फर्क बहुत है तेरी मेरी समझ में,..तूने जज़्बातों से सीखा है और मैने हालातों से..!!
वो जो फरेब करके गया हैं
शायद उसने महादेव के बारे मे सुना नहीं हैं।
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैंफिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं।
तूफानों से आँख मिलाओ सैलाबों पे वार करोमल्लाहों का चक्कर छोड़ो तैर के दरिया पार करो
~ डॉ. राहत इंदौरी
मसला ये नहीं की लोग परवाह क्यों नहीं करते,
मुद्दा ये है की हम उम्मीद क्यों करते हैं...
पागल ही हूँ मैं जो तेरे शहर में बैठ कर तेरा ही इंतिज़ार करता हूँ…
"बहुत कुछ टूटता है तब नया बनता है।"
~ गिरिजा कुमार माथुर
जिन्हें तकदीर रुलाना चाहे ,उन्हें बेक़दरों से इश्क़ हो जाता है.
कोई तो जिद करे हमसे भी मिलने की ,
हमें भी महसूस हो हम भी आरजू है किसी की ..!!
राय पहले से बना ली तू ने
दिल में अब हम तेरे घर क्या करते
शब्दों से तुम बन गए
पंक्तियों में मेरे ढल गए
स्याही में मेरे पिघल गए
रचना मेरी तुम बन गए।
हर छंद में तुम रम गए
मैं तुम पर अब क्या लिखूं?
मेरे गीत के नज़्म बन गए
जीने की वजह तुम बन गए।
स्वर लहरी तुम बन...
अगर मुझमें कोई हुनर होता तो,
मैं तुम्हें अपना कायल बना लेता,
और जहान जीत लेता उस रोज,
जब मैं तेरे पांवों में पायल पहना लेता..!!
बढ़ती हुई समझ,जीवन को मौन की ओर ले जाती है.!
यूं तो दिखावे के लिए लोग बहुत ही दिल से मिलते हैं पर जो दिल से मिलते हैं वो बड़ी मुश्किल से मिलते हैं !!!
खामोश लोग
सबसे तेज़ दिमाग रखते हैं ...
खुद को कम बताकर तो देखोसामने वाले को अपनी औकात बताने में देर लग जाए तो कहना…..
नोट- यहाँ "औकात" से तात्पर्य केवल धन से तो बिल्कुल भी नही है॥
हौंसला और रुतबा बनाए रखिए,दिन अच्छे बुरे आते जाते रहेंगे।
न दिन होता है अब न रात होती हैसभी कुछ रुक गया हैवो क्या मौसम का झौंका थाजो इस दिवार पर लटकी हुई तस्वीरतिरछी कर गया है….
चुरा लो अभी हर हसीन लम्हा जिंदगी से,फिर जिम्मेदारियां मोहलत नही देंगी !
मेरे गाँव का मौसम बसंत हो गया है,यानी, तुम शहर से गाँव आई हो।