बरसी हैं घटाएं आज फिर अंगड़ाइयां लेकर ,
नया सावन तो आया है मगर तन्हाईयां लेकर ..!!
हर उम्र में अलग अलगखिलौने का शौक़ होता है...
जो खुद संभल कर चल नहीं सकते
ठोकर लगते ही
वो इल्जाम देते हैं पत्थर को
पहले परखते हैं किरदार फिर ऐतबार करते हैं,
हम उनमें से हैं जो सिर्फ सीरत से प्यार करते हैं..!!
मैं किसी शख़्स से बेज़ार नहीं हो सकता
एक ज़र्रा भी तो बेकार नहीं हो सकता ।
वो ख़्वाब रात काचाय साँझ कीबारिश की बूंदें रूमानीवही समां पुरानाधड़कनों से बतियानाबदला नहीं है कुछ भीवही मिज़ाज़ आशिकानाचलो निभाते हैं हम तुमवही पुराना याराना लेकर चुस्कियाँ चाय कीकरेंगे गुफ्तगू शायराना
लोग जिस हाल में मरने की दुआ करते हैं,
मैं ने उस हाल में जीने की क़सम खाई है!!
अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएं कैसे
तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे।
दुनिया की कोई परेशानी,आपके साहस से बड़ी नही हैं…
ता उम्र के लिएं हाथ थामना होता है,ए पल दो पल का खेल नहीं होता...
हर तुफान से टकराएं वो आंधी बनाऊंगा, नए अंग्रेज आएं हैं, नया गांधी बनाऊंगा
हम ज़ाहिल लोग हैं,
आज भी हमें झुमके और
काली बिन्दी
ही पसंद आती है ।
अज्ञात
हिम्मत इतनी रखो..
की किस्मत छोटी लगने लगे..!!
तारो को गिनने की चाहत में चाँद खो देते है लोग,
बेटे पाने की चाहत में बेटियों को खो देते है लोग !
संस्कारों में बस इतने बने रहना,कि कोई परवरिश तक ना पहुंचे…
हालात इंसान को वो बना देते हैं,
जो वो कभी था ही नहीं....
दुआ करना दम भी उसी तरह निकले…जिस तरह तेरे दिल से हम निकले…!!