World's Best Cow Hospital English “मनुष्य दूसरों की दृष्टि में कभी पूर्ण नहीं हो सकता, पर उसे अपनी आँखों से तो नहीं ही गिरना चाहिए.! ” जयशंकर प्रसाद व्यवहार बदल जाता है … जब काम निकल जाता है !!! रोज़ शाम को डूब जाता है ,सूरज को तैरना सिखाना है… इश्क भी क्या अजीब बीमारी है,जिंदगी हमारी है पर तलब तुम्हारी है !! बड़ी चालाकी से खेल गया वो एक शख़्स जो मेरी ज़िंदगी है…. धोखा भी मुझे दिया और धोखेबाज भी मुझे कहा..!! सुनो कृष्ण!!मौसम हरे रखनाऔर मन गीला दुनिया की सबसे बड़ी ताक़त पुरुष का विवेक, और स्त्री की सुंदरता है। चाणक्य कटी हुई टहनियां कहा छाव देती है, हद से ज्यादा उम्मीदें हमेशा घाव देती है…! ज़लील भी करो तो तरीके से, ये तहज़ीब का शहर है….लफ्ज़ याद रखेगा तुम्हारे…!! जब डूब रही थी कश्ती और दूर था किनारा, तब भी भरोसा सिर्फ खुद पर था हमारा.... वक़्त और समझ एक साथ खुशकिस्मत लोगों को मिलते हैं……… वक़्त पर अक्सर समझ नहीं होतीऔर समझ आने तक वक़्त नहीं मिलता..!! पीने का अंत बर्बादी ही है, चढ़ गई तो आदमी बर्बाद, और न चढ़ी तो पैसे। कार्यों को प्रारंभ न करना बुद्धि का पहला लक्षण है और प्रारंभ किए हुए कार्य को पूरा करना दूसरा। मुझे अकेले चलेने में बहुत मज्जा आता है, क्योंकि ना कोई आगे चलता है और ना कोई पीछे छूटता है… माना अगम अगाध सिंधु है, संघर्षों का पार नही है, किंतु डूबना मझधारो में, साहस को स्वीकार्य नहीं है. जिंदगी अपने रफ्तार से चल रही हैं, हम अपनी रफ्तार से चल रहे हैं, और समय........? वो तो बस मजे लिए जा रहा हैं। अच्छे संस्कार किसी मॉल या बाजार में नहीं, परिवार के माहौल से मिलते हैं... अपना जीवन आलस्य में बिताना, आत्महत्या करना है। आ देख मेरी आँखों के ये भीगे हुए मौसम,ये किसने कह दिया कि तुझे भूल गए हैं हम. वफा के रश्मों रिवाजों को बहुत देखा जमाने में निभाने का हुनर तो बस किताबों में होता है.. प्रज्ञा शुक्ला Prev1…252627…236Next Concept, Created & Designed by sureshjain.com © copyright 2025. sureshjain.com All Rights Reserved.