जिस प्रकार अग्नि स्वर्ण को परखती है,
उसी प्रकार संकट वीर पुरुषों को।
शीशे सी है फितरत हमारी,हम टूटने से पहले तक ही कमजोर है.
हर चेहरे पर नक़ाब है, ये दौड़ बहुत खराब है...!!
स्त्री और पुरुष एक दूसरे के पूरक हैं।
आपसी सहयोग के बिना दोनों का अस्तित्व असंभव है
बेवफा लोग बड़ रहे है धीरे धीरे
एक शहर अब इनका भी होना चाहिए..!!
मेरा मुझ में कुछ नहीं, जो कुछ है सो तेरा।
तेरा तुझकौं सौंपता, क्या लागै है मेरा॥
प्रेमपाप यदि हैइस धरा पर पवित्र फिर क्या होगाजल नहीं थल नहींवायु नहीं गगन नहीं अग्न नहीं
फिर बोलों तुमक्या शिव हृदय पत्थर होगानहीं नहींहोगा करुणा भरा ईश्वरतभी तोशुद्ध हृदय प्रतिबिम्ब उसका प्रेम होगा।
राजेश गौरी
कोई हुनर है तो एक दफा आज़मा लीजिये खुद को..
ये जिंदगी है , दुबारा सिर्फ कहानियों में मिलती है!!!
पसंद आईं कुछ भी चीज़ें,ज़्यादा देर तक ठहरती नहीं हैं…
एक गुमनाम सा किरदार,
हमारा भी हैं कहीं,
जज्बात तो बहुत हैं,
मगर हक एक भी नहीं,
करना तो बहुत कुछ हैं किसी एक की खातिर,
मगर मन इसी कश्मकश में हैं कि उनके जीवन में,
हमारा कोई अस्तित्व भी तो नहीं कही ..
दिल से दिल का फासला कुछ यूं हो जाए…
इधर मैं याद करू और उधर तुम्हे याद आए …
कर्ज़ उतर जाता है
एहसान नहीं उतरता।
एक ही चाहिए लेकिन परमानेंट चाहिए,
जिसे परेशान भी में करूं और प्यार भी करूं…!!
किस्तों में बिखरीं हँसी देखी है
हमनें ज़िंदा रह कर ख़ुदकुशी देखी है....!!
धर्म मनुष्य जीवन को बेहतर बनाने के लिए बना था,
और आज मनुष्य धर्म को बेहतर बनाने में लगा हैं...
ख़्वाहिश ये नहीं कि वो लौट आए मेरे पास,
तमन्ना ये है कि उसे जाने का मलाल हो...
अगर पुरखों ने खेत में हल चलाकर
"कलम" पकड़ने के लायक बनाया हैं,
तो कलम का फर्ज हैं कि
अब वह "हल" का कर्ज उतारे।
फर्क बहुत है तेरी मेरी समझ में,..तूने जज़्बातों से सीखा है और मैने हालातों से..!!
इबादत रब की और सूरत यार की हो,
सजदा रब का और रसम प्यार की हो,
आशिको के मजहब का क्या कहना,
जिक्र रब का और बात यार की हो...