“मनुष्य दूसरों की दृष्टि में कभी पूर्ण नहीं हो सकता,
पर उसे अपनी आँखों से तो नहीं ही गिरना चाहिए.! ”
जयशंकर प्रसाद
प्रेम में रस्म होती है रूठने की ,
तुम्हें क्यों लगा हमारा झगड़ा हुआ है ।।
अब जो है, कुछ भी नहीं है हमारातेरा ख़्वाब आख़िरी था इन आँखों में_!!
कुछ दिली हसरतें कहें या ना कहें,या अनकहा सा कह दें,
उनसे उन्हीं का जिक्र करें या फ़िर हवाओं से कह दें,
रोज़ रोज़ ये मुलाक़ात इत्तफाक तो नहीं
मेरी तरह हुजूर धड़कने बेईमान तो नहीं
संघर्ष भी उन्हीं को चुनता है,
जिनमें लड़ने की क्षमता होती हैं।
एक शिक्षक को चाहिए कि वह महान बनने से बचे,
जितना हो सके उसे सहज बने रहना चाहिए ।
तबाह होकर भी तबाही दिखती नहीं...
ये इश्क है हुजूर..इसकी दवाई बिकती नही..!!
खुद मे झाकने के लिए ज़िगरा चाहिए,,,दुसरो की शीनाखत् मे हर शख्स माहिर है,,,
हाल मत पूछो जिंदगी का हमसे ,हालात इस कदर गुमनाम है ,की उम्र जीने की है औरमौत आस पास खड़ी है…!!
कुछ ग़लत पते,
हमें आजीवन के यात्री बना देते है।
किसी का साथ देना सीखो,धोखा तो आजकल पुरा जमाना दे रहा हैं…
ये कलयुग है साहब यहाँ क़सम खाने वाले नहीं,दारू पीने वाले सच बोलते है !!
तुमसे प्रेम करने के बाद महसूस हुआ है कि तुमसे बात करने से अक्सर मैं अपनी सारी परेशानियां,मुश्किलें भूल जाया करती हूं,जैसे एक सुकून का अनुभव होता है,जब तुम पास होते हो तो ऐसा लगता है जैसे ईश्वर से की...
स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन और विश्वास सबसे अच्छा संबंध।
~ गौतम बुद्ध
तुमसे मेरा प्रेम कुछ ऐसा रहेगा,दुनिया उदाहरण दे हमारा, वैसा रहेगा.
भूख से डगमगा रहें हैं पांव
और बाज़ार से गुजरना है.....!!
उम्मीद ना छोड़ो ए ज़िंदगी ,
कल का दिन आज से बेहतर होगा ..!!
जिस शहर से कुंवारों को, मयस्सर न हो दुल्हन...
लाज़िम है कि उस शहर के मैरिज हाल गिरा दो.!