मकानों को घर मे तब्दील करने वाली स्त्रियांकरती हैं अनगिनत सब कुछ हर बारअपने आत्मसमान को दांव पर लगाकरफिर भी पाती है तिरस्कार अक्सर उन्हीं अपनों से जिनके लिए वह सबकुछ करती है
थोडी आज़ादी थोडी पाबंदी
थोडा वक़्त थोडी चाहत
थोडे बादल थोडी बारिश
थोडी नादानी थोडी समझदारी
थोडा तुम थोडी मैं
बस और क्या चाहिए ??
मिलकर पूरा हम हो जायेंगे
ना थोडा बचेंगे ना पूरा
दोनों मिलकर आकाश भर में समाएंगे
फिर ख़्वाब सारे हकीक़त...
सिर्फ एक दिल ही है जो बिना,आराम किये सालों काम करता है,इसे हमेशा खुश रखिये ,चाहे ये आपका हो या आपके अपनों का !
यदि आपके पास कोई समस्या आती है
तो उसका समाधान खोजें
उससे दूर नहीं भागे !
दो ग़ज सही ये मेरी मिल्कियत तो हैऐ मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया।
कुछ सफ़र ज़िंदगी के ऐसे होते हैं जिसमें पैर नहीं दिल थक जाते हैं...
जो तुम्हारा है तुम भी उसी के रहो ,
क्योंकि बेहतर की तलाश तुम्हें अक्सर अकेला कर देती है !!
कदर कर लिया करो कुछ लोग बार-बार नहीं मिलते मेरे जैसे तो बिल्कुल भी नहीं मिलते...
पवित्र महीना सावन का है,
भोले तू मुझको भी पवित्र कर दे,
महका सकूं अपने कर्मों से,
सबको तू मुझको ऐसा इत्र कर दे..!!
“संगीत”
लगाता है मन की पीड़ाओं परमरहम सुकून का
कुछ लोग ऐसे मिले जिंदगी मेंसाथ बैठकर हंस गए और पीठ पीछे डंस गए
यूँ ही आबाद रहेगी दुनिया,
हम न होंगे, कोई हम सा होगा !