समय हमें कुछ भीअपने साथ ले जाने कीअनुमति नहीं देता।
– कुँवर नारायण
किसी एक को खुश करने के लियेलोग अपने लोगों से दूरी बना लेते हैंऔर एक दिन ऐसा भी आता है, किजिसके लिये पूरी दुनिया से अलग हुयेवो खुद अकेला छोड़कर अलग हो जाता है
हज़ारो ठोकरें खाकर भी नाबाद बैठी हूँ
मैं जहाँ कल थी, वही पर आज बैठी हूँ
अँधेरों से नहीं शिकवा, नहीं क़िस्मत से नाराजगी कोई
किस्मत को भी सँभाल लूँगी मैं, अब ये ठान बैठी हूँ
छोड़ा हैं कई गैरो ने,...
तुम्हारी आवाज वो संगीत है, जिसे ताउम्र सुना जा सकता हैं…!!
चाय को तीसरी बार गर्म करके पिओगे
तो जहर बन सकती है
प्रेरणा के लिए पिता का संघर्ष,
देखना ही पर्याप्त होता है.....
वो आईने में कैसे बर्दाश्त करता होगा खुद को
उसे तो धोकेबाज़ लोगो से सख्त नफरत थी..।।
एक तेरा कदम एक मेरा कदम,
मिल जाए तो जुड़ जायें अपना यह वतन…
दिल चाहता हैं कि फिर अजनबी बनकर देखेतुम तमन्ना बन जाओ हम उम्मीद बनकर देखे