गीत ग़ज़लों में शामिल गर हो ना सके, तो तुम्हारे दर्द में बसर हम ज़रूर करेंगे।
एक दिन जियूंगा अपने लिए भी ,
ये सोच कर पिता ने सारी उम्र गुज़ार दी ।।
मिल जाता है सुकून उनकी तस्वीर देख कर,कुछ शख़्स हमारी ज़िंदगी में ऐसे भी होते हैं..!!
हमें प्रेम करना चाहिए, न कि प्रेम में गिरना चाहिए,क्योंकि जो कुछ भी गिरता है, वो टूट जाता है.
ज़मीर जिन्दा रखिये,खैरात में मिले पंखों से फ़तेह नहीं होती... !!
हम इंसान हैं ,
मैं चाहता हूं कि इस वाक्य की सच्चाई बनी रहे..!!
मेरे शौक तो छोड़ो मेरी ज़िद भी छोड़ो
मन को इतने टुकड़ों में बांटा है उसने
अब तो ज़रूरत भी मुझे ज़रूरी नहीं लगती..!!
किसी में कमी दिखाई दे, उसको समझाइये..!
सभी में कमी दिखाई दे, खुद को समझाइये..!
देख कर परेशान हूं रिवाज दुनिया का
अब जूठ बोलकर भी लोग शर्मिंदा नहीं होते।
बेफिकर है हम जो आईना सा किरदार रखते हैंफिकर वो करें जो हजार चेहरे रखते हैं.!!
शुरुवात तो सभी अच्छी करते हैं,
मसला तो सारा आखिर तक,
अच्छे बने रहने का हैं..!!
तूने जो ना कहा मैं वो सुनती रही ख़ामख़ाह, बेवजह ख़्वाब बुनती रही जाने किसकी हमें लग गई है नज़र इस शहर में ना अपना ठिकाना रहा दूर चाहत से मैं अपनी चलती रही ख़ामख़ाह, बेवजह ख़्वाब बुनती रही ....
इतिहास लिखने के लिए कलम नही हौसलो की जरूरत होती हैं..!!
जान अगर लेनी है तो अच्छे से लो ये गाल पर डिंपल का क्या मतलब है...
लत तो मुझे तुम्हारी लगी है..,, वरना ये, शायरी करना मुझे कहा आता है, और इल्ज़ाम बेचारे फ़ोन पर आता है..
ना आज मिले , न कल मिलें...
शिव शम्भू तो हर लम्हें हर पल पल में मिलें..!!
वो शहर की पढ़ाकू लड़की , मैं गांव का आवारा ,उसे किताबों से मोहब्बत हैं , मुझे उससे ,वो देख कर देखती नहीं , मैं देख कर संभालता नहीं ,वो नजरें मोड़ लेती हैं , मैं दुनिया छोड़ देता हूं
मुझ से झूठ की कोई उम्मीद न करे,
मैं आईना हूं सुबह का अखबार नहीं।
तुम जरा कस के थाम लो "हाथ" मेरा,
'लकीरों' को अच्छा लगेगा "लकीरों" से मिलना..!!
मत पूछ मेरी बेबसी का सबब क्या है,
पहले पिघलाया फिर पत्थर किया था..!!