सुनो मेरे दोस्तों पैसा इतना कमाओ की,चार लोग तुम्हे अपना दामाद बनाना चाहे…
जब घरवाले थप्पड़ की जगह ताने मारने लगे,
तो समझ जाना कि बड़े हो गए हो तुम.
मेरा संघर्ष एक दिन मुस्कुरायेगा, पाँव से काँटा ख़ुद ही निकल जायेगा
सहनशीलता, क्षमा, दया को
तभी पूजता जग है
बल का दर्प चमकता उसके
पीछे जब जगमग है।
ऐ खुदा, मेहनत कि दो रोटियों पर ये तेरी कैसी खुदाई है,
जिम्मेदारियों को बीच में छोड़ एक गरीब ने जान गंवाई है..!!
इश्क़ में दो की संख्या आखरी होती है, तीन की जलन आप नहीं समझ सकते.
जिददी हूँ, गुस्से वाला हूँ, बतमीज़ हूँ, बेपरवाह हूँ,
लेकिन मैंने कभी किसी से रिश्ता मतलब के लिए नहीं रखा..!!
बेचैनियों के दौर में....सकूं की दवा हो तुम....!!
कभी कभी ऐसा क्यों लगता है तू मेरा होकर भी जुदा सा क्यों लगता है ?माना तेरी भी कुछ मजबूरिया है पर ये तों बता ये जो तेरी हर आहट का इंतजार करता है ये शक्श आखिर तेरा क्या लगता...
जो दूसरों की स्वाधीनता छीनते हैं, वास्तव में कायर हैं।
दुनिया तुली थी हमको बनाने पे देवता ,
पर हम किसी भी हाल में पत्थर नहीं हुए
कमियाँ हैं तो रहने दो साहब
खुद को खुदा थोड़ी बनाना है..
वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा...
वास्तव में वह व्यक्ति बुद्धिमान है..जो क्रोध में भी गलत बात नहीं बोलता हैं.!!
सफलता का अर्थ है बहुत धैर्यवान होना
लेकिन समय आने पर आक्रामक होना।
चार दिन की जिंदगीकुछ भी गिला न कीजिये,दवा, जाम, इश्क़, जहर जो मिले मजा लीजिये
जिन्दगी संघर्षो का दरिया है इसे किस तरह,पार करना है ये सब अपना-अपना नज़रिया हैं…
ज़िन्दगी भर मेरे जीते जी तुमने मेरा मातम मनाया,
आख़िरी तमन्ना है मेरी मौत पर तुम उत्सव मनाना…!!
वक्त से पहले हादसों से लड़ा हूँ..
मैं अपनी उम्र से कई साल बड़ा हूँ।
तुम क्या जानो क्या चाहा था क्या लेकर आये हमटूटे सपने घायल नगमे कुछ शोले कुछ शबनम