इस दुनिया में अगर इरादे साफ़ है..
तो समझ लो की सभी खिलाफ है...!!
महरुमीयों की अपनी कोई इंतेहा नहीं ,कभी चेहरा नही, तो कभी आईना नही ।तुम जिस से कर रहे हो मेरे हक में बद्दुआ ,मेरा भी है खुदा, वो फकत तुम्हारा नही ।
गाँव को छोड़ के हम शहर कमाने आए
अब ये एहसास हुआ जान गँवाने आए!
तू जहां तक दिखाई देता है..
उसके आगे मैं देखता ही नहीं..
बरसती बारिशों से बस इतना ही कहना हैकी इस तरह का मौसम मेरे अंदर भी रहता है!!
मुकद्दर में लिखीकोई बात हो तुम,तकदीर की एकखुबसुरत सौगात हो तुम,करके प्यार तुम्हेंमहसूस किया जैसे,सदियों से यूं हीमेरे साथ हो तुम..!
किताबें हमें रोटी नहीं देतीं लेकिन यह बताती ज़रूर हैंकि हमारे हिस्से की…….रोटी कौन खा रहा है !!
तुम मेरी वो कमी हो,
जो कोई भी शख्स कभी पूरा नही कर सकता….!!
मेरे अधूरे किस्से का मुझे हिसाब चाहिए,मैं सही था या गलत मुझे जवाब चाहिए ।
मोहब्बत वो बेइंतहा करता है मुझसे सोकरता है ख़ुद बुराई , बता कर बुरा मुझे …
और ,फिर मेरा खुद को संभाल के संभल जाना ही इस आधी अधूरी प्रेम कहानी का अंत होगा।
तुम नहीं..
तुम्हारा बदला हुआ बर्ताव चुभता है..!!
अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥ ~कबीरदास
मेरी तड़प ना समझी मेरे जज़्बात समझती,गर प्यार ना दे सकी तो नफ़रत भी ना करती,और हर पल बिलखने के लिए छोड़ दिया मुझको,मुकम्मल मौत दे देती यूं अधमरा ना छोड़ती..!!
✯||ले आया झुमका भी तुम्हारे लिएअब पहन कर दिखाओ की कैसे हैं …||✯
जब क्रूर समाज ममता को नारी की कमजोरी समझ बैठे,
तब उस ममता को शक्ति का नव रूप बनाना जरूरी है।
किसी का मजाक और अपना पैसा
सोच समझकर ही उड़ाना चाहिए।
बहुत ज़्यादा फ़र्क पड़ने के बाद..
फ़िर कुछ ख़ास फ़र्क नहीं पड़ता..!!
रास्ते ख़ूबसूरत हो तो मंज़िल की परवाह क्यूँ करनादिल में अगर सुकून हो तोबेचैनियों की फ़िक्र क्यूँ करना
आज जिंदा है…कल गुजर जाएंगे,कौन जानता है कब बिछड़ जाएंगे,नाराज़ न होना मेरी शरारतों से ए मेरे दोस्तये वो पल है,… जो कल बहुत याद आएंगे।