नियम के बिना और अभिमान के साथ
किया गया तप व्यर्थ ही होता है।
वेदव्यास
छीन लेते हैं रंगत चेहरे की,
बेटियों को जो बोझ समझते हैं,पहले छीन लेते हैं खुशियां उनकी,
फिर हंसने को कहते हैं..!!
सुनसान रास्तों पर भी , ज़िंदगी ख़ुशगवार लगती है ,,जब मौजूद हो कुछ भटके हुए साये , लाजवाब बेशुमार लगती है ,,भीड़ थी आसपास बहुत कि उलझनें और उलझ गई ,, इसलिए ...छोड़ दिया सब कुछ ,, अब ना कोई...
फ़र्क पहले पड़ता था..अब तो असर भी नहीं होता..
अहमियत दी तो कोहिनूर खुद को मानने लगे,
कांच के टुकड़े भी क्या खूब वहम पालने लगे.
तुम लोगो की बुराई छुपाओकल क़यामत के दिन अल्लाह तुम्हारे गुनाह छुपाएगा,,,
पुस्तकालय एक ऐसा वृक्ष है, जहाँ विचारों के फल हर मौसम में लगते हैं ।
स्नेह के उत्तर में माँ शीर्ष पर है, पिता तो सदा प्रश्नों में आते हैं !
इस समाज में जो आदमी बुरा नहीं है,
वो बेवकूफ समझा जाता है...
तेरे जानें से ज्यादा फ़र्क नहीं पड़ा
जहा दिल होता था अब वहा दर्द होता हैं.
हिचकियाँ आती थी उसे ,
मेरे याद करने से ,
शायद अब हिचकियाँ भी ,
बेवफ़ा हो गई हैं ...!!
अहंकार भी आवश्यक है,जब बात अधिकार, चरित्र या सम्मान की हो...
मोहब्बत रंग दे जाती है जब दिल दिल से मिलता हैमगर मुश्किल तो ये है दिल बड़ी मुश्किल से मिलता है
सुविधाएं अगर हमारी आजादी को गिरवी रख लें,
तो उन सुविधाओं का सुख सहूलियत मात्र नहीं होता,
गुलामी में बदल जाता है।
चित्रा मुग्दल
हर ख्वाहिश,
हर ख्वाब,
हर अरमान,,
पूरे कहाँ होते हैं ??
जो हमारे लिए ज़रूरी हैं....
हम उनके लिए ज़रूरी कहाँ होते है ??..
मैं और मेरा रेड कार्पेट
अक्सर ये बातें करते हैं
तू होता तो ऐसा होता
तू होता तो वैसा होता
तू बीच की रेत पे बिछता, तू गार्डन में फैला होता
तू समंदर के तल पे लेटकर मेरी ईगो सहला...
वो वक्त और था जब दिल से मुस्कुराया करते थे..
अब चेहरे की खुशी का दिल से कोई वास्ता नहीं..!!
इश्क़ के तो साथ मसअला है ये
जान वफ़ादारों की ही लेता है
चाँदनी की रौशनी में खो जाएं,
ख्वाबों की दुनिया में खो जाएं।
दिल की धड़कनों को ताल में बदलें,
खुद को खो जाएं, खुद को खो जाएं।
प्यार की बारिश में भिगो जाएं,
खुशियों की लहरों में उड़ जाएं।
ख्वाबों की उड़ान में सवारे,
खुद को खो...
जो खुद संभल कर चल नहीं सकते
ठोकर लगते ही
वो इल्जाम देते हैं पत्थर को