यूँ तो न हुईं मेरी राहें रौशन, मैंने बाप को जलते हुए देखा है -- अम्बष्ठ
देश चलता नहीं,मचलता है,मुद्दा हल नहीं होता सिर्फ उछलता है,जंग मैदान पर नहीं,मीडिया पर जारी है,आज तेरी तो कल मेरी बारी है।
तू कर इल्तेजा या फिर मेरे पांव पड़ के देख
अब न मिलूंगा चाहे तो तू सोने का बन के देख !!
इस ज़माने में मोहब्बत दिमाग का धंधा है,जो करते हैं दिल से कारोबार उन्हीं का मंदा हैं..!!
रात तो सब की एक ही है ,
बस अंधेरा हर किसी का अपना अपना है ..!!
कुछ लोग हमारी जिन्दगी में सिर्फ,
भरोसा तोड़ने के लिए आते हैं....
आकर वतन से दूर तरक्की की छाव मेंपरदेश हम ने बाँध लिए अपने पाँव मेंरह कर अज़ीम शहरो में परवेज़ आज भीदिल का कयाम है उसी छोटे से गाँव में
सिलवटें उतर गई थी चेहरे कि, खुशियों के इंतज़ार में,
मगर मुफलिसी अपनी ऐंठ में, दस्तक लगाए बैठी रही..!!
मन का अर्जुन कह रहा हैं कि खुल के जी लूं
कृष्ण ने कहा वत्स सब मोह माया है...
हिसाब भरी ज़िन्दगी को बेहिसाब जिया जाए ,
महीना सावन का आ गया है महादेव से इश्क किया जाए ..!!
पुस्तकालय एक ऐसा वृक्ष है, जहाँ विचारों के फल हर मौसम में लगते हैं ।
इंतज़ार उसके करते थक गई मेरी अंखियां ,
ये दिल तू ही बता इस चांद का क्या करूं मैं...
मोहब्बत सिर्फ धोखा है ये तब समझ आया था,
जब एकांतवास ने मुझे अपना कैदी बनाया था..!!
मरना है इक रोज सभी को ही बस ख्वाहिश इतनी है उस पल हाथों में हाथ बस तेरा होरहे तू सामने मेरे और मेरी आंखों को दीदार सिर्फ तेरा हो.... जा सकूं मैं इस दुनिया से चैन से इस तरह...
कुछ लोग आपसे सिर्फ उतना ही प्यार करेंगे,
जितना वो आपको इस्तेमाल कर सकते हैं,
जहां लाभ मिलना बंद हो जाता है,
वहां उनकी वफादारी खत्म हो जाती है
विरह की वेदनाओं को मुस्कान तले दबाने वाले पुरुषसमाज में जिम्मेदार और प्रेम में बेहद लाचार होते हैं !
तुम्हारा इंतज़ार बिल्कुल वैसे ही करतीं हूँ, जैसे बचपन में करती थी पापा के दफ़्तर से लौट आने का ..!
कभी कभी लगता है जिनको मोहब्बत में ज्यादा तमन्ना नहीं होती है न.. उनके ही ज्यादा गहरे ज़ख्म होते हैं
जंजीर बढ़ा कर साध मुझे,
हाँ, हाँ दुर्योधन! बांध मुझे।
रामधारी सिंह दिनकर
खुद को इतना भी कमजोर ना समझो कि
किसी ऐरे गेरे के एहसान की जरूरत हो..!!