सहनशील होना अच्छी बात है,
परन्तु अन्याय का विरोध करना उससे भी उत्तम है !
ज़लील होने से अच्छा,बद'तमीज़ बनकर जवाब देना..
कही बैठ कर वो मेरा जिक्र कर रहा होगा..... ये हिचकी सुबह से यूँ ही तो नहीं आ रही है मुझे...!!
दिल करता है करेले की सब्जी खिला दूंउन लोगों को जो मुंह में मिठास और दिल में जहर लिए घूमते हैं
परिंदों को नहीं पता उनका मजहब क्या है,
वरना आसमां भी खून से नहा गया होता..!!
चराग़ों को आँखों में महफ़ूज़ रखना
बड़ी दूर तक रात ही रात होगी
हिम्मत इतनी रखो..
की किस्मत छोटी लगने लगे..!!
रूख से हटाकर ये पर्दा हमसे मिला करोहोंने से पहले रूखसत गले से लग जाया करो
और मैं किस जुबां में करूँइज़हार तुमसे ये इश्क़ अपना
कभी तो यार मेरी इन बेचैनियों सेहाल मेरा समझ जाया करो
समझो जग को न निरा सपना
पथ आप प्रशस्त करो अपना
मैथिलीशरण गुप्त
चाहा यही की एक ही शक्स समझे मुझे,भीड़ से रहा हमेशा परहेज मुझे
चाय से दोस्ती कल थी,
आज है और कल भी रहेगी...
फिर चाहे मौसम बदले या ज़माना !
एक तेरा दीदार मेरे सारे गमो को भुला देता है….
मेरी जिंदगी को जिंदगी बना देता है….!!
"कुछ लोग पाँवों से नहींदिमाग़ से चलते हैंये लोगजूते तलाशते हैंअपने दिमाग़ के नाप के।"
नरेश सक्सेना
अब क्या ही काहू अपने मां के बारे में..मां के ताने और खाने का कोई जोड़ नहीं..!!
बना कर मिट्टी के दिए जरा सी आस पाली है ,
मेरी मेहनत भी ख़रीदो लोगो मेरे घर भी दिवाली है ...
करता वही हूं जो मुझे पसंद है..
माना कि उम्र कम है लेकिन हौसला बुलंद हैं..!!
तेरी आवाज़ मेरी रोजी-रोटी हुआ करती थी ,तू मुझे भूख से मारेगा मैंने सोचा भी ना था !!
बुरा वक़्त भी गुज़र ही जाता हैबस रब को हमारा सबर आजमाना होता है!
कुछ ख़याल कुछ हक़ीक़त मिलाते हैं हम,
ऐसे ही पंक्तियों में ख़ुद को उतारते हैं हम।
युद्ध में विजय हो या पराजय
दोनों का परिणाम मातम ही होता है |