हो बस अगर तुम हमारे सनम ,हम तो सितारों पर रख दें कदम।
मैं क्या बताऊँ कैसी परेशानियों में हूँ
काग़ज़ की एक नाव हूँ और पानियों में हूँ
भारत भूषण पन्त
कभी बच्चों सी झलकती हैं नादानियां मुझमें,
कभी इतना संभालता हूं की उम्र कांप जाती है..
थक गई हूँ जिम्मेदारियों से,,ज़िंदगी मुझे चंद पल तू सुक़ून के उधार दे..!!
मेरी मोहब्बत आधी ही रह गयी ,
पर उसका timepass पूरा हो गया
वक्त बेवक्त छोटी छोटी खुशियों के संग,कुछ आधी अधूरी ख्वाहिशें भी ज़रूरी हैं ।इन आधी - अधूरी हसरतों से ही तोहमारी जिंदगी की खुशियां होती पूरी है ||
इच्छाओं और उम्मीदों के इस सफ़र मेंसिर्फ़ एक दिन और रात की दूरी...
अब कोई मरहम काम नहीं करता उन ज़ख्मों पर, जो मुझे मेरी वफ़ा के बदले उससे इनाम में मिले थे..!!
जीवन में हमेशा इंतजार ही नही करना चाहिए,क्योंकि सही वक्त कभी नही आता,उसे लाना पड़ता है !
ना गिले ना शिकवे ना उम्मीद है किसी से, बड़े मतलबी जो निकले है सब इस दौर में..!!
किस तरह जमा कीजिए अब अपने आप को, काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के
दिल से दिल का फासला कुछ यूं हो जाए…
इधर मैं याद करू और उधर तुम्हे याद आए …
तुमसे मेरा प्रेम कुछ ऐसा रहेगा,दुनिया उदाहरण दे हमारा, वैसा रहेगा.
सकारात्मक कार्य करने के लिए हमें
एक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए।
जो आपके दिल के जितना ज्यादा करीब होगा..
वो ज़ख्म भी उतना गहरा देगा...
अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं मुझ को,,
मैंने औरों से सुना है के परेशान हूँ मैं...!!
असत्य है ईश्वर नहीं मारताउसकी निर्माण सत्ता का भवन नहीं बिखरता एक पिता की मृत्यु परथरथरा कर रेत साधड़ाम से गिर पड़ता हैईश्वरीय सत्ता का भवनऔरप्रत्येक मां की मृत्यु परसंतान दृष्टि मेंमर जाता है ईश्वरक्योंकि मां ही ईश्वर का प्रतिबिंब...
पढ़ाई चल रही है ज़िंदगी कीअभी उतरा नहीं है बस्ता हमारा !!
दर्द नहीं, "दवा" बनिये….!!आप बशर रहिए, ना खुदा बनिये..!!(बशर- इंसान)
जितनी शिद्दत से आप दुश्मनी निभाते हैं,
काश ! उतनी शिद्दत से दोस्ती भी निभाई होती...!
बादलों को गुरुर था कि वो उच्चाई पे है,जब बारिश हुई तो उसे ज़मीन की मिट्टी ही रास आयी।