मेरे लफ्जों को थोड़ा ध्यान से पढ़ा करो मैंने सच में जिंदगी बर्बाद की है .....!!
मुझे लगता है कि ज्यादातर लोग अन्याय के बारे में तभी सोचते हैं जब उनके साथ गलत होता है।
चार्ल्स बुकोव्स्की
मां हमारी पहली गुरू जो दुनिया का सारा तजुर्बा दिया है
इसलिए मां का स्थान ईश्वर से भी ऊंचा माना जाता है...
खौलते इतिहास के पन्ने गवाह हैं,
स्त्रियों के नग्न बदन
और
राजा का अंधा होना
इत्तेफ़ाक़ नहीं!!
श्रुतिका साह
ज्यादा अच्छे मत बनो
अच्छे से इस्तेमाल कर लिए जाओगे !
रोजगार है तो सोमवार है वरना
सातों दिन रविवार है
मैं उठता हूं कभी कलम रखता हूंइस तरह इश्क के जज्बातों पर सर रखता होगा खेल कोई इश्क तुम्हारे लिए यारोंमैं तो मरे जिस्मों में मोहब्बत की रूह रखता हूं
शाम से आँख में नमी सी हैआज फिर आप की कमी सी है
~गुलज़ार
सिर्फ एक दिल ही है जो बिना,आराम किये सालों काम करता है,इसे हमेशा खुश रखिये ,चाहे ये आपका हो या आपके अपनों का !
काश तू चाॅंद , और मैं सितारा होता ,आसमान में , आशियां हमारा होता..!!
लोग तुम्हें दूर से देखते ,पास से देखने का हक , सिर्फ हमारा होता..!!
दर्द में मुस्कुराओ,
क्योंकि दर्द में लोग अक्सर मजाक उड़ाते हैं...!!
जाति सिर्फ दो ही है, स्त्री और पुरुष,
धर्म सिर्फ एक है इंसानियत बाकी सब पाखंड और धंधा है...
सोचा थाघरबना कर बैठूँगासुकून सेपर घर की ज़रूरतों नेमुसाफ़िर बना दिया
~ गुलज़ार
पता है मुझे ऐ ज़िन्दगी
कदम कदम पर
तू मुझे रुलायेगी
मगर याद रख
तेरे ज़ुल्मों सितम की उम्र है छोटी
मेरे होंठों की हंसी से
तू पल पल मात खायेंगी
मायूस भी नहीं है वो और खुश भी नहीं है, क्या बात है जो दिल को मजधार में ले आई.. रफ़्ता रफ़्ता खत्म हुए हम जो तेरे इश्क़ में अफसोस है कि मौत क्यों इक बार में न आई.. तुझे...
मुंह पर बोलूं तो खटकता हूं लोगो को,
चुप रहू तो अन्दर की बगावत मार देती है।
वाणी की मिठास अन्दर के भेद नहीं खोलती,
मोर को सुन कर कौन कह सकता है कि वह साँप खाता होगा।
अज्ञात
अभी भरा नहीं था गम पति के जाने का,
उससे पहले रिश्तेदारों ने बेघर कर दिया,
भरे नहीं थे घाव एक मां कि चूड़ी टूटने के,
बच्चा बड़ा होने से पहले उन्हें लावारिस कर दिया..!!
कही बैठ कर वो मेरा जिक्र कर रहा होगा..... ये हिचकी सुबह से यूँ ही तो नहीं आ रही है मुझे...!!
कुछ लोग ऐसे मिले जिंदगी मेंसाथ बैठकर हंस गए और पीठ पीछे डंस गए