✯||ज़रा ठहरो तो नज़र भरके देखे तुम्हे
जमीं पे चांद कहा बार बार आता है...||✯
समंदर
हम नफरत भी हैसियत देखकर करते है,प्यार तो दूर की बात है !!!
बहुत कम लोग जानते हैं कि वो बहुत कम जानते हैं !
हजारी प्रसाद द्विवेदी
कुछ दर्द जो अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं, आंखों से पानी बन निर्झर नदियों से बहते हैं । समझ ही नहीं पाती,किसी को नही कह पाती, इस जीवन से अब कुछ और नही चाहती ।
दुश्मनो से निपटना तो हम खूब जानते है...मगर मेरे कुछ अपने है जो मोहब्बत से वार करते है...
किसी रात कभी ऐसा भी हो,हम म'र जाएं, उसे खबर न हो.
मर्दों ने युद्ध जीते, धरती जीती, समुद्र जीता, आसमान जीता...
औरतों ने मेकअप किया और मर्द को ही जीत लिया...
सोने से पहले इक काम तुम कर देना. तक़लीफ देते हैं ख़्वाब आने से पहले जगा देना. ~ मालती
दिल पर तो बहुत ज़ख़्म ज़माने के लगे हैंख़ुद-दारी से लेकिन कभी रोया नहीं जाता
पहरे मिरे होंटों पे लगा रक्खे हैं उस नेचाहूँ मैं गिला करना तो बोला नहीं जाता
~ अज़हर नय्यर
व्यवहार बदल जाता है …
जब काम निकल जाता है !!!
शीत लहर के स्पर्श से
जब मन झंकार उठा
मधु कूक कोयल से
जब हृदय में ज्वार उठा
तब शब्द हार पहन
विरही मन मुख से कविता गान उठा
इंसान के जिस्म का सबसे खूबसूरत हिस्सा ❤️ है अगर ये साफ नही तो चमकता हुवा चेहरा बेकार है,
इलज़ाम आखिर हमारे सर ही आया ,
हम चुप रहकर भी बदनाम हो गए ..!!
मैं ढूंढती हूं खुद में...खुद को ही,शायद मैं वो नहीं जो हुआ करती थी..!!
इश़्क़ कि तड़प में विरह का बंदी गया,आज मैं खुद से खुद का प्रतिद्वंद्वी बन गया..!!
तू मेरा दुःख समझतीअगर तेरा भी इश्क में हारा हुआ एक भाई होता..
प्रेम में पागल हो जानाकिसी हद तक ठीक हैबेवकूफ बनना बिलकुल ठीक नहीं है।
~दिनकर
तुम जरा कस के थाम लो "हाथ" मेरा,
'लकीरों' को अच्छा लगेगा "लकीरों" से मिलना..!!
उन हसीन चेहरों पे लानत,
जिनके दिल स्याह और सोच गलीच हो।
इंसान को इंसान की नज़र से तोलिय,
दो शब्द ही सही मगर प्यार से बोलिय।