अपनी ज़िंदगी में खुद रोशनियां पैदा करो,यकीनजानो तुम्हारे अलावा तुम्हारा कोई भी वफादार नही है ...
उलझनें भी मीठी हो सकती हैं,
जलेबी इस बात की ज़िंदा मिसाल है।
प्रेम भी आया नहीं सौभाग्य में ,साधुओं को क्या मिला वैराग्य में
बेहिसाब हसरतें ना पालिये..
जो मिला है उसे संभालिए..!!
रात को जब अकेला होता हूॅं
खुद को सवालों के कठघरे में पाता हूं
फिर हमनें अपनी आंखो को सजाया है तुम्हारे लिएतुम अपना दिल कब सजाओगे मेरे लिए....!!
लैलाओं को महलों का दुःख होता है,चौराहों पर मजनू पत्थर खाते हैं.
ज़िंदगी में इतने मंज़र देख लिए है कि दिल अब हर छोटी छोटी सी बातों से डरता है।
मुझसे ही क्यो पूछते हो सब, उनके बारे में, कभी उनसे भी पूछ लिया करो, मेरे बारे में...
मैं तुम्हारे प्रेम का पूर्ण विराम बनना चाहता हूं...
प्रथम नहीं, प्रेम पथ का अंतिम विश्राम चाहता हूं.
तमीज़ बताती है परवरिश आपकी, आप पढ़े लिखे हैं तो क्या हुआ
हे भगवान ये क्या हो रहा है।
चक्र कहां है आप का।
प्रेमपाप यदि हैइस धरा पर पवित्र फिर क्या होगाजल नहीं थल नहींवायु नहीं गगन नहीं अग्न नहीं
फिर बोलों तुमक्या शिव हृदय पत्थर होगानहीं नहींहोगा करुणा भरा ईश्वरतभी तोशुद्ध हृदय प्रतिबिम्ब उसका प्रेम होगा।
राजेश गौरी
मेरे लहजे पे न जा क़ौल का मफ़्हूम समझ
बात सच्ची हो तो लहजा नहीं देखा जाता
प्रीत न जाने जात कुजातनींद न जाने टूटी खाट,भूक न जाने बासी भातप्यास न जाने धोबी घाट
सुनो,,
तुम कबूल तो करो इश्क मेरा,,
मैं खाना बनाना भी सीख लूंगी।।
दिल से उतर जाने वाले लोग
सामने खड़े भी हों तो भी नज़र नहीं आते !
काम करने वाला मरने से कुछ घंटे पूर्व ही वृद्ध होता है।
~वृंदावनलाल वर्मा
इंसानियत का कद, हमेशा हैसियत से बड़ा होता है...
औकात से बड़े दिखावे इंसान को, अक्सर कर्ज़ में डुबो देते हैं...