तुम्हें गुरुर है तुम्हारा वक्त बोल रहा है!
हमें यकीन है हमारा सब्र बोलेगा!!
ज़मीर जिन्दा रखिये,खैरात में मिले पंखों से फ़तेह नहीं होती... !!
बाढ़, भूकंप, दंगे, चुनावफ़ौजी सिर्फ़ सरहदों पर नहीं लड़ता
हुक़ूमत से सिफारिश की तमन्ना हम नही ऱखते..!!!हमे मालूम है हमारी हिफाज़त कौन करता है??
तेरी मुस्कुराहट जरूरी हैं माँ, कीमत चाहे जो भी हो।
वहाँ कोई महानता नहीं है जहाँ सादगी,
अच्छाई और सच्चाई नहीं है।
मेरे किरदार पर ऊँगली मत उठा...
मै अपना पहचान बता दूँगा तो...
तुम मुझसे जान-पहचान बढ़ाने लगोगे...
जमीन पर कही तो कोई ऐसी जगह होगी जहा हम मिलेगे.
आइने से डर जाएंगे लोग यहां...
कभी किरदार नज़र आया जो चेहरे की जगह..!
रो भी नहीं सकते खुलकर, ये मर्द होना भी क्या मुसीबत है....
अभी भरा नहीं था गम पति के जाने का,
उससे पहले रिश्तेदारों ने बेघर कर दिया,
भरे नहीं थे घाव एक मां कि चूड़ी टूटने के,
बच्चा बड़ा होने से पहले उन्हें लावारिस कर दिया..!!
वक्त तराजू है जनाब •••
वो जो बुरे वक्त में आपनो का वजन बता देता है ....!!
तबियत की बात है जनाब , वर्ना जबाब ऐसे दूं कि सवाल ही पैदा ना हो ।।
राजनीति में, साहित्य में, कला में, धर्म में, शिक्षा में। अंधे बैठे हैं और आँखवाले उन्हें ढो रहे हैं।
पहाड़ तोड़ने का साहस तो हर इंसान में है, पर वो डरता है "कामयाबी" के पहले पागल घोषित किए जाने से।
दिल करता है करेले की सब्जी खिला दूंउन लोगों को जो मुंह में मिठास और दिल में जहर लिए घूमते हैं
प्रेम में रस्म होती है रूठने की ,
तुम्हें क्यों लगा हमारा झगड़ा हुआ है ।।
बहुत जानी हुई शक्ल भी ,
कभी कभी पहचानी नहीं जाती है ...
ज़िन्दगी के "पन्नों" में मेरा किरदार भी "जोकर" का रहा,
मैं "हंसा" तो भी लोग हंसे मैं "रोया" तब भी लोग हंसें..!!
उनसे कहो कि वो चाय के वक्त पर हमें बुला ले लेना.
हमें ऐ रोज़-रोज़ का अच्छा नहीं लगता चाय बनाना...
मालती