अकेला इंसान और वीरान मकान एक सा होता है
जहां वह स्वयं के प्रश्नों का स्वयं ही उत्तर होता है
राजेश गौरी
तू अच्छे कर्मों से एक अलग पहचान बन,तू पहले इंसान फिर हिन्दू मुसलामान बन.
भरोसा बहुत कीमती हैजिंदगी कम पड़ जाती है इसे कमाने में
कुछ अच्छे दोस्त भी बना लेना ज़िंदगी मे…महोब्बत हर वक्त साथ नही देती..!!
जहां बातें ही तीर सी हों,
वहा रिश्ते छलनी हो ही जाते हैं...
फस गया हूँ जिंदगी के कुरुक्षेत्र में अभिमन्यु की तरफ ,
बचाने कोई आने वाला नही और मैदान मैं छोड़ूंगा नही..
पहले तो मोहब्बत से नफरत थी, यहांअब तो दोस्ती से भी नफरत सी हो गईं.
" ऐब " भी बहुत है मुझमे , और " खूबियां " भी ,
ढूँढने वाले तू सोंच , तुझे क्या चाहिये मुझमे ..!!
यूं तो दिखावे के लिए लोग बहुत ही दिल से मिलते हैं पर जो दिल से मिलते हैं वो बड़ी मुश्किल से मिलते हैं !!!
हिम्मत इतनी रखो..
की किस्मत छोटी लगने लगे..!!
समझो जग को न निरा सपना
पथ आप प्रशस्त करो अपना
मैथिलीशरण गुप्त
तमाम उम्र रूटने मनाने
में गुजार दी,,,,
हमदर्द कहते है
जनाब गर जिंदगी में
लुफ्त चाहिए तों
इश्क कीजिये
जहाँ कर्म से भाग्य बदलते,
श्रम निष्ठा कल्याणी है।
त्याग और तप की गाथाएँ,
गाती कवि की वाणी है॥
ज्ञान जहाँ का गंगा जल सा,
निर्मल है अविराम है।
हर बाला देवी की प्रतिमा,
बच्चा-बच्चा राम है॥
किसी से आप जितनी शिद्दत से
मोहब्बत करते हो
वो आपकी भावनाओं की धज्जियां
उसी शिद्दत से उड़ाता है !
मैं निभाता रहा वफ़ा वो धूल झोंकती रही,
फना करके मेरी रूह मुझे दफन करती रही..!!
आज ये दिल बेवजह ही खुश हैं
लगता है एक नया दर्द मेरे इंतजार में हैं
जिसके लिए टूटो वह तुम्हें कभी संँभालने नहीं आता
चढ़ते हैं चढ़ाइयाँ बनाकर सीढ़ियाँ जिन काँधों पर,
फतह होते ही मंज़िल लतियाकर गिरा देते हैं लोग.
सच में अक्सर ऐसा होता
जब भी मेरे मन
और संघर्ष के बीच युद्ध होता है
सोचते अब लड़ के खड़ा हुए की
फिर लड़खड़ा के गिर ही जाते हैं
शायद यही असल ज़िंदगी का
यथार्थ मतलब है।
नेहा यादव
यूँ तो अमरोहा से मेरा कोई नाता ना था
फिर कमबख्त नामुराद मोहब्बत हुई
और उसपर सितम तुझ बेवफा से हुई
और हम खुद बे खुद
जॉन ऐलिया के मुरीद हो गए