World's Best Cow Hospital

मैं "हिंदी" का "आलिंगन" हूँवो "उर्दू" में "आग़ोश"उसको मेरे "बाजुओं" में सुकूँन है,मैं उसकी "बाहों" में मदहोश…

सबसे बड़ी ख़ुशी उसी काम को करने में है ,जिसे लोग कहते हैं कि ये तुम्हारे बस का नहीं है …

समझता है कि अपनी तेज बहती धार से या लहरों के वार सेडुबो देगा हमारे हौंसलों की कश्तियाँ तो ये फितूर है पानी का

किस्तों में बिखरीं हँसी देखी है हमनें ज़िंदा रह कर ख़ुदकुशी देखी है....!!

क्या इक स्त्री और पुरुष के आपसी मजबूत संबंधो मापदंड मूल स्तम्भ सिर्फ सम्भोग है,,,?क्या देह से देह का घर्षण ही उनका आख़री पड़ाव है,,,?

बातों की उम्र घट सी गई है,, कभी तुम नहीं मिलते,, कभी मैं खो जाती हूं,,

मैं केवल दो लोगों को ही सुंदर लगता हूं मम्मी को और कपड़ा बेचने वालों को

बुलंदियों का नशा हमने देख रखा है….बड़ा मुुश्किल है आसमां पे ज़मीर साथ रखना..!

परिवार और समाज दोनों ही बर्बाद होने लगते हैंजब समझदार मौन और नासमझ बोलने लगते हैं।

रेशम का जाल है, देखने में सुंदर, किंतु कितना जटिल मुंशी प्रेमचंद

वक्त भी कैसी पहेली दे गया उलझने सौ और जान अकेली दे गया

फ़िक्र उनकी करो.... जिनकी दुआओं में तुम्हारा ज़िक्र हो..!!

ज़ुल्म यह है कि जिंदगी लावारिस सी हो गई है ,, गुरुर यह है की ख्वाहिश से अब भी जिंदा है..!

स्त्रीतत्व को छूना भी एक कला है,स्त्री काया नहीं हृदय है..

मेरा दर्द भी इन मोतियों की तरह बिखरा पड़ा रहता हैं, धागे में पिरोने की कोशिश करूं तो धागे भी टूटने लगते हैं

कैसे करूँ मैं खुद को तेरे काबिल ऐ जिन्दगी , हम आदतें बदलते हैं, तो तू शर्तें बदल लेती है ..!!

लड़खड़ाये कदम तो गिरे उनकी बाँहों मे , आखिर हमारा पीना ही आज हमारे काम आया

सर जिनके सलामत हैं,वो शर्मिंदा तो होंगे, याद आएगा जब उनको कि दस्तार कहाँ है? ~ अभिषेक शुक्ला

जिनको हर मोड़ पे कोई मिल जाएउनको पुराने रास्ते क्या ही याद रहेंगे!!

दो रोटी के वास्ते, मरता था जो रोज । मरने पर उसके हुआ, देशी घी का भोज ॥


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