जो देख के हँसता था हम जैसे फ़क़ीरों कोशोहरत की बुलंदी से उतरा तो बहुत रोया-रईस अंसारी
सालों बाद उन पर नज़र पड़ी, उन पर ही ठहरी रह गयीं ... ~ दीपक चौधरी
खुद से बेखबर हूंपता नही मैं कौन हूंदर्द है ज्यादाफिर भी मौन हूंइधर उधर मैंगलियों में फिरता हूंकोई पूछले गर इकबारकी मैं कौन हूंकह दूंगा ..खुद की तलाश में हूंभटकता मैं कोई राहीदीन दुनिया से भी बेखबर हूं शायद...
आवाज तक नहीं हुईऔर सब कुछ टूटकर बिखर गया....!!
आंखों के समॅंदर में तूफ़ान का आग़ाज़ हैं ,अब कोई अपनी कस्तियां संभालें भी तो कैसे..!!
मेहनत तो हर फिल्ड में करनी पड़ती है
बेकार पड़े रहने से लोहे में भी जंग लग जाती है
बहते पानी की तरह रहोगेतो कचरा ख़ुद किनारे हो जाएगा !
खैर अच्छा तो कुछ नहीं,
पर जो है सही है..
शिक्षा सबसे अच्छा दोस्त है।
एक शिक्षित व्यक्ति हर जगह सम्मानित होता है।
शिक्षा सौंदर्य और युवाओं की धड़कन है"
- चाणक्य
ज्ञानी वह है, जो वर्तमान को ठीक प्रकार समझे,
और परिस्थिति के अनुसार आचरण करे।
इंसां तिरे वुजूद का मक़सद ही इश्क़ था, तू नफ़रतों की राह में कैसे भटक गया ?
वक्त बेवक्त छोटी छोटी खुशियों के संग,कुछ आधी अधूरी ख्वाहिशें भी ज़रूरी हैं ।इन आधी - अधूरी हसरतों से ही तोहमारी जिंदगी की खुशियां होती पूरी है ||
इच्छाओं और उम्मीदों के इस सफ़र मेंसिर्फ़ एक दिन और रात की दूरी...
एक तरफ दुनियाँ चांद पर भी जा रहीं है,
दूसरी तरफ जाति से बाहर विवाह नही होता !
दिल है बेताब नज़र खोई हुई लगती है,
ज़िन्दगी दुख में बहुत रोई हुई लगती है।
तिलक राज पारस
पिता सी ही महफ़ूज़ जिन हाथों में होती है कलाई
नारी के लिए वो शख्स महज़ होता है उनका भाई।
सबने कहा अच्छे से जाना
सिर्फ मां ने कहा बेटा घर जल्दी आना
चाहता था मैं, वफा का सिला..🦋मगर वो भी जख्मों में ही मिला
आज फिर जीने की तमन्ना है,आज फिर ' मरने' का इरादा है
इस दौर में इज्जत दौलत पर निर्भर करती है ,
जो जितना अमीर होगा उसकी उतनी इज्जत होगी ...
जिनके ऊपर जिम्मेदारियों का बोझ होता है
उनके पास रुठने और टूटने का वक्त नहीं होता..