ये आईने कभी आँखों को पढ़ नहीं पाते
ये लबों की हँसी से आगे बढ़ नहीं पाते
है जिनके दम से ज़माने में रंग और ख़ुश्बू
वो फूल अपने ही काँटों से लड़ नहीं पाते
मालविका हरिओम
शादीशुदा मर्द की इज्जत,
औरत की वफादारी पर टिकी होती है।
राजा की जान तोते में है
और तोते को हमने घेर लिया है
लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होतीबस एक माँ है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती
मर चुका है दिल मगर जिंदा हूं मैं
जहर जैसी कुछ दवाएं चाहिए 💔
दिल्ली में थूका, चाटा,गधे को बनाया बाप
नाम तो लिया नहीं फिर कैसे समझे आप ?
जोगीरा सारा रारा...
महल मेरा रेत का बनवाते हो
और पता बारिश को देते हो....!!
बहुत थे मेरे भी इस दुनिया में अपने,
फिर हुआ इश्क़ और हम लावारिस हो गए ..!!
मैं दोस्ती का हर एक बढता हाथ चुमता हूं
बस एक शर्त है , बंदा नमक हराम ना हो
सत्य का पहला स्वागत विरोध से होता है.! ~ ओशो
तुलसी साथी विपति के, विद्या, विनय, विवेक।
साहस सुकृति सुसत्य व्रत, राम भरोसे एक।।
तुलसीदास जी
तानों की भट्ठी में तपा आदमी,
राख नहीं सोना बनता है....
नफरत नहीं करूंगा तुमसे
माफ करके शर्मिंदा करुंगा।
नहीं पढ़ीं जातीं सम्पूर्ण कविता अब उनसे
'दो' पंक्तियाँ दो उन्हें, किताबें वापस ले लो।
यादों से न पूछें तरबियत उनकीये वो आजाद परिंदे हैं जो पल में सागर पार कर लेते हैं
हम अपनी कहानी के लेखक खुद है ..
जब मन करेगा तब चैप्टर बदल देगे...!!
मान ही लो अब जो भी कुछ है सच्चा झूठा सा,
कब तलक करते रहें दिल की वक़ालत हम ?
क़ीमत दोनों की चुकानी पड़ती है,
बोलने की भी और चुप रहने की भी
सफर में मुश्किलें आये तो जरूरत और बढ़ती है..
कोई जब रास्ता रोके तो हिम्मत और बढ़ती है..!!
छतरियाँ हटा के…मिला करो इनसे,
ये जो बूँदें हैं ना,बहुत दूर से आती हैं।