प्यार, मुहब्बत, ख्याल, एहसास, रिश्ते-नातें, तालुक, वास्ते, सब झूठ, बकवास…अगर इनमें से किसी एक का भी वजूद होता तो, मेरे पास जरूर होता!
कितनी मासूम है एक तरफ़ा मोहब्बत वैसे खेलता रहता है ... मैदान में बच्चा तन्हा
प्रेम का अर्थ है अंत तक उन वादों को निभाना...
जो हमने अनुकूल परिस्थिति में किए थे
वो नहीं रुकीमैंने आंसू भी दांव पर लगा के देखे…!!
जुल्म इतना बुरा नहीं जितनी बुरी तुम्हारी ख़ामोशी है !जुल्म के खिलाफ बोलना सीखो !!वरना तुम्हारी पीढ़ियां गूंगी हो जाएंगी !!
!!कर्जदार रहेंगे हम उस हकीम के...
जिसने दवा में उसका दीदार कर दिया...!!
जज्बात में बहुत ताकत है ,
निर्माण की भी और विध्वंस की भी।
गुलाब देना आसान होता है,
मगर समय देना मुश्किल....
नूर दिखेगा नही चहरे पर
ना होगी चमक आंखों में
एक दफ़ा आईने में देखो खुद को
कितना फरेब छुपा है बातों में
कितना,और कितना बोलोगे झूठ ख़ुदसे...
हो ही नही सकता की खुशी मिलती हो खैरातो में
स्वीकारो तो...
मुश्किल तो बहुत होती होगी तुम्हे,
इतनी ठंड़ में अपने दो-दो चहरे धोते हुए..!!
बेटियां बहुत ही ख़ास होती हैं
परंतु फिर भी लोगों को बेटों की चाह रहती है !
पुरानी शाख से पूछो कि जीना कितना मुश्किल है..,
नए पत्ते तो बस अपनी अदाकारी में रहते हैं...!!!
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
रिश्ते ऐसे बनाओ कि जिसमें,
शब्द कम और समझ ज्यादा हो...
मन खराब हो तो भी शब्द
खराब नही बोलने चाहिए..!!
तेरे ना होने से बात कुछ यूँ बिगड़ गयी,आँखें सुखी ही नहीं और रातें गुजर गई।
मेरा मोहब्बत मेरा तजुर्बा हैअमीर होना और हसीन होनादोनो ही लाजिम है ,वरना आपकी मोहब्बतआपके मुंह पे मार दी जाएगी
एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमेंऔर हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं
~फ़िराक़ गोरखपुरी
परेशानी और दुख में अनुभव और सीख मिलती है,
वह सीख दुनिया का कोई भी स्कूल नहीं दे सकता...!!
"माँ थी अनपढ़
लेकिन उसके पास गीतों की कमी नहीं थी
कई बार नये गीत भी सुनाती
रही होगी एक अनाम ग्राम-कवि"
आलोक धनवा