घर बटा बर्तन बटे सारी ज़मीनें बाँट लीं
बाप के मरते ही बच्चों ने पतंगें छाँट लीं
इक तरीक़ा ये भी था फल बाँटते वो उम्र-भर
भाइयों ने पेड़ काटा और लकड़ी बाँट लीं
पैसा बोलता है लेकिन अफ़सोस,
कोई इसका ग्रामर चेक नहीं करता.
खुद को इतना भी कमजोर ना समझो कि
किसी ऐरे गेरे के एहसान की जरूरत हो..!!
सुंदरता का मोह त्याग चूके है हम ,
जिसे पसंद आना था आ चूके है हम...
कुछ लोग आपसे सिर्फ उतना ही प्यार करेंगे,
जितना वो आपको इस्तेमाल कर सकते हैं,
जहां लाभ मिलना बंद हो जाता है,
वहां उनकी वफादारी खत्म हो जाती है
जितनी शिद्दत से तुझे चाहा था
तूझे भूलने में उतनी ही ज़हमत उठानी पड़ रही है..
तुमने तोड़ा है इतने टुकड़ों में मुझे तुम क्या जानो खुद को समेटने में कितनी मशक्कत उठानी पड़ रही है..
ना रातों को चैन है ना दिन...
अहंकार भी आवश्यक है,जब बात अधिकार, चरित्र या सम्मान की हो...
हम पहुंचेंगे हर घर तक,
न्याय का हक़, मिलने तक!
गली, मोहल्ला, संसद तक
न्याय का हक़, मिलने तक!
सहो मत...डरो मत!
उनकी भी क्या इज्ज़त करना,
जिनकी हरकते कुत्तों जैसी हो।....
औरत बड़ी प्यारी चीज़ है रो लेगी,
मगर अपनी गलती कभी नहीं मानेगी...
कितना खूबसूरत वो रिस्ता होता है जिसमे साथी ,,, प्रेम करने के साथ साथ सम्मान करने वाला हो..
हालात बिगड़ने लगे तुम बिछड़ने लगे
हम दोनों को हालातो से लड़ना था,
तुम हमसे लड़ने लगे
अगर जिंदगी में खुश रहना चाहते होतो दूसरों के सुख और अपने दुखदेखना छोड़ दोजिंदगी में बहुत खुश रहोगे….
ईश्वर किसी का नहीं,
अपितु सर्वत्र ईश्वर का है !
जो मिला है वो आम हैजो ख़ास है वो काश में है….!!
अनुभव सच में एक बेहतरीन स्कूल हैं,
बस कम्बख़त फीस बहुत लेता हैं...
गलती हो या के न हो गर्दन झुका के देखो खामोश रह के अपना रिश्ता बचा के देखो अल्फाज़ खार भी हैं, तलवार भी, जखम भी अपनी ज़ुबान को पर मरहम बना के देखो
इस दौर में इज्जत दौलत पर निर्भर करती है ,
जो जितना अमीर होगा उसकी उतनी इज्जत होगी ...
कहते हैं जीते हैं उम्मीद पे लोग,हमको तो जीने की भी उम्मीद नहीं !
ये जीवन जिंदगी और मौत के….बीच का एक खूबसूरत सफर है…!!