एक गुमनाम सा किरदार,
हमारा भी हैं कहीं,
जज्बात तो बहुत हैं,
मगर हक एक भी नहीं,
करना तो बहुत कुछ हैं किसी एक की खातिर,
मगर मन इसी कश्मकश में हैं कि उनके जीवन में,
हमारा कोई अस्तित्व भी तो नहीं कही ..
जिंदा इंसान को गिराने मे औरमरे हुए इंसान को उठाने मे,ग़ज़ब की एकता दिखाते हैं लोग…
मैं नहीं जानता मेरी लाश को गिद्ध नोचेंगे या दाह संस्कार होगा,
मगर ये जानता हूं मुझे पढ़ने के बाद मोहब्बत का तिरस्कार होगा
जो निशुल्क है वही सबसे ज़्यादा कीमती है,नींद शांति हवा और हमारी सांसें….
अकेलापन,लाख बेहतर है..!!मतलबी लोगों से….🖤
शुरुआत हो चुकी हैं
अब बादशाह के साथ बेगम भी नाचेंगी..!
जिस घर में बेटा नहीं होता उस घर में बेटी,
बेटा बन के मां बाप का ख्याल रखती है !!
समय सब कुछ बदल देता है..
जरूरत सिर्फ़ सब्र की है..!!
मेरी ज़िन्दगी में तेरा साथ कुछ इस तरह से हो,ताउम्र छेड़े तू अपनी अटखेलियों से और हया मेरे चेहरे पर हो..!!
अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं मुझ को,,
मैंने औरों से सुना है के परेशान हूँ मैं...!!
औरत के लिए कोई व्रत नहीं रखता,
फिर भी लंबी उम्र जी लेती है!!
प्रेम करती हैं राधा की तरह,
मीरा की तरह विष पी लेती है!!
मुझे डर नहीं हैं अब कुछ खोने का , मैंने जीते जी अपनी जिंदगी ही खो दी है...!
ए इश्क़ मुझे अब और जख्म चाहिए,
मेरी शायरी में अब वो बात नही….!!
कभी-कभी हमें उन लोगों से शिक्षा मिलती है,
जिन्हें हम अभिमान वश अज्ञानी समझते हैं।
लोकतंत्र का यही आधार
उपयोग किया मताधिकार
बीतने को पूरी रात पड़ी है और जीतने को कितने स्वप्न!
~ बाबुषा कोहली
पहाड़ तोड़ने का साहस तो हर इंसान में है, पर वो डरता है "कामयाबी" के पहले पागल घोषित किए जाने से।
वक़्त को समझना, समझदारी है,वक़्त पर समझना, जिम्मेदारी है…!!
गुरुर नही हम खुद पर नाज करते है,
जो जैसे मिलता है , हम वैसे बात करते है...!!
औरत बेवा हो जाती है
तो उसकी चूड़ियाँ तोड़ देते हैं
मर्द की घड़ी या ऐनक या हुक्का तोड़ने का
कभी किसी को ख़्याल न आया।