"समर शेष है, जनगंगा को खुल कर लहराने दो
शिखरों को डूबने और मुकुटों को बह जाने दो
पथरीली ऊँची जमीन है? तो उसको तोड़ेंगे
समतल पीटे बिना समर की भूमि नहीं छोड़ेंगे
समर शेष है, चलो ज्योतियों के बरसाते तीर
खण्ड-खण्ड हो गिरे विषमता...
बोलना सीखिएवरना ज़िंदगी भर सुनना पड़ेगा।
मैं जानता हूं कहाँ तक उड़ान है उनकी,
ये मेरे हाथ से निकले हुए परिंदे है..
हम भूख के पले बच्चे हैं
एक दिन आएगा हम सबकुछ खाएंगे
अब जब घर से निकले है
तो इतिहास लिखकर ही जाएंगे।
ज़ाकिर खान
कितना बचा के रखते हैं हम समाज में अपनी छवि को,
जबकि बचाना हमें हमारे विचारों और कर्मों को चाहिए
अर्चना अनिरुद्ध
लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने मेंतुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में
संस्कार ही ऐसे मिले है जनाब दिल से उतरे लोंगो से भी तमीज़ से बात करते है...
जिन्हें तकदीर रुलाना चाहे ,उन्हें बेक़दरों से इश्क़ हो जाता है.
किसी का माथा चूमना ही तो प्रेम है
होंठ चुमना तो शारीरिक संबंध हो जाता है
"तुम!! जानते हो मेरे इस जीवन में सबसे अधिक किसकी जरूरत है-?"पहली लाईन के पहले ही शब्द की.
हमारा चरित्र कितना ही दृढ़ हो, पर उस पर संगति का असर अवश्य होता है।"
प्रेमचन्द
सिर्फ़ जीना मायने नहीं रखता,
सही तरीके से जीना मायने रखता है।
थक जाता है इंसान "ख्वाहिशें" पूरी होने से पहले,कभी परिस्थितियां मार जाती हैं तो कभी ज़िम्मेदारियां..!!
किसी को अधूरा पाने से बेहतर है,उसे मुकम्मल खो दिया जाए
बचपन कि छोटी खुशियां थी, मस्ती, हंसी ठिठौली थी, मिलता अब वो आह्लाद नहीं जो देती आंख मिचौली थी..!!
राम जी की ज्योति से नूर मिला है,सबके दिलो को सुरूर मिला है,जो भी गया राम जी के द्वार,कुछ न कुछ जरूर मिला हैशुभ राम नवमी
हम नफरत भी हैसियत देखकर करते है,प्यार तो दूर की बात है !!!
शतरंज हो या जिंदगी,
जितने के लिए धैर्य रखना पड़ता है...
सफलता का अर्थ है बहुत धैर्यवान होना
लेकिन समय आने पर आक्रामक होना।
जिन्हें हालात से आता है टकराना, उनको मुसीबत भी खुशी की तरह लगती है…