कमाल-ए-ज़ब्त को ख़ुद भी तो आज़माऊँगी,
मैं अपने हाथ से उस की दुल्हन सजाऊँगी.....
न कर यूं बेवक्त बारिश हे भगवान
किसान के चेहरे की खुशी खेतों में पड़ी है।
तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है
मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है
कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूत जिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है।
इंसान को उसकी नासमझी कम
बल्कि ज़रूरत से ज़्यादा चालाकी ले डूबती है !!!
किसी को अपना बनाना हुनर ही सही
लेकिन किसी का बन के रहना कमाल है.
बलात्कार को 'पाशविक' कहा जाता है,
पर यह पशु की तौहीन है,
पशु बलात्कार नहीं करते,
सुअर तक नहीं करता, मगर आदमी करता है।
हरिशंकर परसाई
बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी...
प्यादो से बस्ती जलवाकर राजा मातम मनाते हैं,राजनीतिक लोग इसी चक्रव्यूह में शासन चलाते हैं।
स्त्री और मिस्त्री से,
टकराने का मतलब घर का नक्शा बिगाड़ना।
एक दुःख को कम करने में एक सुख नहीं लगताबल्कि एक दुःख दूसरा लगता है
चाहना आसान है,
चाहते रहना कठिन है...
आदमी जब थक जाता है
स्त्री को ढूँढता है
आदमी जब ऊब जाता है
स्त्री को ढूँढ़ता है
आदमी जब टूट जाता है
स्त्री को ढूँढता है
इसे दूसरे तरीक़े से कहें तो
थके,
टूटे,
ऊबे हुए आदमी को
सिर्फ़ स्त्रियाँ...
नींदें वापस कर दी हमने,,सुकून भरी रातों को।
किताबों के संग ' हर रात बितानी थी, आँखों को।।
सेजल
सन्नाटा इस कदर पसरा है जज़्बातों की मौत का,
अब तो तन्हाई भी मुझे सुनाई पड़ती है...!!
कपड़े और चेहरे अक्सर झूठ बोलते हैं,
इंसान की असलियत वक्त बताता है..
बहते पानी की तरह रहोगेतो कचरा ख़ुद किनारे हो जाएगा !
जिददी हूँ, गुस्से वाला हूँ, बतमीज़ हूँ, बेपरवाह हूँ,
लेकिन मैंने कभी किसी से रिश्ता मतलब के लिए नहीं रखा..!!
तमन्ना तुम्हें रंग लगाने की नहीं..
तुम्हारे रंग में रंग जाने की है..!!
❣️
मित्रता बड़ा अनमोल रतन
कब उसे तोल सकता है धन?
धरती की तो है क्या बिसात?
आ जाय अगर बैकुंठ हाथ
उसको भी न्योछावर कर दूँ,
कुरूपति के चरणों में धर दूँ।
सिर लिए स्कंध पर चलता हूँ,
उस दिन के लिए मचलता हूँ,
यदि चले वज्र दुर्योधन...