वक़्त चलता गया पानी के नज़ारों की तरह चाहे कितना किया कश्ती से किनारा हमने याद है शाम वो ठहरी तेरी पहली वो नज़र तब से खोई है हर इक साँस हमारी हमने
जिंदगी में विनम्र रहिए मगर,
अपनी कीमत से बेखबर नहीं।।
हो बस अगर तुम हमारे सनम ,हम तो सितारों पर रख दें कदम।
खलल पड़ता है मेरी नींद में मुर्शदजब कोई ख्याल मेरे ज़हन पर हावी होता है
काम पड़ सकता है,
आधे रिश्ते तो लोग इसी लिए निभा रहे हैं...
एक पल में ले गई मेरे सारे ग़म खरीद कर , कितनी अमीर होती है ये बोतल शराब की ..!!
बस लिबास ही महंगा हुआ है...
लोग अभी भी दो कौड़ी के हैं...!
वो ख़्वाब रात काचाय साँझ कीबारिश की बूंदें रूमानीवही समां पुरानाधड़कनों से बतियानाबदला नहीं है कुछ भीवही मिज़ाज़ आशिकानाचलो निभाते हैं हम तुमवही पुराना याराना लेकर चुस्कियाँ चाय कीकरेंगे गुफ्तगू शायराना
तूफ़ान तेज था
अचानक से आया
हवायें मज़बूत थी
तोड़ना मुश्किल था
मुझे अंदाज़ा था कि
आए बिना मानेगा नहीं
रास्ते बंद करती तो
तोड़फोड़ करता
फिर दो दरवाज़ों को खोल दिया
एक आने का
एक जाने का
और थोड़ा...
सिर्फ छू कर बहक जाने को नही...
उतर कर रूह में,
महक जाने को प्यार कहते है...
मेरी जिंदगी मै खुशियां तेरे बहाने से है, आधी तुझे सताने से है आधी तुझे मनाने से है।
गैरो की बातों पर इतना ऐतबार ना लाया कर, दिल की सुन कभी फ़िर दिमाग़ लगाया कर..
गुज़रो जो बाग़ से तो दुआ माँगते चलो
जिसमें खिले हैं फूल वो डाली हरी रहे
दुनिया बड़ी भुलक्कड़ है केवल उतना ही याद रखती है,
जितने से उसका स्वार्थ सधता है।
हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
जुल्म की छाती पर रख कर पांव हम लड़ते रहेंगे,
हक न्याय का मिलने तक हम लड़ते रहेंगे...
किसी की परवरिश पर उंगली उठाने से पहले स्वयं के संस्कारों का भी आंकलन कर लेना चाहिए...
रातों को जागो, दिनों को निचोड़ो
सपने होंगे पूरे, देखना न छोड़ो
तुम्हारा हर कहा सुना मैने…मेरा हर कहा तुम अनसुना कर गए…!!
आगे सिर्फ अंधेरा है,इसलिए इस बार अपना वोट सोच समझ कर दें !
अपने दर्द खुदा को बता दिया करो, फिर दर्द जाने दवा जाने और खुदा जाने...