काम ऐसा करिये जिसमें कामयाबी के साथ-साथ,
सम्मान और सुकून भी मिले।
एक अरसे से हमारी बोलचाल बन्द हैफिर भी क्या यादों की आवाजाही बन्द है
कर्म के बीज अच्छे हो या बुरे,
अपने समय पर पेड़ बनकर फल ज़रूर देते हैं !!!
मैं हूँ गिरा हुआ सबको बताया उसने,यूँ ही सही…महीनों बाद लबों पे नाम तो आया।
दर्द ही सही मेरे इश्क का इनाम तो आया,खाली ही सही हाथों में इनाम तो आया !!
हर रात कि "सुबह" ऐसी चाहता हूं,कि मेरे उठते ही नज़र "तू" आ जाए,तेरी "मुस्कान" देख कर खोलूं मैं आंखें,और मुझे देखकर तू मेरी "बाहों" में समा जाए..!!
सबसे ख़तरनाक होता है
मुर्दा शांति से भर जाना
न होना तड़प का सब सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और काम से लौटकर घर जाना
सबसे ख़तरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना
सबसे ख़तरनाक वह घड़ी होती है
आपकी कलाई पर चलती हुई...
प्रेरणा के लिए पिता का संघर्ष,
देखना ही पर्याप्त होता है.....
मोहब्बत सिर्फ धोखा है ये तब समझ आया था,
जब एकांतवास ने मुझे अपना कैदी बनाया था..!!
नहीं पढ़ीं जातीं सम्पूर्ण कविता अब उनसे'दो' पंक्तियाँ दो उन्हें, किताबें वापस ले लो।
मोह माया सब मृगतृष्णा है ...
तुम्हारी तपन जला रही है,,,,,
वरना कब के बुझ गए होते ....
सुना हैं., लोग इश्क में जान दे देते है पर.. अगर जब तक जान है तब तक साथ दे..वो इश्क़ की सही पहचान देते है.
"क्या कशिश थी आप की आँखों में"
"आप को देखा और आप के हो गए"❤️
बड़ा एहसान हम फ़रमा रहे हैं
कि उन के ख़त उन्हें लौटा रहे हैं
किसी सूरत उन्हें नफ़रत हो हम से
हम अपने ऐब ख़ुद गिनवा रहे हैं
वो पागल मस्त है अपनी वफ़ा में
मिरी आँखों में आँसू आ रहे हैं
अजब कुछ रब्त है...
अपने दर्द खुदा को बता दिया करो, फिर दर्द जाने दवा जाने और खुदा जाने...
हम ही पत्थर के हो गये ये सोचके..
कि ज़िंदगी तो फूल बनेगी नहीं...!!
ख़्वाहिशों पर पाबंदी ख़्वाबों पे पहरा है ,
कौन समझेगा दर्द मेरा कितना गहरा है।।
तोहार पाँच किलो राशन मुँह पे फेंक देवे के..!साहेब आवे द इलेक्शन तोहके देख लेवे के..!
नहीं है प्यार उससे अब नहीं है
मगर वो शख़्स प्यारा आज भी है
सिर्फ छू कर बहक जाने को नही...
उतर कर रूह में,
महक जाने को प्यार कहते है...