एक तुम्हारे ना होने से ऐसे लगता है जैसे,
सुबह से शाम होने मे कई दिन लगते है ..
मुझे ये रूह से मिलने का ढोंग नईं करनामेरे बदन को तेरे स्पर्श की ज़रूरत है
शुक्रिया है जिंदगी यहाँ तक लाने के लिये,
यहाँ से अब मैं अकेला ही चला जाऊंगा…!!
सारे ही काम जरूरी थे जिंदगी में और होते भी गए
एक खुदा तेरी इबादत ही थी जो हर बार टालती गयी
उसे छोड़ देना ही उचित हैं,
जो आपके होने का मूल्य ही न समझे…
विरह कि आग में जल रही, अपनी ज़िन्दगी को खींच रहा हूं,
बंद हो चुकी अपनी प्रेमग्रंथ के, जज्बातों को सींच रहा हूं..!!
विरक्ति
कैसे करूं खुद को तेरे काबिल ए - जिंदगी, मैं जब आदतें बदलता तू सर्ते बदल देती हैं।।
ब्रह्मांड केवल अपने सबसे मजबूत योद्धा
को ही सबसे कठिन लड़ाई देता है।
सिर्फ तुम हो मेरे सुकून का लम्हा
वरना शोर तो सारे जहां में है.....
जुबां पर भीख रहती है हलक पर चीख रहती है,
ना पैदा हो कभी बेटी हैवानों कि सीख रहती है..!!
विरक्ति
तेरी अदाओं को और निखारती तेरी जुल्फें वार कर गयीं,
तेरा श्रंगार करती बरसात कि बूंदें, मेरी जां निसार कर गयीं..!!
विरक्ति
नफरत का बाज़ार ना बन, फूल खिला तलवार ना बन,रिश्ता रिश्ता लिख मंज़िल, रस्ता बन दीवार ना बन- राहत इंदौरी
जिस दिन सादग़ी श्रृंगार हो जायेगी...
यक़ीन मानिये,
उस दिन आईने की हार हो जायेगी
समझदारो की भीड़ में खड़ा मुझे वो बावला पसंद है,
हम शौकीन है चाय के, हमे लड़का सावला पसंद हैं..!
मुमकिन नहीं मेरा पहले जैसा हो पाना
खुद को बहुत पीछे छोड़ आई हूँ मैं
चलो कल्पनवाओं का सैर करे
दुनियां के भीड़ से पार चले
उन्मुक्त भाव उड़ने के चाह भरे
मन के उम्मीदें पे पंख जड़े
होले होले दुनियां से पार चले
जन्नत के चौखट पे पग रखे
अलग ही जहां का दीदार करे
होगी अनुभूति जो ख्याल करे
चांद...
चाँद को छू के चले आए हैं विज्ञान के पँख
देखना ये है कि इंसान कहाँ तक पहुँचे
- गोपालदास 'नीरज'
मसला ये नहीं की लोग परवाह क्यों नहीं करते,
मुद्दा ये है की हम उम्मीद क्यों करते हैं...
बस इतना सा ही ख़्वाब पूरा चाहिए…हर सुबह तू मुझे मेरे साथ चाहिए…!!
क़त्ल हुआ हमारा इस तरह किश्तों में..!!कभी ख़ंजर बदल गए कभी क़ातिल बदल गए.!!