✯||तारीफो में कमी नहीं होगी जानतुमने शायर को पटाया हैं किसी छपरीको नहीं…||✯
सजा मे तुम मिलोगे तो बोलो , गुनाह क़बूल कर लूँ ..!!
पिता की बनियान में बने झरोखे ,..संतान के उड़ान की मयस्सर खिड़कियां है !!
समझो जग को न निरा सपना
पथ आप प्रशस्त करो अपना
मैथिलीशरण गुप्त
किसी की गुलामी से लाख बेहतर हैं,
अपनी अपाहिज ज़िंदगी जीना...
कीतना बेबस हो जाता है इंसान जबवो किसी को खो भी नही सकताऔर उसका हो भी नही सकता
किसी ग़लतफ़हमी में मत रहना,
तुम्हारी कमी किसी को उदास,
रखेगी ये सोच कर वक़्त..
जायज़ मत करना !!!
आ तेरे संग एक पेंग बनायी जाये , ज़िन्दगी आ बैठ तुझे चाय पिलाई जाए...
मंज़िल चाहें जो भी हो मेरी, रास्ते आप ही से होकर गुजरते हैं..!!
सुनो साहिब,
तुम्हारे प्रेम के रंगों से
रंगीन हुआ मेरा बेरंग
उदास सूना जीवन।
जी नहीं सकती अब
कभी भी तुमसे दूर रह
मर जाऊंगी तुम्हारे बिन।
ख्वाहिश नहीं मुझे
ज्यादा चीजों की
सिर्फ़ चूड़ियां कभी
अपनी पसंद की
पहना देना,
पायल तो नहीं
पहनूंगी तुमसे
कदमों में अपने कभी
तुम्हें नहीं झुकाना।
ठहरी हुई ख़्वाहिशों की बंद किताब हूँ मैं..ज्यादा तो नहीं मगर खुद में ही, बेहिसाब हूँ मैं..!!
कुछ दिन खामोश रह कर देखो,
लोग सच में भूल जाते है ......!!
जान गया वो हमें दर्द में भी मुस्कुराने की आदत है,इसलिए वो रोज़ नया दुःख देता है मेरी ख़ुशी के लिए।
शायद तुम्हें कभी पता ना चले...
पर तुम्हारा ख़याल...
तुम्हारी परवाह...
मुझे अब भी है...
शाम को तेरा हस के मिलना..दिन भर की तनख्वाह है मेरी...!!
गोबर पर चांदी का वर्क लगाने से हलवा नहीं बनता!!
हंसकर जीना ही दस्तूर है जिंदगी का,एक यही किस्सा मशहूर है जिंदगी का...
ना भरने वाला उम्र भर को घाव हो गया।जिसके भी दिल में प्रेम का ठहराव हो गया।।
सफल रिश्तों के यही उसूल हैं,बातें भूलिए, जो फिजूल हैं…
शेरों के साथ संगत बनाइए..
कुत्तों के साथ बैठने से आप सिर्फ पीठ पीछे भोकना ही सीखेंगे..!!