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World's Best Cow Hospital

✯||कहा जाऊं मेरी सादगी को लेकरयहां हर कोई सूरत का दीवाना है…||✯

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय

औरत बड़ी प्यारी चीज़ है रो लेगी, मगर अपनी गलती कभी नहीं मानेगी...

ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं, मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बे-ख़बर नहीं. आलोक श्रीवास्तव

तेरे होंठों के स्पर्श से मेरा हर ज़ख़्म भर जाता, भींच कर बाहों में तेरी फूंक से भाप करवाता, और हम भी कसीदे इश़्क़ के आंखों से पढ़ लेते, मयस्सर जो तू होती तो तेरा दर्द भी हंसकर पी जाता..!! विरक्ति

कभी-कभी थोड़ा पलायन बहुत स्वस्थ होता है। ~ धर्मवीर भारती

जो देख के हँसता था हम जैसे फ़क़ीरों कोशोहरत की बुलंदी से उतरा तो बहुत रोया-रईस अंसारी

खूब समझती है वो रूदन अपने लाल का,"मां" पृथ्वी पर साक्षात् भगवान होती है, घर, समाज, ईश्वर किसी का उसे भय नहीं,अपनी औलाद में ही उसकी जान होती है, और नहीं करती फिक्र कभी धूप - शीत की,हर आफत से बचा ले...

हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते है,मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिन्दुस्तान कहते हैं, जो ये दीवार का सुराख है साज़िश है लोगों की,मगर हम इसको अपने घर का रोशनदान कहते हैं !

इस बार ऐसे छोड़ की हासिल ना हो सकू आऊ ना अपने हाथ भी ऐसे गवा मुझे

गुजरता है मेरा हर दिन, मगर पूरा नही होता, मैं चलता जा रहा हूं, और सफर पूरा नही होता…!

जैसे जल द्वारा अग्नि को शांत किया जाता है वैसे ही ज्ञान के द्वारा मन को शांत रखना चाहिए !!

मंजिल इतनी पास होकर भी उनकी राहें गुम क्यूँ है?हम क्या इतने गैर है ख़ुदा..अगर नहीं तो मेरी दुआ में तेरी मंजूरी इतनी तंग क्यूँ है?

ख़ुश मिजाजी मशहूर हैं हमारी सादगी भी कमाल है हम शरारती भी बेइंतेहा के है तन्हां भी बेमिसाल है

वक्त से पहले हादसों से लड़ा हूँ.. मैं अपनी उम्र से कई साल बड़ा हूँ।

साथ रोना साथ हँसने से ज्यादा बड़ी चीज है।

गालों पर उंगलियों की छाप पीठ पर लात जूतों की बरसात होंठों पर दाँतों के निशान मुख की कोरों से बहता रक्त कानों में गूँजती रिश्तों को शर्मशार करती हुईं गालियाँ 'उन दिनों'. उसकी टाँगों के नीचे आने से मैंने मना क्या कर दिया बस.. उसने एक चुटकी...

"समर शेष है, जनगंगा को खुल कर लहराने दो शिखरों को डूबने और मुकुटों को बह जाने दो पथरीली ऊँची जमीन है? तो उसको तोड़ेंगे समतल पीटे बिना समर की भूमि नहीं छोड़ेंगे समर शेष है, चलो ज्योतियों के बरसाते तीर खण्ड-खण्ड हो गिरे विषमता...

घमंड में आकर अपना सर ऊंचा ना करें,जीतने वाले भी गोल्ड मेडल झुक कर हासिल करते हैं…

तुम्हारा एकांत ही तुम्हें मनुष्य बना सकता है, भीड़ तुम्हें भेड़ बना देगी। जया मिश्रा


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