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किसी की गुलामी से लाख बेहतर हैं, अपनी अपाहिज ज़िंदगी जीना...

भावनाओं का कोई पार्थिव शरीर नहीं होता, उनका बस अंतिम संस्कार होता है।।

अब रिश्ते भी नौकरी की तरह हो गए है, बेहतर Offer मिलते ही लोग Change कर लेते है !

अब मुझे दूसरे का क्या, ख़ुद का आंसू पोंछना नहीं आता, हमने देख लिया हैं रूठ कर, यहां कोई मनाने नहीं आता!

जरूरत जिन्हें दिमाग की हो, उन्हें दिल कभी मत देना.....

ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं, मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बे-ख़बर नहीं. आलोक श्रीवास्तव

वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगेतुम्हें याद है कुछ ये शब्द किस के थे.!

नादान हो तुम तुम्हें अभी इल्म नहीं है ये ज़िन्दगी है मेरी जान कोई फिल्म नहीं है..!!

नहीं पढ़ीं जातीं सम्पूर्ण कविता अब उनसे 'दो' पंक्तियाँ दो उन्हें, किताबें वापस ले लो।

सत्य के बाद मनुष्य निर्भय हो जाता है, और झूठ के बाद कायर। जया अंजनी

मैं केवल दो लोगों को ही सुंदर लगता हूं मम्मी को और कपड़ा बेचने वालों को

मुझे अपने रिश्तेदारों से उतना ही डर लगता है, जितना किसी शादीशुदा को अपने बीबी से

सारा ज़माना जब खिलाफ था भूलो नहीमें आपके बाप के कंधे से कन्धा मिलाए खड़ा था

हम पहुंचेंगे हर घर तक, न्याय का हक़, मिलने तक! गली, मोहल्ला, संसद तक न्याय का हक़, मिलने तक! सहो मत...डरो मत!

विरह कि आग में जल रही, अपनी ज़िन्दगी को खींच रहा हूं, बंद हो चुकी अपनी प्रेमग्रंथ के, जज्बातों को सींच रहा हूं..!! विरक्ति

है जो हाल मेरा उसका भी हाल है इश्क़ कर के अब दोनों को मलाल है

काश मै कुछ लिख कर हटा देता , मैं लिखता जातिवाद और मिटा देता ...

जख्म खरीद लाया हूंइश्क के बाजार सेदिल जिद कर रहा था कीमुझे मोहब्बत चाहिये

अकेले चलना सीखो क्योकि सहारा कितना भी सच्चा हो, एक दिन औकात दिखा ही देता है...

पहले निचोड़ लेते हैं जिस्म अपनी आंखों से, फिर दुपट्टा संभालने कि हिदायत देते हैं..!!


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