मां हमारी पहली गुरू जो दुनिया का सारा तजुर्बा दिया है
इसलिए मां का स्थान ईश्वर से भी ऊंचा माना जाता है...
रेल की तरह गुजर तो कोई भी सकता है...
इंतजार में पटरी की तरह पड़े रहना ही असली इश्क है..!!
जाने क्या बिगाड़ा है इस बनाने वाले नेहम बनते बनाते अनजान बन जाते हैं !!
आ देख मेरी आँखों के ये भीगे हुए मौसम,ये किसने कह दिया कि तुझे भूल गए हैं हम.
बात नहीं हुई सुबह, सुबह नहीं हुई सुबह से सीधा दोपहर हो गई….
बर्फ़ से रिश्तों का मौसम गुनगुना हो जाएगा
मिल के आपस में रहें तो ख़ुशनुमा हो जाएगा
बीच की दीवार पहले तुम गिराओ तो सही
देखना आँगन वही फिर दो-गुना हो जाएगा
राघवेंद्र द्विवेदी
अंत का भी अंत होता है
कुछ भी कहां अनंत होता है
पतझड भी एक घटना है
बारह महीने कहां बसंत होता है
हम तो पहले से बिगड़े हुए हैं,हमारा कोई क्या बिगाड़ लेगा !
कबीर और प्रीति वाला प्यार नही हमें तो ,तुमसे राधा कृष्ण वाला प्यार हुआ है…!!
प्रेम.....
रोग नहीं औषधि है..!!
मत करो हमसे यूँ ग़ैरों जैसा सलूक
ख़बर हम भी रखते हैं लावारिस हैं हम
मैंने कब चाहा कोई मेरे साथ चले,
"कहा ज़रूर
खामोशी को चुना है मैंने
क्योंकि बहुत कुछ सुना है मैंने...!!!
"खंजर" भी हैरान था मेरे जख्म देख के बोल पड़ाक्या "इश्क" में मुझसे भी ज्यादा "धार" होती है
आइने से डर जाएंगे लोग यहां...
कभी किरदार नज़र आया जो चेहरे की जगह..!
खामोश रहना हमें वहीं सिखाते है
जिनसे हम बात करना चाहते हैं ..!!
अगर भाई से कुछ बांटना चाहते हो तो,विपत्तियां बांटो, संपत्ति तो सब बांटते हैं..!!
उम्मीदें इंसान से लगा कर शिकायत ऊपरवाले से करते हो!
थोड़ी आँच बची रहने दो, थोड़ा धुआँ निकलने दो
कल देखोगी कई मुसाफ़िर इसी बहाने आएँगे
उनको क्या मालूम विरूपित इस सिकता पर क्या बीती
वे आये तो यहाँ शंख-सीपियाँ उठाने आएँगे
रह—रह आँखों में चुभती है पथ की निर्जन दोपहरी
आगे और बढ़ें तो...
बहुत अच्छे होकर भी आप हर किसी के लिए अच्छे नहीं हो सकते कहीं बुरे बना दिए जाते हैं तो कहीं बुरे साबित कर दिए जाते हैं !!!