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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते है,मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिन्दुस्तान कहते हैं, जो ये दीवार का सुराख है साज़िश है लोगों की,मगर हम इसको अपने घर का रोशनदान कहते हैं !

पुराने यार भी आपस में अब नहीं मिलते... न जाने कौन कहाँ दिल लगा के बैठ गया...

तबाह होकर भी तबाह नही दिखती...ये इश्क़ है इसकी कोई दवा नही बिकती...

इस दुनिया की सबसे लंबी यात्राएँ एक उदास मन से दूसरे उदास मन तक तय की गई हैं!

क्या उस गली में कभी तेरा जाना हुआजहाँ से ज़माने को गुज़रे ज़माना हुआमेरा समय तो वहीं पे है ठहरा हुआबताऊँ तुम्हें क्या मेरे साथ क्या-क्या हुआम्म हम्म, खामोशियाँ एक साज़ हैंतुम धुन कोई लाओ ज़रा….

अंध कक्ष में बैठ रचोगे ऊँचे मीठे गान या तलवार पकड़ जीतोगे बाहर का मैदान। रामधारी सिंह दिनकर

हसरतें दफन हैं मुझमे ख़ुद का ख़ुद मज़ार हूं मैं!!

किस्मत के सहारे मुझे ना छोड़ना मेरे "कान्हा,मुझे तेरी दया के सिवा किसी पर यकीन नही है.

समर्थन और विरोध केवल विचारों का होना चाहिये, किसी व्यक्ति विशेष का नहीं….!!

जाना किधर है आप को ये देख लीजिए मंज़िल किसी भी सम्त हो आसान तो नहीं

खलल पड़ता है मेरी नींद में मुर्शदजब कोई ख्याल मेरे ज़हन पर हावी होता है

आती है जब याद तेरी तोतेरी यादों में हम खो जाते हैंआजकल तुझे सोचते-सोचते ही,हम सो जाते हैं।

अगर तुम खुश हो,तो शोर मत मचाओ क्यूंकि, उदासियाँ कच्ची नींद सोती हैं....!

पुस्तकालय एक ऐसा वृक्ष है, जहाँ विचारों के फल हर मौसम में लगते हैं ।

उठते हुए तूफ़ान का मंज़र नहीं देखा देखो मुझे गर तुम ने समुंदर नहीं देखा

सोचो तो सिलवटों से भरी है तमाम रूह देखो तो इक शिकन भी नहीं है लिबास में

किरदार बह गया पानी में... हम तैरते ही रह गए कहानी में..!!

शिकवे और शिकायतों में क्या रखा है!वक़्त ही कुछ ऐसा है कि….अपनों ने ही अपनों से दूरी बनाए रखा है।

दो पल सुकून में खोके आते है फुरसत हो तो चलो "बनारस" होके आते है।

जो होने वाला है अब उस की फ़िक्र क्या कीजे जो हो चुका है उसी पर यक़ीं नहीं आता!


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