कहता है, वो महफूज रहे वो घर के बंद दीवारों में, बता...द्रौपदी कहा लूटी थी, घर मे या बाजारों में...!!
हारकर अपनी तक़दीर से,अवसादों के बीच भंवर में खोया था, जब मौत मांग रही थी ज़िन्दगी,मैं सिसक सिसककर रोया था.
गरीबी पर शायरी लिखने बैठा था ,
कमबख्त कलम ही रो पडी।।
तुम्हारे अंदर PASSION है..
तो कोई भी चीज तुम्हारे लिए नामुमकिन नही है..!!
मुश्किल तो बहुत होती होगी तुम्हे,
इतनी ठंड़ में अपने दो-दो चहरे धोते हुए..!!
जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहिं।
सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माँहि॥
बूँद पानी को मेरा शहर तरस जाता है
और बादल है कि दरिया पे बरस जाता है
मुझे तेरी मोहब्बत ने अजब इक रौशनी बख़्शी
मैं इस दुनिया को अब पहले से बेहतर देख सकती हूँ!
वेशक प्यार तुमने किया था हमने तो सिर्फ़ परवाह की थीवेशक मोहब्बत तुमने की थी हमने तो सिर्फ़ मन्नत की थीवेशक इश्क तुमने किया था हमने तो सिर्फ़ इबादत की थीवेशक ख्वाब तुमने दिखाया था हमने तो सिर्फ़ कोशिश की...
जब भी तुमको देखती हूँ
तुम्हें ख़ुद को देखते हुए पाती हूँ
मेरी नज़रों में तुम नज़र आते हो
तुम्हारी नज़रों में, मैं नज़र आती हूँ
ज़िन्दगी गुज़ारने के 2 तरीक़े है,
जो हो रहा है होने दो बरदाश्त करो,
या फिर ज़िम्मेदारी उठाओ उसे बदलने की..!
कुछ साल सुखों को ताक रखना पड़ेगा खुद को खुद की औकात पर रखना पड़ेगा।नीदें तुम्हें हर रात सुला देना चाहेंगी मगरतुम्हें पहरा किताब पर रखना पड़ेगा ।।
दया अगर लिखने बैठूं होते हैं अनुवादित रामरावण को भी नमन किया ऐसे थे मर्यादित राम
~अज़हर इक़बाल
ऐसी शिक्षा जो डॉक्टर और इंजीनियर को तो जन्म देती है,
लेकिन मनुष्य को जन्म नहीं देती व्यर्थ है।
दुश्मन की पसंदीदा चाल,
दोस्तों को एक दूसरे के खिलाफ़ करना हैं…
कुछ अजीब सा चल रहा है वक्त का ये सफर
एक गहरी सी खामोशी है खुद के अंदर!
यूँ ही आबाद रहेगी दुनिया,
हम न होंगे, कोई हम सा होगा !
तुलसी साथी विपति के, विद्या, विनय, विवेक।
साहस सुकृति सुसत्य व्रत, राम भरोसे एक।।
तुलसीदास जी
भूत पहले ही बीत चुका है, भविष्य अभी तक आया नहीं है। तुम्हारे लिए जीने के लिए बस एक ही क्षण है।~ गौतम बुद्ध
पहाड़ तोड़ने का साहस तो हर इंसान में है,
पर वो डरता है "कामयाबी" के पहले पागल घोषित किए जाने से।