अभी गनीमत है सब्र मेरा,
अभी लबालब भरा नही हूँ
वो मुझको मुर्दा समझ रहा है,
उसे कहो...... मैं मरा नही हूँ!
पहले मन निकलता है सफर पर, तन बाद में.
मस्तमौला होकर जीना अपनी ज़िन्दगी,तुम परेशानियों से मत हारना,ज़िम्मेदारी कितनी भी परत चढ़ा दे सिलवटों की,कभी अपने बचपन को मत मारना..!!
जो खुद संभल कर चल नहीं सकते
ठोकर लगते ही
वो इल्जाम देते हैं पत्थर को
जब क्रूर समाज ममता को नारी की कमजोरी समझ बैठे,
तब उस ममता को शक्ति का नव रूप बनाना जरूरी है।
हँस के गुज़ार लेता हूँ मैं दिन अपना...
ख़ुद से तो मैं शाम के बाद मिलता हूँ..!!❤️🔥
एक गुमनाम सा किरदार,
हमारा भी हैं कहीं,
जज्बात तो बहुत हैं,
मगर हक एक भी नहीं,
करना तो बहुत कुछ हैं किसी एक की खातिर,
मगर मन इसी कश्मकश में हैं कि उनके जीवन में,
हमारा कोई अस्तित्व भी तो नहीं कही ..
ख़ुदा के हाथ में मत सौंप सारे कामों को
बदलते वक़्त पे कुछ अपना इख़्तियार भी रख
निदा फ़ाज़ली
उम्मीदों के जंजाल में उलझे हुए हैं,अपनी ही आंखों में खोए हुए हैं…
एक बार तुम्हारे भीतर का गुलाम गायब हो जाए,
तो तुम बादशाहों के भी बादशाह बन जाओगे
न तो ईश्वर है न आत्मा होती है,
पुनर्जन्म भी नहीं होता है,
जो है बस यही जिंदगी है।
गौतम बुद्ध
जितना बड़ा संघर्ष होगा, जीत उतनी ही शानदार होगी।
स्वामी विवेकानंद