हाल मत पूछो जिंदगी का हमसे ,हालात इस कदर गुमनाम है ,की उम्र जीने की है औरमौत आस पास खड़ी है…!!
बुरा वक़्त भी गुज़र ही जाता हैबस रब को हमारा सबर आजमाना होता है!
वक्त निकल जाने के बाद जो कद्र होती है,
वो कद्र नहीं अफसोस होता है...
हर वक्त का हंसना तुझे बर्बाद न कर दे,
तन्हाई के लम्हों में कभी रो भी लिया कर
पुरानी शाख से पूछो कि जीना कितना मुश्किल है..,
नए पत्ते तो बस अपनी अदाकारी में रहते हैं...!!!
दुनिया का एक सच ये भी है जिसे तुम जितना अपना समझोगे वो तुम्हे उतना बेगाना समझेगा..!!
हर सिक्के का दो पहलू होता है,सोच समझ कर जुबान का इस्तेमाल करे...
हवा ने किया ऐसे स्पर्श तनजैसे छू कर मन मीत गयाकुछ भरा हृदय प्रेम मगरदृग जल से कुछ रीत गया।
इबादत रब की और सूरत यार की हो,
सजदा रब का और रसम प्यार की हो,
आशिको के मजहब का क्या कहना,
जिक्र रब का और बात यार की हो...
बुद्धि और परिश्रम के शिवाय
दुनियाँ में कोई चमत्कार नही है तरक़्क़ी और सुख- शांति का ?
तपिश भूख की जानवरों कि भी इंसानों जितनी है,
देखना ये है पेट भरने लायक तुममें इंसानियत कितनी है..!!
विरक्ति
आँखों से जो बह रहा कहो न इसको नीरपलकों से ही छलक गयी हृदय कलश की पीर …!!
जब प्रतिष्ठा बढ़ेगी तो निंदा का टैक्स तो चुकाना ही पड़ेगा...
निंदा से ना घबराएँ ये तो प्रगति की निशानी है...
मैं ऐसे धर्म को मानता हूं,
जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाए।
डॉ. भीमराव आंबेडकर
ये आईने कभी आँखों को पढ़ नहीं पाते
ये लबों की हँसी से आगे बढ़ नहीं पाते
है जिनके दम से ज़माने में रंग और ख़ुश्बू
वो फूल अपने ही काँटों से लड़ नहीं पाते
मालविका हरिओम
इलज़ाम आखिर हमारे सर ही आया ,
हम चुप रहकर भी बदनाम हो गए ..!!
वो जो ऊपर बैठा है ना.. जिसे हम सब परमेश्वर कहते है..वो कुछ भी कर सकता है..सिर्फ सब्र और विश्वास रखें
बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी...
हमें प्रेम करना चाहिए, न कि प्रेम में गिरना चाहिए,क्योंकि जो कुछ भी गिरता है, वो टूट जाता है.
"समर शेष है, जनगंगा को खुल कर लहराने दो
शिखरों को डूबने और मुकुटों को बह जाने दो
पथरीली ऊँची जमीन है? तो उसको तोड़ेंगे
समतल पीटे बिना समर की भूमि नहीं छोड़ेंगे
समर शेष है, चलो ज्योतियों के बरसाते तीर
खण्ड-खण्ड हो गिरे विषमता...