इरादे अगर मजबूत हो तो नियति खुद ब खुद रास्ता बना देती हैं
चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी हैमैंने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है
किस्तों में बिखरीं हँसी देखी है
हमनें ज़िंदा रह कर ख़ुदकुशी देखी है....!!
मेरी कमियों को गिनाया न करो
ये गिनाने से बढ़ भी सकती हैं
मालविका हरिओम
मैं उठता हूं कभी कलम रखता हूंइस तरह इश्क के जज्बातों पर सर रखता होगा खेल कोई इश्क तुम्हारे लिए यारोंमैं तो मरे जिस्मों में मोहब्बत की रूह रखता हूं
एक घुटन सी हो रही थी मुझे संपूर्ण रात्रि ,घबराहट सी हो रही थी अपने ही अंधेरे कमरे में....भोर की सुनहरी रौशनी आई एक हल्की दस्तक लिए ,उदासी तमाम मेरे कमरे के दरवाज़े से फ़ौरन ही विदा हो कर नई...
बाढ़, भूकंप, दंगे, चुनावफ़ौजी सिर्फ़ सरहदों पर नहीं लड़ता
तेरे जानें से ज्यादा फ़र्क नहीं पड़ा
जहा दिल होता था अब वहा दर्द होता हैं.
घमंड किस बात का है, जनाब ऊपर से लेमिनेशन हटा दो तो, अंदर से सब इतने ही खूबसूरत है..!!
तुम बनारस हो और तुम्मारी यादे अस्सी
घाट और मैं उन घाटों का मुशाफिर.!!
❤️🩹
विश्वास और अहंकार एक साथ नहीं रह सकते, जैसे जल और तेल एक साथ नहीं मिल सकते !!
तमाम इश्क के शहर मालिक अब आग में जलते हैंमज़हब के पैरों से लोग आशिकों के सर कुचलते है
एक समंदर
मेरे अंदर
मस्त कलंदर...
उछल रहा है
उछल उछल कर
निगल रहा है
वक्त को
वक्त की बेवजह
पाबंदीओं को…
अंदर के
समंदर से
कभी
वक्त
कहां बड़ा हो पाया ❓
मैंने मुझको
हमेशा
वक्त से
बड़ा पाया
इस लिए
अंदर के समंदर में
वक्त को
डूबता पाया।।
सिर्फ एक गलती की देर है,लोग भूल जाएंगे आप पहले कितने अच्छे थे।
मतलब की दुनिया है लोग आपसे नहीं
आपकी स्थिती से हाथ मिलाते हैं !!
बाद तुम्हारे सब अपनो के मन माने बर्ताव रहे
मुश्काने क्या आंसू क्या सालाना त्यौहार हुए
मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊँमाँ से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ
जिसके पास विकल्प हो, वो आपका कभी नहीं हो सकता...
मुझे क्या आई फ्लू होगा ,
मैं पहले ही उसके प्यार में अंधा हु..
हमारा खुद का एक रुतबा है,
आप कोई भी हो फर्क नहीं पड़ता