कमाने वाले को पता होता है पैसे कैसे कमाए जाते हैं,
बैठके खाने वाले लोग हाथ का मैल कह देते हैं।
अनवर चतुर्वेदी
सुना है, घर के कई टुकड़े हो गए।अच्छा! अच्छा! ,बच्चे बड़े हो गए।।
हम अकेले रहने वाले लोग
किसी को साथ देख कर क्यूं जलेंगे..
वे धर्म का डर देंगे
वे जाति का डर देंगे
वे ईश्वर का डर देंगे
वे संस्कृति का डर देंगे
तुम्हें वो सबकुछ देंगे जिनसे तुम डर सको
तुम जितना डरोगे,
वे उतने ही आततायी होते चले जायेंगे
दुनिया की कोई परेशानी,आपके साहस से बड़ी नही हैं…
वृक्ष के समान बनो जो कड़ी गर्मी झेलने के बाद भी सभी को छाया देता है।
महाकवि कालिदास
किरदार अच्छा हो तो लोग,
कब्र का रास्ता पूछकर पहुंच जाते हैं...
मजबूर नहीं करूँगा किसी को बात करने के लिए,
जिसको जाना है वो चला जाये जो मेरा है वो ठहर जायेगा !!
कभी समाज कि गंदी नियत, कभी पारिवारिक यातनाएं,
मुख पर नकली मुस्कान रखकर अकेले में आंसू बहाएं..!!
धीरे-धीरे जाने से नहीं डरें। स्थिर रहने से डरें।
मुनाफिक और बत्तमिज में अगर फ़र्क किया जाए तो बत्तमिज ज्यादा खतरनाक नही होता जितना मुनाफिक होता है
गुरु के आशीर्वाद से शोभा नगर कि बढ़ाई थी
फुलवाड़ी मे भ्रमण करते झलक सिया कि पायी थी
मोहित हो गये राम तभी जब दिखी बाग मे जानकी
प्रत्यंचा चढ़ाई हासिल की सीता ये बात थी सम्मान की
राम जैसा धैर्य सीता सी पवित्रता...
सिर्फ सोचे है करके नहीं देखे,
मेरे सारे गुनाह अधूरे है !
आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं
सामान सौ वर्ष का है पल की किसी को खबर नहीं!
चलो कल्पनवाओं का सैर करे
दुनियां के भीड़ से पार चले
उन्मुक्त भाव उड़ने के चाह भरे
मन के उम्मीदें पे पंख जड़े
होले होले दुनियां से पार चले
जन्नत के चौखट पे पग रखे
अलग ही जहां का दीदार करे
होगी अनुभूति जो ख्याल करे
चांद...
आप की सब से बड़ी दौलत आप का वक़्त है
जिसे भी दे रहे हो बहुत सोच समझ कर देना !!
नाराजगी चाहे कितनी भी क्यों ना हो,पर तुझे छोड़ देने का ख्याल हम आज भी नहीं रखते
कहता है, वो महफूज रहे वो घर के बंद दीवारों में, बता...द्रौपदी कहा लूटी थी, घर मे या बाजारों में...!!
किसी काकिरदार सजानेखुद को गलत लिखना पड़तावरनाखुद की कहानी मेंअपने आप कोखराब कोन लिखता…