झूठे इल्जामों की फिक्र ना करें वक्त का ग्रहण चाॅंद ने भी झेला था!!
त्याग दो सब ख्वाहिशें कुछ अलग करने के लिए‘राम’ ने खोया बहुत कुछ ‘श्री राम’ बनने के लिए...
तुम वही हो जो तुम सोचते हो !
खामखां मैने गहराई पसंद कर ली,
कोई उतरा ही नहीं मेरी सोच तक ।
पहले औरत नसीब लेकर आती थी, अब औरत नसीब देख कर आती है।
क्यूं सोचें, के चार लोग क्या कहेंगे?
समाज में महज़ चार लोग थोड़ी है।
ये तेरा हक़ है कि तुझे गौर से देखा जाए ,
कि क़भी मिलो मुझे ये फर्ज़ अदा करना है ।।
वाहेगुरु जी का खालसा,
वाहेगुरु जी की फतह
आइना जब भी उठाया करो,
पहले देखो... फिर दिखाया करो।
हालातों ने खो दी इस चेहरे से मुस्कान..वरना जहाँ बैठते थे रौनक ला दिया करते थे…
निन्दा का सत्य भी झूठ लगता है, जबकि प्रशंसा का झूठ सत्य सा मालूम होता है।
ओशो
पेट का कोई धर्म नहीं होता,राजनीति तो भरे पेट वाले ही करते हैं…
यूँ तो अमरोहा से मेरा कोई नाता ना था
फिर कमबख्त नामुराद मोहब्बत हुई
और उसपर सितम तुझ बेवफा से हुई
और हम खुद बे खुद
जॉन ऐलिया के मुरीद हो गए
भरोसा कोई एक तोड़ता है,
नफरत सबसे होने लगती है...
दुनिया का सारा मोटिवेशन एक तरफऔर मां पापा का यह कहना कि घर के हालात तुम्हें बदलने है ,एक तरफ!
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैंफिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं।
बुरा तो तब लगता है जब छिपकली और कॉकरोच से,डरने वाली लड़की दिल से खेल जाती है.
सुना है, घर के कई टुकड़े हो गए।अच्छा! अच्छा! ,बच्चे बड़े हो गए।।
मत पूछ मेरी बेबसी का सबब क्या है,
पहले पिघलाया फिर पत्थर किया था..!!
अभी भरा नहीं था गम पति के जाने का,
उससे पहले रिश्तेदारों ने बेघर कर दिया,
भरे नहीं थे घाव एक मां कि चूड़ी टूटने के,
बच्चा बड़ा होने से पहले उन्हें लावारिस कर दिया..!!