ठहरी हुई ख़्वाहिशों की बंद किताब हूँ मैं..ज्यादा तो नहीं मगर खुद में ही, बेहिसाब हूँ मैं..!!
उसके दिल को भी आधार कार्ड से जोड़ दो, पता तो चले कितने खाते खुले हैं...
न चन्द्रमुखी न पारो२ पेग मारो और जिन्दगि आराम से गुजारो !!
पद और पैसे से कितने भी अपराध छुपा लो साहब,
किसी गरीब की बद्दुआ तुम्हे सुकून से जीने नहीं देगी...
इश्क सीमित नहीं इंसान तक ,
चाय के भी तो आशिक होते है ।।
उसके साथ रहो जिनकी तबीयत खराब हो, लेकिन उनके साथ कभी न रहो जिनकी नियत खराब हो..!!
सबसे बड़ी ख़ुशी उसी काम को करने में है ,जिसे लोग कहते हैं कि ये तुम्हारे बस का नहीं है …
अव्वल अल्लाह नूर उपाया कुदरत के सब बंदे
एक नूर ते सब जग उपजा कौन भले कौन मंदे
ना राधा बनना है, ना मीरा बनना है,,मुझे ज़िंदगी की राहों में,,बस तुम्हारे साथ चलना है,,
~कीर्ति चन्द्रा
ऐसे माहौल में दवा क्या है दुआ क्या है ,
जहाँ कातिल ही खुद पूछे कि हुआ क्या है ..!!
अब कोई मरहम काम नहीं करता उन ज़ख्मों पर, जो मुझे मेरी वफ़ा के बदले उससे इनाम में मिले थे..!!
ग़म और ख़ुशी में फ़र्क ना महसूस हो जहां
मैं दिल को उस मकाम पे लाता चला गया
साहिर लुधियानवी
कितना दर्द है आज दिल में दिखाया नहीं जाता,किसी को अपनी बर्बादी का किस्सा सुनाया नहीं जाता... एक बार जी भर के देख ले इस चहरे को ओ बेवफा सनम,क्यूंकि बार बार कफन उठाया नहीं जाता...!!
बेहिसाब झूठ कहा तो खुदा मान बैठे,
जरा सा सच बोल दिया बुरा मान बैठे!
यदि आप उड़ना चाहते हैं, तो वह सब कुछ छोड़ दें जो आपको नीचे खींचता है।
बुद्ध
जबरदस्ती की नजदीकियों से ,सुकून की दूरी अच्छी ।
एक वही शख़्श मेरी हर कहानी हर किस्से में आया…जो मेरा होकर भी , न मेरे हिस्से में आया..!!
राय पहले से बना ली तू ने
दिल में अब हम तेरे घर क्या करते
खतरा देखकर डसने वाले जीव जंगलों में रहते हैं,
और मौका देखकर डसने वाले मकानों में...
शब्दों का भी तापमान होता है साहब ,
ये सुकून देते हैं तो जला भी सकते हैं।।