मालुम नही, ईद कैसे मनाया जाय,मैं गैर मुस्लिम हूं, बधाई कबुल करना ...


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