भस्म तेरा श्रृंगार प्रभु, तू मेरा पहला–आखिरी प्यार प्रभु,सबके लिए महादेव है तू…पर मेरे लिए संसार प्रभु.
प्यार वह नहीं है जो आप कहते हैं।
प्यार वह है जो आप करते हैं।
मरना तो है ही,
अपने मनुष्यत्व और अधिकार के लिए मरो !
मेरी दोस्त ने अभी कहा - ये जो लड़कियां होती है ना, इनसे आप थोड़ा दूर रहा करिए!….इनके पास रोने के सिवा कुछ नहीं होता.
जब भी दुनिया ने मुझसे प्रेम की पूर्ण परिभाषा पूछीं मैं कागज़ पर केवल तुम्हारा नाम ही लिख पाया।
वो चिराग नही है हम की बुझा दे कोई आ के
जिस का भी जी चाहे हवाओं में जलाले हमे
कटी हुई टहनियां कहा छाव देती है,
हद से ज्यादा उम्मीदें हमेशा घाव देती है…!
ख़ुद से ही भाग रही हूँ
क्या ढूँढ रही हूँ मालूम नहीं
क्या पाना है जानती नहीं
भटक रही हूँ एक न ख़त्म होने वाले सफ़र में
चल रही हूँ इन काँटों से भरे रास्तों पे
न कोई ख़ुशी है...
सत्य के बाद मनुष्य निर्भय हो जाता है, और झूठ के बाद कायर।
जया अंजनी
मानता हूं मिजाज में सख्ती है मेरे मगर,
मैं इज्जत देने वालों की इज्जत करता हूं.
अकेला चलना किसी के,
पीछा चलने से बेहतर है....
चलो हकीक़त से थोड़ी मुलाक़ात करते हैं ,जितनी औकात बस उतनी ही बात करते हैं !!
सुनो मेरे दोस्तों पैसा इतना कमाओ की,चार लोग तुम्हे अपना दामाद बनाना चाहे…
मोह माया सब मृगतृष्णा है ...
अभी बहुत रंग हैं जो तुम ने नहीं छुए हैं.... कभी यहाँ आ के गाँव की ज़िंदगी तो देखो....!
आज की पीढ़ी को..
ईमानदार बाप निकम्मा लगता है..!!
जिन्हें पिता की नसीहतें और घर की मुसीबतें याद हैं, वे भूलकर भी गलत रास्ते नहीं जाते ।
प्रह्लाद पाठक
जैसा दिल बनाया है, काश वैसा ही नसीब भी बना देता मालिक।।
किसी का मिलना, मिलकर बिछड़नाकभी हसना कभी मुस्कुरानाऔर फिर मुस्कुराकर रो देनायहीं तो हैं ज़िंदगी..!!
बादलों की ओट से सूरज निकलने वाला है
सफर जारी रखो, वक्त बदलने वाला है।
यशवर्धन जैन