तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहींकमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यक़ीन नहीं
~ दुष्यंत कुमार
सबका दिल जितने में क्या फ़ायदा, मजा तो बस एक के दिल पर कब्जा करने में है..
कोशिश आखरी सांस तक करनी चाहिए, या तो लक्ष्य हासिल होता है या अनुभव
ईश्वर किसी का नहीं,
अपितु सर्वत्र ईश्वर का है !
हटा पतझर के पहरा, तनिक मधुमास आवे द
उदासल मन का देहरी पर, किरिन सविलास आवे द।
कसक एतना, मसकि जाता करेजा, दर्द अइसन बा
जिये के होसिला लेके, नया उल्लास आवे द।
झुकल आकास देखता, घुटन से जिन्दगी ऊबल
चुकल एहसास, बिनती बा, नया...
उदासी में कुछ पल जन्नत में जिओगे क्या,चाय बना रहा हूं अदरक वाली पिओगे क्या ?
बेईमानी से कमाया हुआ पैसा ,
बीमारी में चला जाता है.....!!
पहले निचोड़ लेते हैं जिस्म अपनी आंखों से, फिर दुपट्टा संभालने कि हिदायत देते हैं..!!
मिलकर सबसे रहिए यारों,
लेकिन दबकर किसी से भी नही...
जिन्दगी कुछ ऐसी मोड़ पे आकर रुक सी चुकी है,की मजबूरी जीने की हो गई है और चाहत मारने की !
कद्र करेगा वो भी एक दिन मेरीजब अकेलापन उसे भी खायेगा..!!
आइने से डर जाएंगे लोग यहां...
कभी किरदार नज़र आया जो चेहरे की जगह..!
पहले हेलीकाप्टर नेता आयेअब हेलीकाप्टर पत्रकारिता आ गई…विकसित होने का रास्ता या दिवालियापन…
पसंद उसे करो जो परिवर्तन लाए,
प्रभावित तो मदारी भी कर लेते हैं....
बहुत तकलीफ देते है वो जख्म,
जो बिना कसूर के मिलते है।
जब कभी मुझे तुम्हारी याद आती हैं तो मैं नहीं देखती हमारी तस्वीरें,मैं पढ़ती हूं तुम्हारी लिखी कविताएं जहां मैं और तुम हमेशा साथ होते हैं !
भूख मौत से बड़ी होती है, सुबह मिटाओ रात को फिर खड़ी होती है !!
गुलशन के निगहबानो हम को न भुला देना
कुछ ख़ार भी लाज़िम हैं फूलों की कहानी में
ऐ दीदा-ए-तर तुझ को मालूम नहीं शायद
बह जाते हैं ख़्वाब अक्सर अश्कों की रवानी में
बहुत आसान नहीं थानज़दीकियों का फ़ासलामीलों तय किया हैअपनों को अपना समझते समझते!