हर मुश्किल से टकराना चाहता हूं ,तू इश्क़ कर मैं निभाना चाहता हूँ !!
कभी कभी लगता है जिनको मोहब्बत में ज्यादा तमन्ना नहीं होती है न.. उनके ही ज्यादा गहरे ज़ख्म होते हैं
घाट का एक पत्थर हूं मैं
मैंने नदी के हजार रूप देखे हैं!
सिर्फ एहसास बदल जाते हैं दुनिया में वरना
मोहब्बत और नफ़रत एक ही दिल से होती है
राजनीतिक भाषा की रचना ऐसी हैं जिसमे झूठ को सच बताया जाता हैं,
और सच का बड़े सम्मान के साथ हत्या किया जाता हैं
ये इश्क़ नहीं आसां इतना ही समझ लीजे
इक आग का दरिया है और डूब के जाना है
जिगर मुरादाबादी
माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोहे, एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूंगी तोहे- कबीर
हमें मालूम था सदमे मिलेंगे
मगर सोचा नहीं था इतने मिलेंगे
भगवान को जो लिखना था लिख चुके क़िस्मत में,
अब बारी मेरी हैं अपनी किस्मत बनाने की,
कुछ तो लिखा ही होगा,
इन हाथो की लकीरों में बस उसी पे जिंदगी बितानी हैं...
चिंता से चतुराई घटे, दु:ख से घटे शरीर।
पाप से लक्ष्मी घटे, कह गये दास कबीर।।
कबीर
बूढ़ा बाप समझा मुकद्दर संवर गया ,
बेटे ने डिग्री ली और घर से निकल गया ।।
उम्मीदें इंसान से लगा कर शिकायत ऊपरवाले से करते हो!
जिंदगी के रास्ते में सफर के मज़े लो,मंजिल तुमसे खुद किसी मोड़ पर टकराएगी ।
इंतजार उसका ही करनाजिसे आपके हर लम्हे की कीमत पता हो..!!
जिंदगी में इतने काबिल बनो कोई ये,ना बोल दे, कि मेरे बिना तेरा क्या होगा।
माना अगम अगाध सिंधु है, संघर्षों का पार नही है, किंतु डूबना मझधारो में, साहस को स्वीकार्य नहीं है.
मुस्कान को तमीज चाहिएआंसुओ को तन्हाई
अकेला पन जब काटने लगा
तो बचपन की याद आई
भीड़ बहुत है आसपास सबके
पकड़े है कोई न कोई हाथ भी
दिल ने जब सुकून चाहा
याद मां की गोद ही आई
हां खुश हूं में कहता है हर कोई
हंसी...
घर की जिम्मेदारियों से जब दब जाओगे,
क्या असर करती है चाय समझ जाओगे।
सुनो कभी तुम नाराज हूए तो हम झुक जाएंगे,कभी हम नाराज हो तो आप गले लगा देना..!
मैंने तमाम बुरे लम्हात अकेले गुजारे हैं मैं किसी का शुक्र गुज़ार नहीं हूं!