चांद के टेढ़े स्वरुप ने भी हमेशा प्रेमियों को सीधा प्रेम मार्ग दिखाया है।
राजेश गौरी
सभी लोग "मरते" हैं...
पर वास्तव में सभी लोग "जीते" नहीं हैं..!!
छीन लेते हैं रंगत चेहरे की,
बेटियों को जो बोझ समझते हैं,पहले छीन लेते हैं खुशियां उनकी,
फिर हंसने को कहते हैं..!!
पहले मन निकलता है सफर पर, तन बाद में.
जो कुछ भी हूॅं पर यार गुनहगार नहीं हूॅं, दहलीज़ हूॅं दरवाजा हूॅं पर दीवार नहीं हूॅं !!
अब हम जब भी आयेंगे,,
बस याद ही आएंगे..!!
अगर अंधे आदमी को आंख मिल जाए तो वो
सबसे पहले छड़ी फेंकता है जिसने बुरे वक्त में
उसका साथ दिया ...
आसमां को गुरूर था कि वो सबका मुकाम हैबारिश को मगर जमीं ही रास आई!
साथ हजारों ख्याल आयेजैसे कोई सूखी लकड़ीसुर्ख आग की आहें भरे,दोनों लकड़ियां अभी बुझाई हैं
एक नींद जो पूरी नहीं हुई..
एक ख्वाब मुझे सोने नहीं देता..!!
अदाओं का खेल है बहुत सारा.
कुछ लोग ज़िस्म पर भी मरते होंगे.!
मां ममता की मूरत बन गयी,पिता संघर्ष के प्रतीक रह गए।चोट लगी तो मां के अश्रुधार बहे,पिता मौन में दुःख को सह गए।।
पत्नी की बातों को एक कान से सुनकर दूसरे कान से रोज़ निकालना भी,किसी योग से कम नहीं होता है.!
रोज़ अच्छे नही लगते आँसू खास मौको पे मज़ा देते है..!!
हाय वो जिम्हें देखा भी नही याद आये तो रुला देते है..!!
आग अपने ही लगाते हैगैर तो सिर्फ हवा देते है…!!
बिना स्वार्थ और बिना मुलाकात के प्रतिदिन
याद करने वाले भी सौभाग्य से मिलते है..!!
छल करोगे तो छल मिलेगा!!
आज नहीं तो कल मिलेगा!!
जिओगे जिंदगी सच्चाई से
तो सुकून हर पल मिलेगा..!!
मसला सकून का है जान,
वरना जिस्म बाज़ार में भी मिलता है...
अहंकार की...सबसे बड़ी खराबी यही है कि...यह कभी भी इन्सान को..महसूस नहीं होने देता कि... वह गलत है...
जीवन का परिचय बहुत सीधा सा है….आसूं वास्तविक है और मुस्कान में अभिनय है..!!
गरीबी पर शायरी लिखने बैठा था ,
कमबख्त कलम ही रो पडी।।