अपना ज़मीर जिंदा रखो,
ये पार्टीया तो आती जाती रहेंगी…
किस चीज़ का बनवाती हो लिबास तुम अपना ,
कपड़ा तो इस आग को छूकर जल जाता होगा..!
#वफा का समुन्दर कभी रूकता नहीं इश्क़ मे चला हैं वो कभी झुकता नही, मरहम धीरे से ही लगाना मेरे जख्मों पर, तूं ये ना समझ मेरा दिल दुखता नहीं...!!!
पहले परखते हैं किरदार फिर ऐतबार करते हैं,
हम उनमें से हैं जो सिर्फ सीरत से प्यार करते हैं..!!
जूते घिसकर बनाई गई पहचान और ,
जूते चाटकर बनाई गई पहचान मे फर्क होता है ...
अभी गनीमत है सब्र मेरा,
अभी लबालब भरा नही हूँ
वो मुझको मुर्दा समझ रहा है,
उसे कहो...... मैं मरा नही हूँ!
ज़िंदगी को जंगल केउस पेड़ की तरह बनाओ,जो हर परिस्थिति मेंमस्ती से झूमता रहे।
वक़्त ने फसाया है लेकिन मैं परेशान नहीं हूं,
हालातों से हार जाऊं मैं वो इंसान नहीं हूं !
जमीं से जुड़े लफ़्ज़ों में वोसमुंदर से गहरे सार लिखती है…
दिल में कैद लिए ख़ामोशीकलम से शोर बेशुमार लिखती है…
भूल चुके जिसे अपने सारेउन लम्हों को यादगार लिखती है…
तपती रेत को एक बंजारनभरे सावन सी बहार लिखती है…
जो मनुष्य अपनी निंदा सह लेता है,
उसने मानो सारे जगत पर विजय प्राप्त कर ली।
महर्षि वेदव्यास
गुज़रो जो बाग़ से तो दुआ माँगते चलो
जिसमें खिले हैं फूल वो डाली हरी रहे
मर्द पढ़ा तो ब्याह लाया अनपढ़ को भी ,औरत पढ़ी तो सैकड़ों पुरुषों को नापसंद किया।
~ अज्ञात
गम से खाली नहीं जिस्म का कोना कोई हम रहे न रहे हम पे मत रोना कोई..!!
किसी ने कहा तुम बहुत अच्छे हो
मैंने कहा यही तो बस खराबी है..
मोहब्बत रंग दे जाती है जब दिल दिल से मिलता हैमगर मुश्किल तो ये है दिल बड़ी मुश्किल से मिलता है
अब तो ख्वाबों में आना छोड़ दो ,
कौन सा अब तुम्हारे साथ हैं !
तेरे साथ भी बर्बाद थे ,
तेरे बाद भी बर्बाद हैं !!
आपके मानने या न मानने से
सच को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता
महरुमीयों की अपनी कोई इंतेहा नहीं ,कभी चेहरा नही, तो कभी आईना नही ।तुम जिस से कर रहे हो मेरे हक में बद्दुआ ,मेरा भी है खुदा, वो फकत तुम्हारा नही ।
मूर्खो से तारीफ सुनने से बेहतर है,
कि बुद्धिमान से तुम डांट सुन लेना..!!
ना होने का एहसास सबको है..
मौजूदगी की कदर किसी को नहीं..!!