किसी रोज सुबह का कुछ ऐसा नजारा हों
खुलें जब ऑंखें सामने चेहरा तुम्हारा हों.!
वफादारी एक brand हैं,
जिसे हर कोई Afford नही कर सकता…
पहले बारिश होती थी तो तुम याद आते थे ,
अब जब याद आते हो तो बारिश होती है ..!!
अमीरों में अभी वो शुमार नहीं
ग़रीबों का मसीहा नया नया है
सोचो तो सिलवटों से भरी है तमाम रूह
देखो तो इक शिकन भी नहीं है लिबास में
धैर्य की अपनी सीमाएँ हैं अगर ज़्यादा हो जाए तो कायरता कहलाता है।
चाणक्य
बहुत अच्छे होकर भी आप हर किसी के लिए अच्छे नहीं हो सकते कहीं बुरे बना दिए जाते हैं तो कहीं बुरे साबित कर दिए जाते हैं !!!
आज की सुबह खास है बादल का वो टुकड़ा बारिश के साथतेरी यादों की फुहार भी लाया है मैं खुद को आज सींचूँगीमन में बसी विरह की तपिशको इन गिली बूंदो सेकुछ नयी कलियाँ कुछ नये सपनेकुछ नये से तुम...
छोडने की लाख बुराई होने के बाद भी रुकने की एक वजह ही प्रेम होती होगी शायद
अपनी बेटी को ज्ञान देकर अच्छे और बुरे का,
उसे इस गंदे समाज का आईना दिखाता है,
एक पिता ही है जो मजबूती से हांथ पकड़कर,
उसे कदम से कदम मिलाकर चलना सिखाता है..
सोचा था हर मोड़ पर याद करेंगे तुम्हे
लेकिन पूरा रस्ता ही सिदा था..
ख्वाब टूटें हैं मगर हौसले जिंदा हैं... हम वो हैं जहां मुश्किलें शर्मिंदा हैं....!!
तुम छा गए हो कोहरे की तरह मेरे चारों तरफ
ना कोई दूसरा दिखता है ना देखने की चाहत हैं..!!
रुकना नहीं है...
थकना नहीं है...
और झुकने का तो सवाल ही नहीं बनता !
डिग्रिया तो आपकी पढ़ाई के खर्च की रसीदें है.. ज्ञान वही है जो आपके किरदार में झलकता है.!
‘’शोक मत करो ! नहीं उतरेगा कोई भी उत्सव
बुलावे पर उनके लाल क़ालीनों पर
करेंगे सारे उत्सव प्रतीक्षा
न्योते की तुम्हारे रोककर साँसें अपनी
बस करना होगा थोड़ा सा इंतज़ार”
सिर्फ़ जीना मायने नहीं रखता,
सही तरीके से जीना मायने रखता है।
बस सफर के मज़े लो,मज़िल सबकी मौत है…
पल कितने है नहीं जानती हु
पर जितने है अच्छे है ये जानती हु
बहुत से लोग मिले
कुछ सबक सिखा के गए
कुछ से सबक सीख लिए गए ।।
गम से खाली नहीं जिस्म का कोना कोई हम रहे न रहे हम पे मत रोना कोई..!!