सौभाग्य न सब दिन सोता है,
देखें, आगे क्या होता है?
रामधारी सिंह दिनकर
बहाने बना कर तुम अपना वर्तमान तो सरल कर लोगे लेकिन भविष्य कठिन बना लोगे !
बस साथ निभाने की जो कसमें दिलाई गई थीउसका बोझ है पर प्रेम नहीं हैअब यदि वो प्रेम की बात भी कर रहे हैतो वो इसलिए कि मजबूरी हैकि पति पत्नी हैगहराई में जाकर देखा जायतो वो सामाजिक बंधन ही...
दो नावों पर सवार था‚
उसकी ज़िन्दगी का सफ़र;
मैंने ख़ुद की ...
एक लात पड़ी थी तो पूरा देश सर पर उठा लिया
गर्दन कट गई तो सन्नाटा है...!
इस सन्नाटे को में क्या नाम दू....?
पुराना विवाद
आपसी रंजिश
पैसे की लेती देती
या फिर....
भाई चारा....
या फिर....
दलाली....???
क्या कहें किस कदर किसे खोने से डरते हैं,
यही बात है,के अब किसी के होने से डरते हैं...!!
वो नहीं रुकीमैंने आंसू भी दांव पर लगा के देखे…!!
किसी से भी उलझने का अब मन नही करता ,
आप सही , मैं ग़लत , बात ख़त्म …
मैं छिपाना जानता तोजग मुझे साधु समझताशत्रु मेरा बन गया हैछल रहित व्यवहार मेरा।।
हरिवंशराय बच्चन
ना दुआ से बढकर कोई अल्फाज़ है. ना मुस्कुराहट से बेहतर कोई इलाज है.
ग़मज़दा हैं वो तो बेशक गुफ़्तगू भी न करें ..पर करम इतना तो हो कि सामने बैठा करें … !!
जिनको हर मोड़ पे कोई मिल जाएउनको पुराने रास्ते क्या ही याद रहेंगे!!
मांँ की आंखों में देखा तो एहसास हुआ , खुदा उसे मुझ से बेहतर औलाद देता।
मैं शून्य ही सही तुम्हारी जिंदगी में,पर,मेरी कोशिश रहेगी कि तुम्हारे पीछे खड़े रहकर तुम्हारी कीमत बढ़ा सकूं।
किसी के लिए इतना भी मत गिर जाना कीजिसके लिए गिरे हो वहीं उठाने से इंकार कर दे।
आजादी का सबसे बड़ा दुश्मन,
संतुष्ट गुलाम है।
मुझे तोड़कर उसने साबित कियागुरुर दौलत का हो या मोहब्बत का तोड़ा जा सकता है!
मैं हूँ गिरा हुआ सबको बताया उसने,यूँ ही सही…महीनों बाद लबों पे नाम तो आया।
दर्द ही सही मेरे इश्क का इनाम तो आया,खाली ही सही हाथों में इनाम तो आया !!
कोई ऐसी कला, कोई विधा, कोई शब्द, कोई गुण कोई आचरण बना ही नही जिससे कोई भी अनमना न हो, जिससे किसी को भी शिकायत न हो.
जरूरत जिन्हें दिमाग की हो,
उन्हें दिल कभी मत देना.....