मैं इज़हार करूं तो ना भी हो सकती हैं, तुम करो तो हां की जिम्मेदारी मेरी ...
हर रात जान बूझकर रखता हूँ दरवाज़ा खुला ,
शायद कोई लुटेरा मेरा गम भी लूट ले...
ख़ुश मिजाजी मशहूर हैं हमारी सादगी भी कमाल है
हम शरारती भी बेइंतेहा के है तन्हां भी बेमिसाल है
कहते-सुनते बात तुम्हारी सो जाता हूँ
ऐसे ही मैं रोज़ तुम्हारा हो जाता हूँ
अश्विनी यादव
कहता है, वो महफूज रहे वो घर के बंद दीवारों में, बता...द्रौपदी कहा लूटी थी, घर मे या बाजारों में...!!
बाप मेरा राजा नहीं था लेकिन ,
पाला मुझे राजकुमार की तरह था ।।
वह नास्तिक है, जो अपने आप में विश्वास नहीं रखता।
स्वामी विवेकानंद
ख़ुद के साथ समयबिताने में मज़ा आने लगेतो समझ जानापरिपक्व होने लगे हो
तेरी मोहब्बत का असर दिखने लगा है, वतन नफरतों से नफरत करने लगा है !
किसने कहा तू अकेला है ,आईने में जा के देख..
दुनिया का सबसे ताकतवर इंसान तेरे सामने खड़ा है..!!
खूबसूरत तो औरतें होती हैंहम मर्द तोसिर्फ अमीर या गरीब होते हैं
खुदा ने कहा भुला क्यों नहीं देते उसे...
मेने कहा इतनी फ़िक्र है तो,
मिला क्यों नहीं देते उसे।।
मै खुदकुशी से मर जाऊंगी,उससे कहना हादसे में जान गई.
पिताजी के बाहर जाने पर मां कभी
किवाड़ तुरंत बन्द नहीं करती थीं.
खुली छोड़ देती थीं सांकल
कभी कभी पिताजी
कुछ दूर जाकर लौट आते थे
कहते हुए..
कि कुछ भूल गया हूं
और मुस्कुरा देते थे दोनों...
मां ने सिखाया...
किवाड़ की खुली सांकल
किसी के लौटने...
की महोब्बत की हथेली पर जुनून का जाम रख दूंगा ,
अगर बेटी हुई मेरी तुम्हारा नाम रख दूंगा...
अगर होता दिलों के पास कोई कान,तो आँखों की ख़ामोशी भी सुनी जाती.!
सोचा था हर मोड़ पर याद करेंगे तुम्हे
लेकिन पूरा रस्ता ही सिदा था..
ना दुआ से बढकर कोई अल्फाज़ है. ना मुस्कुराहट से बेहतर कोई इलाज है.
शिकार है मासूमियत गरीबी की,
फिर भी चेहरे पर मुस्कान है,
रूपयों का मोह नहीं उसे,
बस दो निवाले में बसती उसकी जान है
थक चुका हूं इन पुराने अल्फ़ाज़ों से खेलते खेलते,
तुम मेरे दिल से खेल कर एक नया शब्दकोश उपहार कर दो..!!