बेशक फलक तक साथ चलने कि दुआ कीजिए मगर
जो ज़िदा हैं ज़मीं पर पहले उनसे वफ़ा कीजिए
कहते हैं जीते हैं उम्मीद पे लोग,हमको तो जीने की भी उम्मीद नहीं !
हिचकियाँ आती थी उसे ,
मेरे याद करने से ,
शायद अब हिचकियाँ भी ,
बेवफ़ा हो गई हैं ...!!
भरोसा टूटा है वहम की सफाई मत दो
कहीं और जाकर मुंह मारो हमें सफाई मत दो
तू न थकेगा कभी, तू न रुकेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी, कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ। यह महान दृश्य है, चल रहा मनुष्य है, अश्रु श्वेत रक्त से, लथपथ लथपथ लथपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।
बेचैनियों के दौर में....सकूं की दवा हो तुम....!!
खयालो मे रहता है वो, जो पास नही होता…बैचेन हैं उनके लिए जिनको एहसास नहीं होता..
जो डरा ही नहीं मुझे खोने से
वो क्या अफसोस करेगा??
मेरे ना होने से...
पहले मुग़ल दरबार में नाचते थे,अब मस्जिद के बाहर नाचते हैं,जगह और समय बदला है,मानसिकता व हरकत अभी भी वही है!
रिश्ते नातों के बिना ये जिंदगी वैसी हैजैसे लकवे से ग्रसित शरीर सुन्न पड़ी है॥
अच्छे लोग बहुत सस्ते होते हैं,बस थोड़ा सा मीठा बोलो और खरीद लो….
दिल पर लगी बातें अक्सरआवाज़ छीन लेती हैं !
प्रेम और आदर का सानी देना पड़ता है
रिश्तों को भी थोड़ा पानी देना पड़ता है।
मोहब्बत में कैद हुई अपनी खुशियां तराशता रहा,
चाभी रख कर कांधे पे मैं तिजोरी तलाशता रहा..!!
विरक्ति
सुरमे की तरह पीसा है हमें हालातों ने,
तब जा के चढ़े है लोगों की निगाहों में..!!
मेले में भटके होते तो कोई घर पहुँचा जाता
हम घर में भटके हैं कैसे ठौर-ठिकाने आएँगे
किसी की बुराई करने से पहले अपनी अपेक्षाएं तय कर लो !
व्यापार या व्यवहार उन लोगों से रखो
जिनकी जान से ज्यादा जुबान कीमती हो..
समय कई जख्म देता है इसलिये...घडी में फूल नहीं काटे होत है...!
जैसा दिल बनाया है, काश वैसा ही नसीब भी बना देता मालिक।।