त्याग वहीं करें जहां उसकी जरूरत हो,
दोपहर में दिया जलाने से अंधकार नहीं खुद का वजूद कम होता है !
मुझे किसी रंग की जरूरत नहींलोग मेरी बातों से ही लाल पीले हो
नींद भी क्या खूब होती है यदि आ जाये तो सब कुछ भुला देती है और ना आए तो हर कुछ याद दिला देती है !!!
दौलत, शोहरत और ताकत मिलने पर ,
इंसान बदलता नहीं है बल्कि बेनकाब होता है ...
जिंदगी के गणित मे इस तरह से पिछड़ा हूं,
2 लोगो से मिला हूं 200 लोगो से बिछड़ा हूं.
इक्का चाहे कितना भी उछलें..
हुकुमत तो बादशाह ही करता है..!!
सरल व्यक्ति के साथ किया गया छल ,
आपके बर्बादी के सारे द्वार खोल देता है ...
मेरे कानों का वो झुमकाहमारे इश्क़ की छन छन पेइतराता है
तेरे हाथों की छुअन सेजाने क्यूँ अब भीशर्माता है
भूले-बिसरे हुए ग़म फिर उभर आते हैं कईआईना देखें तो चेहरे नज़र आते हैं कई
~ फ़ुज़ैल जाफ़री
पिता का मौन यदि सुन सको तो,
दुनिया के ताने सुनने की नौबत नहीं आएगी।
प्रह्लाद पाठक
वो पुराना जमाना ही ठीक था,
प्रेम भी शादी के बाद होता था..🥀
ये बारिश ये ठंडी हवा रिमझिम और ये मौसम,अगर तुम दूर ना होती पगली तो मिल के चाय पीते!!
यादों से न पूछें तरबियत उनकीये वो आजाद परिंदे हैं जो पल में सागर पार कर लेते हैं
बाद तुम्हारे सब अपनो के मन माने बर्ताव रहे
मुश्काने क्या आंसू क्या सालाना त्यौहार हुए
जीवन एक ऐसा रंगमंच है,
जहां किरदार को खुद नहीं पता होता,
कि अगला दृश्य क्या होगा...
शब्द ही नहीं, खामोशी भी चुभती है।
अब कोई आए चला जाए मैं ख़ुश रहता हूँ
अब किसी शख़्स की आदत नहीं होती मुझ को
जहां पत्तियां नहीं झरती वहाँ बसंत नहीं आता
जिसे रास नहीं सच्चाई से पिरोई भौतिक लेखनी,
वही मेरे दिली जज्बातों को नजरंदाज करेगा,
और जो महसूस कर सकेगा दर्द मेरे लफ़्ज़ों का,
वो "मोहब्बत" से "नफरत" बेहिसाब करेगा..!!
विरक्ति
माना के मां की गोद बहुत लाजवाब है एहसान पिता का भी कोई कम तो नहीं है...