जूते रगड़ कर बनाई गई पहचान और,जूते चाट कर बनाई गई पहचान में बहुत फर्क होता हैं।
भीगे रहे तेरे ख़्यालों में हम
बारिश तो थम गई
मगर कम्बख़्त ये ख़याल है कि बरसते रहे
हंसता रहता हूं मैं हरदम तो, सबको लगता है सुलझा हूं,लेकिन समस्याओं कि भूल-भुलैया में, मैं खुद से खुद में उलझा हूं..!!
स्वभाभिमान से जीने की आदत डालिए और
कुछ फ़ालतू लोगों को सूची से ब्लॉक कर दीजिए..!!
स्त्रियां कायनात गढ़ती रही है….फिर भीअस्तित्व के लिए लड़ती रहीं हैं….!!!
रथ रावण के पास था
संसाधन रावण के पास थे
सेना रावण के पास थी
सोना रावण के पास था
भगवान राम के पास सत्य था
आशा थी. आस्था थी. प्रेम था.
परोपकार था. विनय था. धीरज था. साहस था.
सदैव नहीं रहती...
सोचती हूं, खुद से इश्क करूं मैं अबऔर खुद में ही मुकम्मल हो जाऊं
इधर- उधर झांकने के बजाय,खुद के मायने समझ जाऊं मैं अब
“कितनी सुंदर बात है की……“तुम्हारी प्रतिक्षा में बिता समय……“कभी व्यर्थ सा नहीं लगा…!!
हिम्मत इतनी रखो..
की किस्मत छोटी लगने लगे..!!
फिर से उलझाता है सबको नफ़रत वाली बात में दूसरे राउंड में ही लुच्चा आ गया औक़ात में
दुनियां एक खतरनाक जगह है,
बुराई करने वालों से नहीं बल्कि उन लोगों की वजह से
जो देखते हैं और कुछ नहीं करते!!
सरल व्यक्ति के साथ किया गया छल ,
आपके बर्बादी के सारे द्वार खोल देता है ...
आदमी दुख में काम आना चाहिए,
ख़ुशी में तों हिजड़े भी नाचने आ जाते हैं...
सरफिरे लोग हमें दुश्मन-ए-जां कहते हैं,
हम जो अपने मुल्क की मिट्टी को भी #माँ कहते हैं...
जलाकर हसरत की राह पर चिराग़ आरजू के , . . हम तन्हा रातों में तेरे मिलने का इंतज़ार करते हैं...!!
बुराई पर अच्छाई की
असत्य पर सत्य की
अधर्म पर धर्म की
नफ़रत पर मोहब्बत की
जीत सदैव सुनिश्चित है
तुम बदल गए,हम संभल गए बात खत्म…
भागते हुए छोड़कर अपना घर
पुआल, मिट्टी और खपरे
पूछते हैं अक्सर
ओ शहर!
क्या तुम कभी उजड़ते हो
किसी विकास के नाम पर?
औरत बेवा हो जाती है
तो उसकी चूड़ियाँ तोड़ देते हैं
मर्द की घड़ी या ऐनक या हुक्का तोड़ने का
कभी किसी को ख़्याल न आया।
शिक्षा भले किताबों से मिले लेकिन ,
सबक हमेशा लोगों से ही मिलता है ..!!