नूर दिखेगा नही चहरे पर
ना होगी चमक आंखों में
एक दफ़ा आईने में देखो खुद को
कितना फरेब छुपा है बातों में
कितना,और कितना बोलोगे झूठ ख़ुदसे...
हो ही नही सकता की खुशी मिलती हो खैरातो में
स्वीकारो तो...
मैं राम बनूंगा तुम मेरी मर्यादा बनना..मैं कृष्ण बनूंगा तुम मेरी राधा बनना..
गीत ग़ज़लों में शामिल गर ना हो सके,
तो तुम्हारे दर्द में बसर हम ज़रूर करेंगे।
नेहा यादव
तमाम इश्क के शहर मालिक अब आग में जलते हैंमज़हब के पैरों से लोग आशिकों के सर कुचलते है
हर रिश्ता इसी कागज़ का गुलाम हैं..जिसे हम पैसा कहते हैं...
सभी अनुभवों का स्वागत कीजिए,पता नहीं कौन सा अनुभव आपकी ज़िन्दगी बदल दे..!!
शुरू-शुरू में सब यही चाहते हैंकि सब कुछ शुरू से शुरू होलेकिन अंत तक पहुँचते-पहुँचते हिम्मत हार जाते हैंहमें कोई दिलचस्पी नहीं रहतीकि वह सब कैसे समाप्त होता हैजो इतनी धूमधाम से शुरू हुआ थाहमारे चाहने पर।
~ कुँवर नारायण
दिल करता है करेले की सब्जी खिला दूंउन लोगों को जो मुंह में मिठास और दिल में जहर लिए घूमते हैं
गुजरता है मेरा हर दिन, मगर पूरा नही होता,
मैं चलता जा रहा हूं, और सफर पूरा नही होता…!
दिल का मामला है तो,दर्द से बनाकर रखिएगा हुज़ूर!किसी-न-किसी मोड़ पर,ठोकर ये खाएगा ज़रूर !
हिम्मती प्रेमिकाएं पत्नियां बन जाती हैबाक़ी सभी कविताएं बन जाती है ।
रिश्तों का गलत इस्तेमाल कभी मत करना.. अच्छे लोग जिंदगी में बार बार नही आते..!!
गरीबी शिक्षा सस्ती करने से कम होगी ,मुफ्त के राशन से नही।
यूँ खामोश रह कर ना सतामाना के हम तेरे तलबी है दूर रहकर परेशान ना कर,,,,,बेचैन दिल को और बेचैन ना कर,इश्क़ करना है तो कर एहसान ना कर..
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
जिंदा इंसान को गिराने मे औरमरे हुए इंसान को उठाने मे,ग़ज़ब की एकता दिखाते हैं लोग…
आँखों की गहराई में उतार जाओ,दिल की धड़कनों में बस जाओ,ख्वाबों की दुनिया में खो जाओ,तुम्हारी हर ख़्वाहिश पूरी हो जाए।
तू अच्छे कर्मों से एक अलग पहचान बन,तू पहले इंसान फिर हिन्दू मुसलामान बन.
प्रेम में रस्म होती है रूठने की ,
तुम्हें क्यों लगा हमारा झगड़ा हुआ है ।।
जो ठीक लगे वो ही देना प्रभू,
हमारा क्या है हम तो कुछ भी मांग लेते हैं...