घबराया साहेब बात बात पर डरता है,जब डगमग होवे कुर्सी तब धर्म को आगे करता है।पटर पटर बोले है ये सौ में नब्बे झूठ,राम नाम का लगा मुखौटा लेगा सब को लूट।चीन बढ़ाता अपना नक्शा उससे छिपता फिरता है,घबराया साहेब...
नाराजगी चाहे कितनी भी क्यों ना हो,पर तुझे छोड़ देने का ख्याल हम आज भी नहीं रखते
नादान हो तुम तुम्हें अभी इल्म नहीं है
ये ज़िन्दगी है मेरी जान कोई फिल्म नहीं है..!!
राम जी की ज्योति से नूर मिला है,सबके दिलो को सुरूर मिला है,जो भी गया राम जी के द्वार,कुछ न कुछ जरूर मिला हैशुभ राम नवमी
काँटों से दिल लगाया है, लहूलुहान होने दो
अभी ज़मीं कहा है बस, उसे आसमान होने दो
कोई व्यक्ति कितना ही ख़ास क्यों न हो,
उसे एक पल में त्यागने कि क्षमता तुम्हारे भीतर अवश्य होनी चाहिए।
क़त्ल हुआ हमारा इस तरह किश्तों में..!!कभी ख़ंजर बदल गए कभी क़ातिल बदल गए.!!
मोहब्बत वो बेइंतहा करता है मुझसे सोकरता है ख़ुद बुराई , बता कर बुरा मुझे …
खामोशी जुर्म है इस दौर में बोलना सीखो..
वरना मिट जाओगे हालातों के तूफानों में..!!
चेहरे अक्सर झूठ भी बोला करते हैं,
रिश्तों की हकीकत वक़्त पर पता चलती हैं.
जो युद्ध नहीं कर सके..
उन्होंने आत्महत्या कर ली ॥
मैं जो कहता था बदलूंगा नहीं कभी खुद कोइन दिनों मैं उस पुराने लड़के को ढूंढ रहा हूॅं !!
मुझसे नही कटती ये उदास रातें ,
कल सूरज से कहो मुझे ले कर ढूबे ।।
हालातों के साज़ परपीड़ा के तार सेवेदना के स्वर लिखूँगा
वक़्त की राह परज़िन्दगी की क़लम सेलम्हों की रफ़्तार लिखूँगा
वैश्या की पीड़ा सेजिस्म के खरीददारों परमैं हवस के बाज़ार लिखूँगा
तन्हाई के साये मेंअन्धेरे की क़लम सेमैं अपना संसार लिखूँगा..
शेरों के साथ संगत बनाइए..
कुत्तों के साथ बैठने से आप सिर्फ पीठ पीछे भोकना ही सीखेंगे..!!
इन बारिशों से कह दो कहीं और जाकर बरसे ..... मुरशद ...
इतनी रिमझिम तो रोज हमारी आँखों में होती है।।
जो जिंदगी बची है उसे मत गँवाइए
बेहतर यह है कि आप मुझे भूल जाइए
किसी को छल कर ग़र तुम ख़ुश हो रहे हो,
तो ये तुम्हारी सबसे बड़ी नाकामयाबी है।
सम्पूर्ण ब्राम्हाण्ड में जितना कोई और आपके प्रेम और स्नेह के लायक है उतना आप खुद भी है।
लोग तोल देते हैं चंद बातों पर क़िरदार…बारी अपनी हो तो तराजू नहीं मिलता!!