इंतज़ार उसके करते थक गई मेरी अंखियां ,
ये दिल तू ही बता इस चांद का क्या करूं मैं...
जो गया वो गया आगे देखो बहुत कुछ है नया।जब तक अतीत को याद करते रहोगे तब तक खुद को बर्बाद करते रहोगे।
कहना बहुत आसान है!!!!!
बरसात गिरी और कानों में इतना कह गई ,गर्मी किसी की भी हो हमेशा नहीं रहती…
वो रूठी ही रहेगी, उसे खबर भी नहीं होगीमुझे कब? कहाॅं? किस लम्हें दफ़नाया गया
ये जीवन जिंदगी और मौत के….बीच का एक खूबसूरत सफर है…!!
ज़िंदगी से बढ़कर था भूख का मसअला ,
परिन्दा जाल पे यूँ ही नहीं उतर आया ..!!
समझने वाले ख़ामोशी भी समझ लेते हैं
और न समझने वाले
जज़्बात का भी मज़ाक बना देते हैं।
ये गर्मी भी बिल्कुल तुम्हारे ही जैसी है……आजकल सुबह भी तुम्हारे जैसी है,थोड़ी तपिश तो थोड़ी चमक सी है,और सुबह के बाद शाम का इंतजारबिल्कुल तुम्हारे इंतजार के जैसा बेसब्री सा
कई बार हम लोगों को इसलिए भी खो देते है..
क्यूंकि हम उनके लिए जरूरत से ज्यादा मौजूद रहते है..
भरोसें के काबिल नहीं है ये जिंदगी..!!
शिकायत हो या मोहब्बत,अभी कर लो..!!
चुरा लो अभी हर हसीन लम्हा जिंदगी से,फिर जिम्मेदारियां मोहलत नही देंगी !
पैसा इंसान के असली रूप को बाहर लता है.
“मेरे देश के रिश्ते कमाल हैं, मेरे देश का दान-धर्म कमाल हैं, मेरे देश का खून कमाल हैं…”, यह कहना है, मेरी एक विदेशी दोस्त का।आप बताएं के हमारे देश में और क्या-क्या कमाल हैं? भारत देश महान है ❣️
हुए बदनाम मगर फिर भी न सुधर पाए हम , फिर वही शायरी फिर वही इश्क फिर वही तुम ..!!
ख्वाहिशें हमारी जितनी थी, अरमान हमारे खाक हुए,
मोहब्बत हमारी बढ़िया थी, हम समय के हांथों बर्बाद हुए..!!
विरक्ति
नशे में आने दे ऐ वक्त ,होश में रहकर तेरे सब जवाब नहीं दे सकता ..!!
“मनुष्य दूसरों की दृष्टि में कभी पूर्ण नहीं हो सकता,
पर उसे अपनी आँखों से तो नहीं ही गिरना चाहिए.! ”
जयशंकर प्रसाद
सदा दिवाली सन्त की ,बारह मास बसंत।
प्रेम रंग जिन पर चडे ,उनके रंग अनंत ।।
इस भरी गर्मी में कुछ तो सुकून आ जाये..!या तो तू आ जाये या मानसून आ जाये..!!
ज़मीर जिन्दा रखिये,खैरात में मिले पंखों से फ़तेह नहीं होती... !!