जिन्हें पिता की नसीहतें और घर की मुसीबतें याद हैं, वे भूलकर भी गलत रास्ते नहीं जाते ।
प्रह्लाद पाठक
जान गया वो हमें दर्द में भी मुस्कुराने की आदत है,इसलिए वो रोज़ नया दुःख देता है मेरी ख़ुशी के लिए।
मैं उठता हूं कभी कलम रखता हूंइस तरह इश्क के जज्बातों पर सर रखता होगा खेल कोई इश्क तुम्हारे लिए यारोंमैं तो मरे जिस्मों में मोहब्बत की रूह रखता हूं
हर उस आँख में चुभना है मुझे,
जिसने मुझे देख कर नजरें फेरी थी कभी…!!
ख़ूबसूरत लोग हमेशा अच्छे नहीं होते, लेकिन अच्छे लोग हमेशा ख़ूबसूरत होते है।
शिकवे और शिकायतों में क्या रखा है!वक़्त ही कुछ ऐसा है कि….अपनों ने ही अपनों से दूरी बनाए रखा है।
चाय कड़क होती है,उनके नरम हाथों की .!!
अकेला चलना किसी के,
पीछा चलने से बेहतर है....
हालात बिगड़ने लगे तुम बिछड़ने लगे
हम दोनों को हालातो से लड़ना था,
तुम हमसे लड़ने लगे
आज फिर लौट आया बिना मांगें ,मैं तेरे दर से…!.तुझे बस देख लेता हूँ तो ख्वाहिशें ,खत्म हो जातीं हैं…!!
बुद्धिमत्ता की पुस्तक में..
ईमानदारी पहला अध्याय होता है..!!
घूम कर सारा जहां,
मेने खो दिया अपने आप को!
पता नहीं नसीब खराब है या मैं खराब हूं
हर उसने दिल दुखाया हैं जिसपे मुझे नाज था !!
दिल के रिश्ते तो किस्मत से मिलते हैं,वरना मुलाकात तो हजारों से होती है !!
पूर्ण है श्रीकृष्ण, परिपूर्ण है श्रीराधे,
आदि है श्रीकृष्ण, अनंत है श्रीराधे ।
इश्क है अगर तो शिकायत न कीजिए... और शिकवे हैं तो मोहब्बत ना कीजिए..!!
फॉर्मल कपड़ा अच्छा लगता है,रिश्ते नहीं।
यूँ तो अमरोहा से मेरा कोई नाता ना था
फिर कमबख्त नामुराद मोहब्बत हुई
और उसपर सितम तुझ बेवफा से हुई
और हम खुद बे खुद
जॉन ऐलिया के मुरीद हो गए
सबके अपने सत्य हैं,सबके अपने झूठ।कोई कहता लाभ इसे,तो किसी को लगती लूट।
जिसमें ‘मैं’ का फ़ायदा,‘मैं’ का है नुक़सान।‘मैं’ का बढ़ता मान देखकर,‘मैं’ की जलती जान॥ 💐
अपने आप में शांति पाने के लिए, तुम्हें विचारों के बंधनों से मुक्त होना होगा !