ग़ुरूर में बन्दा खुद को
हर इक से जुदा समझता है
अधूरा आदमी ख़ुद को
ख़ुदा समझता है
अभी ख़मोश हूं तो
ताअल्लुक़ की ज़िंदगी के लिए
ख़बर नहीं वो मेरी चुप्पी को
क्या समझता है।
जिंदगी में आप जितनी बार प्रयास करेंगे..
उतनी ही बार आप कुछ नया प्राप्त करेगे..!!
व्यवहार का दौर गया,अब संबंध पैसे से बनते हैं।
एक समंदर
मेरे अंदर
मस्त कलंदर...
उछल रहा है
उछल उछल कर
निगल रहा है
वक्त को
वक्त की बेवजह
पाबंदीओं को…
अंदर के
समंदर से
कभी
वक्त
कहां बड़ा हो पाया ❓
मैंने मुझको
हमेशा
वक्त से
बड़ा पाया
इस लिए
अंदर के समंदर में
वक्त को
डूबता पाया।।
थोड़ी सी आवारगी भी जरूरी है जिंदगी में,
कैद में रहकर परिंदे अक्सर उड़ना भूल जाते है।
हम शामों के सताए हुए लड़के
शाम गुज़र जाने के बाद रोते हैं
इस दौर में इज्जत दौलत पर निर्भर करती है ,
जो जितना अमीर होगा उसकी उतनी इज्जत होगी ...
कहना राम जी से हालत नहीं ठीक है
हर परीक्षा का पेपर यहाँ लीक हैं
नींदें वापस कर दी हमने,,सुकून भरी रातों को।
किताबों के संग ' हर रात बितानी थी, आँखों को।।
सेजल
जीवन निर्णय नहीं निरंतर भय है।
जब तक सब अपने थे ज़िन्दगी साथ गुज़ारी है,
धीरे धीरे सब बदल गयें,अब हमारी बारी है।