जीवन में हमेशा इंतजार ही नही करना चाहिए,क्योंकि सही वक्त कभी नही आता,उसे लाना पड़ता है !
आज की पीढ़ी को..
ईमानदार बाप निकम्मा लगता है..!!
ढूँढोगे तो सुकून खुद मे ही मिलेगा..दूसरो मे उलझन मिलती है....
फिक्र से चेहरे कि चमक मिटा लेती है,गंदी नियत लबों से उसके मुस्कान हटा लेती है,
पीड़ा भी झलकती है उसकी आंखों में,लेकिन खुद को वो निःशब्द बना लेती है,
और अपनी औकात से ज्यादा सहती है वो,अपमानित हो चरित्र तो खुद...
चार दिन बाज के ना उड़ने से
आसमान कबूतरों का नहीं होता.!!
जमाने में निकल कर देखी हिंदू मुस्लिम की जलन,लहू में लथपथ हो गयी इंसानियत लिखते हुए कलम.
आप दुखो को गिनने बैठ जाओगे ,जाहिर है खुशियों की गिनती भूल जाओगे
मन खराब हो तो भी शब्द
खराब नही बोलने चाहिए..!!
मैं निभाता रहा वफ़ा वो धूल झोंकती रही,
फना करके मेरी रूह मुझे दफन करती रही..!!
हैसियत आसमान जैसी होनी चाहिए
क्योंकि जमीन कितनी भी महंगी हो लोग खरीद लेते हैं !!
साधू भूखा भाव का,
धन का भूखा नाहिं,
धन का भूखा जी फिरै,
सो तो साधू नाहिं।
कबीरदास
एक व्यक्ति जो तुम्हें आगे ले जायेगा.. वो तुम स्वयं हो..।।
हौसलों की उड़ान को रोक पाना
मुमकिन नहीं न मुमकिन है...!!
पीठ से निकले खंजरों को जब गिना मैने..।ठीक उतने ही निकले जितनों को गले लगाया था मैने..!!
क्या भला मुझको परखने का नतीजा निकला , ज़ख्म-ए-दिल आपकी नज़रों से भी गहरा निकला !!
मोहब्बत सेहरी में पिए गए आखिरी घूंट की तरह होनी चाहिए ।। जिसके बाद दूसरे घूंट की गुंजाइश ना रहे ।।
ईमानदारी को धन से नफरत है
और समाज को ईमानदारों से।
प्रेम भी आया नहीं सौभाग्य में ,साधुओं को क्या मिला वैराग्य में
स्त्रियां कायनात गढ़ती रही है….फिर भीअस्तित्व के लिए लड़ती रहीं हैं….!!!
माँ
एक बोझा लकड़ी के लिए
क्यों दिन भर जंगल छानती,
पहाड़ लाँघती,
देर शाम घर लौटती हो?
माँ कहती है :
जंगल छानती,
पहाड़ लाँघती,
दिन भर भटकती हूँ
सिर्फ़ सूखी लकड़ियों के लिए।
कहीं काट न दूँ कोई...