जीवन अपूर्ण लिए हुएपाता कभी खोता कभीआशा निराशा से घिराहँसता कभी रोता कभीगति-मति न हो अवरूद्धइसका ध्यान आठो याम हैचलना हमारा काम हैइस विशद विश्वप्रहार मेंकिसको नहीं बहना पडासुख-दुख हमारी ही तरहकिसको नहीं सहना पडाफिर व्यर्थ क्यों कहता फिरूँमुझपर विधाता...
मैं भाल-भाल पर कुंकुम बन लग जाऊंगा lमैं तलवारों से मेघ-मल्हार गवाऊंगा ll
पैसा बोलता है लेकिन अफ़सोस,
कोई इसका ग्रामर चेक नहीं करता.
दुनिया के साथ समस्या ये है कि बुद्धिमान लोग संदेह से भरे हैं जबकि मूर्ख आत्मविश्वास से!
काटकर गैरों की टाँगें ख़ुद लगा लेते हैं लोग
इस शहर में इस कदर भी कद बढ़ा लेते हैं लोग....!!
मैं कितना भी गैर जरूरी हो जाऊं तुम्हारे लिए मेरे आंसुओ का बोझ कम ना होगा, और रह लो तुम कितना भी मेरे बिना खुश, मेरी सिसकियों का कर्ज़ तुम्हारे ज़िन्दगी से कम ना होगा...!!
तुम्हारी आँखों ने बसाएं रखा है शहर कोई,कोई तन्हा हो सकता है, कानपुर से खफ़ा नहीं,
अजीब अदा है लोगों की ...
नजरें भी हम पर और नाराजगी भी हमीं से...!
कुछ भी मेरा नही मेरे पास,
ये बदुआये भी लोगों की दी हुई है..
ना जाने यह ज़िंदगी कैसे-कैसे इम्तिहान लेती है
फूलों के गुलदस्ते में छुपाकर खंजर जान लेती है
तबियत अपनी घबराती है जब सुनसान रातों मेंतो ऐसे में तेरी यादों की चादर तान लेते हैं
~फ़िराक़ गोरखपुरी
बालों के सफेद होने से लेकर चेहरे कि सिलवटें बनने तक,
तुम्हारा साथ चाहिए मेरी अर्थी के पास बैठकर रोने तक..!!
थोड़े बहुत संस्कार अब गांव में ही बचे हैं,
शहरों में लोग अंग प्रदर्शन को फैशन समझते हैं...
शब्दों का भी तापमान होता है साहब ,
ये सुकून देते हैं तो जला भी सकते हैं।।
भागते बचपन में भी थे भागते आज भी हैं , बस्ता वही है बस अंदर सामान बदल गया है !!
किसी के दुख पे अगर हम मलाल करते हैं ,
अजीब लोग हैं उल्टा सवाल करते हैं ।
🦋 देवदास 🦋
समय हर समय को बदल देता है...
बस समय को थोड़ा समय चाहिए..!!
राख बेशक हूँ मगर सुलगने की तमन्ना अभी भी है ,
जिसको जलना है वो हवा अभी भी दे सकता है ..!!
वक्त का तकाजा देखिए
महसूस कीजिए
हो रहा रदोबदल
कुछ अच्छे कुछ बुरे
महसूस तो कीजिए
दौर था सुनहरा
आपस की सहभागिता
एक दूजे का साथ
न जातीय विभेद
बदला बदला आबो हवा
बढ़ गई दूरियां
अलग थलग राग लिए
जातीय...
इंसान ही इंसान का रास्ता काटता है ,बिल्लियाँ तो बस यूँ ही बदनाम हैं ..!!