ख़्वाहिशे ही तो हैं
मन के भीतर
कितनी मासूमियत से पनपती हैं
उचक उचक कर
शिशु की भाँति लगाती हैं पुकार
पूर्णता को पाने के लिये पैर पटकती हैं
चाहत होती है के सब पा लें
सहज़ ही
मगर कहाँ इतना सहज़ है
इनकी ही तरह सहज़...
“हम मिलेंगे कब ?
उसने पूछा
एक साल और एक जंग के बाद,
मैंने बताया
जंग कब ख़त्म होगी ?
उसने पूछा
शहर की मोहब्बत ही ठीक है
गांव मैं पकड़े गए तो बहोत मारते है..
गए थे बड़े यकीन से की रोएंगे नही हम !जानेवाले काश तूने एक बार पलट कर देखा होता !
उम्मीदों का दीया गर न होता
बुझ जातीं जाने ज़िंदगियाँ कितनी
ये दबदबा, ये हुकूमत, ये नशा, ये दौलतें,
सब किरायेदार हैं, घर बदलते रहते हैं...!!
तरस आता है अपने बाप पर, उसे औलाद मुझ जैसी मिली.
मेरे होते हुए मेरे रूम का कोई भी,मच्छर रात को भूखा नहीं सो सकता है !
अगर आप पर कोई मरता है,
तो कोशिश करें वो जिंदा रहे....
किसी को मनाने से पहले ये ज़रूर जान लेना,कि वो तुमसे नाराज़ है या परेशान ।
अपना ज़मीर जिंदा रखो,
ये पार्टीया तो आती जाती रहेंगी…
मां बाप की अहमियत उन औलाद से पूछो ,
जो मिलने के लिए कब्रिस्तान जाया करते हैं।।
सिर्फ़ जीना मायने नहीं रखता,
सही तरीके से जीना मायने रखता है।
प्यादो से बस्ती जलवाकर राजा मातम मनाते हैं,राजनीतिक लोग इसी चक्रव्यूह में शासन चलाते हैं।
तुम्हारे दिल में भी तूफ़ाँ उठा है
हमें भी प्यार तुमसे हो चला है
किसी अय्यार जैसे हो गए हो
तुम्हारा नाम मुझको रट गया है
तुम्हारी बात भी अब टालने में
मुझे अब ख़ुद से लड़ना पड़ रहा है
अजब सी कश्मकश है ज़िन्दगी में
कि...
वफ़ा की उम्मीद एक बेवफ़ा से लगाई है, मैने अपनी अर्थी अपने ही हाथों से सजाई है
हो अगर प्रेम की बात ...
अधरों पर आए राधे-कृष्ण तेरा नाम ✨
पता नहीं था चाहत ऐसी भी हो जाएगी
तुम मिलोगे और आदत तुम्हारी हो जाएगी...
अश्लीलता क्या हैं,नजरिया या कपड़े.?
छीन लेते हैं रंगत चेहरे की,
बेटियों को जो बोझ समझते हैं,पहले छीन लेते हैं खुशियां उनकी,
फिर हंसने को कहते हैं..!!