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बहादुर वह नहीं है जो भयभीत नहीं होता, बल्कि वह है जो इस भय को परास्त करता है।

तबियत अपनी घबराती है जब सुनसान रातों मेंतो ऐसे में तेरी यादों की चादर तान लेते हैं ~फ़िराक़ गोरखपुरी

बाजार से खरीदी हुई मूर्ति के सामने हाथ जोड़कर धन मांगते हो, अगर मूर्ति धन देती तो दुकानदार इसे बेचता ही क्यों ??

कोशिश करे ,शिकायत नहीं...

गाली तो नही देते हम पर इन गुप्तसूत्रों को बहुत गरियाने का मन कर रहा है

अधूरी छोड़ के तस्वीर मर गया वो 'ज़ेब' कोई भी #रंग मयस्सर न था लहू के सिवा 🦋

शुक्रिया है जिंदगी यहाँ तक लाने के लिये, यहाँ से अब मैं अकेला ही चला जाऊंगा…!!

बगैर मंजिल का प्रेम लौटने का रास्ता भूल जाता है..

सुप्रीम कोर्ट तक लेकर जाऊँगा मैं इस बात को, कि बहुत गौर से देखा था तुमने मेरी चाय को ...

दिलों के ताले की चाबी लफ्ज़ में नहीं लहजे में होती है !

शीशे, यादें, सपने, रिश्ते, कब कहाँ टूट जाए कुछ नहीं पता।

रूठ जाने कि सदी गुज़र गई.. अब नज़र अंदाज़ करने का ज़माना है..!!

यूं तो आदत नहीं मुड़कर देखने की,पर तुम्हे देखा तो ऐसा लगा कि एकबार और देख लूं

छिन जाती है "मासूमियत" चेहरे की,मुफलिसी "उम्र" देखकर वार नहीं करती..!!

जिंगदी तू भी यूं बेवफा निकलीशिद्दत से चाहा मगर तू भी गैरो सी निकली दे कर लबो पर ख़ुशी मेरेदिल में बेइंतेहा दर्द क्यों दे के गयी..!!

भेदभाव देखें तो चुप न रहें। चुप रहना बढ़ावा देना है।

जख्म खरीद लाया हूंइश्क के बाजार सेदिल जिद कर रहा था कीमुझे मोहब्बत चाहिये

हज़ार चाहने वालों से, एक निभाने वाला बेहतर होता है....

दिन भर तड़पता रहा तेरी यादों के साथ…किसी ने पूछा तो कहें दिया,तबियत ठीक नहीं…!

गणित में कमज़ोर है वो वरना दो पलो के लिए बारह घण्टो की रात कौन ज़ाया करता है...


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