तेरी एक चाय ने खरीद लिया हमें,बड़ा गुरूर था हमे की हम बिकते नहीं...
मुझ पर तरस खाने वाले लोगहद्द से ज़्यादा बुरे लगते हैं मुझे
अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा
मगर तुम्हारी तरह कौन मुझ को चाहेगा।
तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा
मगर वो आँखें हमारी कहाँ से लाएगा।
तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा है
तुम्हारे बा'द ये मौसम बहुत सताएगा।
बशीर बद्र
मेरे दोस्त गिरगिट की नस्ल के थे
एक एक करके सबने रंग दिखाए
एक उदास शहर में
कुछ किताबें थी
एक छत चार दीवारें थीं
कुछ दोस्त थे चाय के कुल्हड़ थे
गलियाँ थी किनारे थे
एक उदास शहर में
जहाँ वो थी और ज़िंदगी थी..
एक ही नदी के है यह दो किनारे दोस्तोदोस्ताना ज़िन्दगी से, मौत से यारी रखो।
दुनिया जिसे कहते हैं जादू
का खिलौना है,
मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए
तो सोना है।
निदा फ़ाज़ली
राह के पत्थर से बढ़ कर कुछ नहीं हैं मंज़िलेंरास्ते आवाज देते हैं सफर जारी रखो !
खामोशी जुर्म है इस दौर में बोलना सीखो..
वरना मिट जाओगे हालातों के तूफानों में..!!
बादलों की ओट से सूरज निकलने वाला है
सफर जारी रखो, वक्त बदलने वाला है।
यशवर्धन जैन
मन अक्सर उदास रहता है
इसलिए अब मन को मनाना छोड़ दिया है
हर पल अजीब सी बेचैनी रहती है
इसलिए अब महसूस करना छोड़ दिया है
खुलकर जीने में हिचक सी रहती है
इसलिए अब कोशिश करना छोड़ दिया है
जैसे भी है, अच्छे बुरे,बस...
तुम्हारी तपन जला रही है,,,,,
वरना कब के बुझ गए होते ....
सुनो,,
तुम कबूल तो करो इश्क मेरा,,
मैं खाना बनाना भी सीख लूंगी।।
आह जो दिल से निकाली जाएगीक्या समझते हो कि खाली जाएगी
~अकबर इलाहाबादी
किरदार कितना भी साफ क्यों ना हो,
लोग वही सोचेंगे जो उनके मन में होगा…
नहीं कोई तुमसे शिकायत बस इतनी सी इल्तिजा है, जो हाल कर गये हो कभी देखने मत आना
अब तो इस राह से वो शख़्स गुज़रता भी नहीं
अब किस उम्मीद पे दरवाज़े से झाँके कोई
परवीन शाकिर
अपनी बेटी को ज्ञान देकर अच्छे और बुरे का,
उसे इस गंदे समाज का आईना दिखाता है,
एक पिता ही है जो मजबूती से हांथ पकड़कर,
उसे कदम से कदम मिलाकर चलना सिखाता है..
अंधेरे को कोसने से बेहतर है
कि एक दीया जलाया जाए।
अमीरों में अभी वो शुमार नहीं
ग़रीबों का मसीहा नया नया है