वृक्ष के समान बनो जो कड़ी गर्मी झेलने के बाद भी सभी को छाया देता है।
महाकवि कालिदास
पीड़ा, अवसादों से रिश्ता जोड़कर, नाता खुशियों से तोड़ा था,
मोहब्बत में रूह को फना करके, मैंने अपनी जान निचोड़ा था..
अधूरी छोड़ के तस्वीर मर गया वो 'ज़ेब'
कोई भी #रंग मयस्सर न था लहू के सिवा 🦋
जिंदगी का सबसे कठिन काम है,
सही इंसान की पहचान करना....
सस्ती लोकप्रियता की चाह और पैसों की भूख
सरेआम संस्कारों के साथ साथ जिस्म को भी नंगा करती है।
तन को सौ बंदिशें , मन को लगी न रोक तन की दो गज कोठरी , मन के तीनों लोक !!
ईलाज़ ये है कि मज़बूर कर दिया जाऊ,वरना यूं तो किसी की नही सुनी मैंने..
ऊँचे मकान खा गए सब मेरे घर की धूप
हिस्से में मेरे रह गई बालिश्त भर की धूप।
मैं किसी शख़्स से बेज़ार नहीं हो सकता
एक ज़र्रा भी तो बेकार नहीं हो सकता ।
भर जाएँगे जब ज़ख़्म तो आऊँगा दोबारा
मैं हार गया जंग मगर दिल नहीं हारा
अहंकार की...सबसे बड़ी खराबी यही है कि...यह कभी भी इन्सान को..महसूस नहीं होने देता कि... वह गलत है...
स्वभाभिमान से जीने की आदत डालिए और
कुछ फ़ालतू लोगों को सूची से ब्लॉक कर दीजिए..!!
यूँ खामोश रह कर ना सतामाना के हम तेरे तलबी है दूर रहकर परेशान ना कर,,,,,बेचैन दिल को और बेचैन ना कर,इश्क़ करना है तो कर एहसान ना कर..
घर बटा बर्तन बटे सारी ज़मीनें बाँट लीं
बाप के मरते ही बच्चों ने पतंगें छाँट लीं
इक तरीक़ा ये भी था फल बाँटते वो उम्र-भर
भाइयों ने पेड़ काटा और लकड़ी बाँट लीं
ढूँढोगे तो सुकून खुद मे ही मिलेगा..दूसरो मे उलझन मिलती है....
सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें,जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहें,शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम,आंधी से कोई कह दे की औकात में रहें !
अगर सोने का हिरण चाहेगी सीता
तो बिछड़ जायेंगे उसे राम ये तय है
चौदह वर्ष वनवास रहा
एक एक रात कटी रोते रोते
तब जाकर बार समझ में आई
सोने के हिरण नही होते
रावण सबके मन में हैं,राम अभी तक वन में हैं……!!
हिचकियाँ आती थी उसे ,
मेरे याद करने से ,
शायद अब हिचकियाँ भी ,
बेवफ़ा हो गई हैं ...!!
ताश में जोकर और अपनों,
की ठोकर अक्सर बाज़ी घुमा देते हैं....