बोले हुए अल्फाज़, गुजरा हुआ वक्त,
टूटा हुआ भरोसा, कभी वापस नही आता...
इल्म किसी भी यूनिवर्सिटी से हासिल करलो,
पर तजुर्बा वक्त की ठोकरों से ही हांसिल होगा।
『 𝐙𝐞𝐡𝐚𝐫𝐥𝐢𝐧𝐞 』
मैं घर का एक बहुत ही जिम्मेदार शख्स हूँ ...
क्योंकि घर में
कुछ भी गलत होने पर उसका जिम्मेदार मैं ही होता हूं
हादसे इंसान के संग,मसखरी करने लगे…!लफ़्ज़ कागज़ पर उतर करजादूगरी करने लगे… !क़ामयाबी जिसने पाई,उनके घर तो बस गये…. !जिनके दिल टूटे वो आशिक़,शायरी करने लगे….!!
कहते हैं आत्मा से ख़ून नहीं बहता शायद इसलिए,
सबसे ज्यादा घाव आत्मा को सहने पड़ते हैं !
घर वालों को ज़रूर बताइए उलझने अपनी,मर जाने से अच्छा है उनके लिए जिया जाए….
बेवजह ही नही होती लोगों से मुलाकात,
किसी से सबक मिलता है,
तो किसी से मिलता ज्ञान....
हम वहाँ हैं जहाँ से हम को भी
कुछ हमारी ख़बर नहीं आती ।
नहीं कोई तुमसे शिकायत बस इतनी सी इल्तिजा है, जो हाल कर गये हो कभी देखने मत आना
नर हो न निराश करो मन को कुछ काम करो कुछ काम करो।
मैथिलीशरण गुप्त
जेहन में उसके नाज़ी का नायक इतराता हैपर होंटों से वो गांधी-गौतम को गाता है!
हार मंज़ूर है मुझे, मगर एहसान नहीं, तुम जीत के भी, मेरे कर्ज़ दार रहोगे....!!
रास आ जायेगा एक रोज़ तेरा जाना भी ,
हम किसी दुःख में लगातार नहीं रोते हैं ।।
हमारी हकीकत हमे ही पता है,
लोगों ने इस चेहरे को बस हसते हुए देखा है...
मुसाफिर है हम, मुसाफिर हो तुम भी
न जाने किस मोड़ पर फिर मुलाकात होगी...
एक वही शख़्श मेरी हर कहानी हर किस्से में आया…जो मेरा होकर भी , न मेरे हिस्से में आया..!!
तेरी एक चाय ने खरीद लिया हमें,बड़ा गुरूर था हमे की हम बिकते नहीं...
फिक्र है तो लड़ना जरूरी है
वरना खामोशी रिश्ते तोड़ देती है !!
हालात इंसान को वो बना देते हैं,
जो वो कभी था ही नहीं....
दिल मोहब्बत में परेशान तो होगा ही
अब आग से खेलोगे तो नुकसान तो होगा ही....!!