सुना है तारीफ के पुल के नीचे…मतलब की नदी बहती है…..!!
मुझसे मेरे मिजाज़ का आलम न पूछिये ,
क़ातिल को ख़ुद दिया है हमने कलेजा निकाल के ..!!
ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं,
मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बे-ख़बर नहीं.
आलोक श्रीवास्तव
तकलीफ अकेलेपन से नहीं,अंदर के शोर से होती है..
मैं राम बनूंगा तुम मेरी मर्यादा बनना..मैं कृष्ण बनूंगा तुम मेरी राधा बनना..
वर्तमान में
स्त्री का एक हिस्सा ,
उसके बहोत से हिस्सो पर
भारी पड़ रहा है ।
हम दरिया है, हमे अपना हुनर मालूम है..
जिधर भी चलेंगे ,
रास्ता अपने आप बनता रहेगा....!!
मुद्दतों बाद उठाए थे पुराने काग़ज़.. साथ तेरे मिरी तस्वीर निकल आई है..!!
पीठ से निकले खंजरों को जब गिना मैने..।ठीक उतने ही निकले जितनों को गले लगाया था मैने..!!
शुरुवात तो सभी अच्छी करते हैं,
मसला तो सारा आखिर तक,
अच्छे बने रहने का हैं..!!
'आज का प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति प्रेम का भूखा है।'
~ मुक्तिबोध
मेरे जीवन की किताब का
सबसे सुंदर अध्याय हैं आप
आत्मबल को भेदती इस तीक्ष्ण गर्मी में, मानसूनी बारिश की पहली फुहार हो तुम...
कहां से लायी हो इतनी खूबसूरत आंखें…सारे जहां की खूबसूरती समेटे हुए..कौन कहता है कि छोटे कपड़ों में ही सुंदर दिखा जा सकता है.. मर्यादा , संस्कारों में रहकर पूरे कपड़ों में भी सिर्फ आंखों से ही चांद सी खूबसूरत...
मेरी दोस्त ने अभी कहा - ये जो लड़कियां होती है ना, इनसे आप थोड़ा दूर रहा करिए!….इनके पास रोने के सिवा कुछ नहीं होता.
रास आ जायेगा एक रोज़ तेरा जाना भी ,
हम किसी दुःख में लगातार नहीं रोते हैं ।।
सत्य के बाद मनुष्य निर्भय हो जाता है, और झूठ के बाद कायर।
जया अंजनी
हम पूजते है तुम्हें, कृष्ण की मीरा की तरह,हर मर्द के अंदर एक औरत का दिल होता है.
बेईमानी से कमाया हुआ पैसा ,
बीमारी में चला जाता है.....!!
किसी के साथ किसी भी प्रतियोगिता की कोई ज़रूरत नहीं है। तुम जैसे हो अच्छे हो, अपने आप को स्वीकार करो।