World's Best Cow Hospital

संघर्षों की समर भूमि में, हमसे पूछो हम कैसे हैं, कालचक्र के चक्रव्यूह में, हम भी अभिमन्यु जैसे हैं !

तू हिम्मत की बात मत कर,,,,, यकीं कर मेने उसको किसी और का होते हुवे भी देखा है ,,,,,

अगर आपको पक्षियों की आवाज़ पसंद है तो पिंजरे मत बनाइए, पेड़ लगाइए। ~ अज्ञात

उसे उस हद तक चाहो , वो भी बोले अच्छा ठीक हैं करलो ..!!

सच में अक्सर ऐसा होता जब भी मेरे मन और संघर्ष के बीच युद्ध होता है सोचते अब लड़ के खड़ा हुए की फिर लड़खड़ा के गिर ही जाते हैं शायद यही असल ज़िंदगी का यथार्थ मतलब है। नेहा यादव

बेईमानी से कमाया हुआ पैसा , बीमारी में चला जाता है.....!!

सबका दिल जितने में क्या फ़ायदा, मजा तो बस एक के दिल पर कब्जा करने में है..

कोई भी इंसान इतना खूबसूरत नहीं होताजितना उसे उसका चाहने वाला बना देता है

बढ़ रहा है ज़िंदगी का कैनवस हर दिन मगर रंग गहरा अब नहीं दिखता किसी तस्वीर में राघवेंद्र द्विवेदी

इंसान के समाज में होने से कहीं अधिक जरूरी है, इंसानियत का समाज में होना....!!

बिन मेहनत तरक्की चाहकर, रूपयों से खुशियां छांट लेते हैं, स्वाभिमान बेचकर अपना, वो किसी के भी तलवे चाट लेते हैं..

दुनिया बड़ी भुलक्कड़ है केवल उतना ही याद रखती है, जितने से उसका स्वार्थ सधता है। हज़ारी प्रसाद द्विवेदी

यदि आपके पास कोई समस्या आती है तो उसका समाधान खोजें उससे दूर नहीं भागे !

जब खोने को कुछ ना हो, तब पाने को बहुत कुछ होता है....

दो नावों पर सवार था‚ उसकी ज़िन्दगी का सफ़र; मैंने ख़ुद की ...

तन्हा जीवन, उदास हम, किस्मत पर कांटे उग आएं हैं, क्या सुनाएं दास्तान अपनी, अंदर कितने राज़ छिपाएं हैं..!!

उफ्फ ये रात ये आवारगी ये नींद का बोझ, अगर हम अपने शहर में होते तो घर चले जाते...

मैं कितनी भी कोशिश कर लूअपनी शायरी में प्यार के रंग नहीं उड़ेल पाती मेरेशब्दोंमें अक्सर जिक्र होता है रुसवाई, बेवफाई,बेरुखी,बेचैनी,आँसूक्योंकि आज तकमुझे तुमसे यही सब मिला हैइश्क क्या होता है?कभी जान ही नहीं पाईजो तुमसे आजतक नही मिलाशायद वही इश्क था

कृष्ण में लीन मीरा कृष्ण-प्रेम में मग्न है रहती सुधबुध है खोई अपनी बावरी कृष्ण-भजन में डूबी रहती दरस की अभिलाषी मीरा विष को भी अमृत मान है पी लेती मोह कहाँ है उसे इस जग से हर साँस वो गिरधारी को समर्पित करती ऐसी है दर्श दिवानी...

संघर्षों की समर भूमि में, हमसे पूछो हम कैसे हैं, कालचक्र के चक्रव्यूह में, हम भी अभिमन्यु जैसे हैं। हरिओम पंवार


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