कहानी लिखने वाला बड़ा नहीं होता, बड़ा वह है जिसने कहानी अपने जिस्म पर झेली है। ~ अमृता प्रीतम
खाली होना भी एक दुख हैजैसे जेब का खाली होंना,मन का खाली होंना,दिन का खाली होंना,जीवन का खाली होंना,किसी किताब के पन्ने का खाली होनाहालांकि सब अलग अलग रूप से असर करते हैं
मुफ्त में मिलती साँसें नहीं ,
मौत का भी यार दाम चुकाना पड़ता हैं ..
पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने हैजाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है
सजा मे तुम मिलोगे तो बोलो , गुनाह क़बूल कर लूँ ..!!
बेज्जती का जवाब इतनी इज्जत से दे,
कि सामने वाला खुद शर्मिंदा हो जाए....
मैंने उसको दिल दे दिया था,हालांकि जरूरत उसको दिमाग की थी.
शेर भी बंध जाते है भेड़ों से,
जब अपने मिल जाते है गैरौ से।
मै खुदकुशी से मर जाऊंगी,उससे कहना हादसे में जान गई.
माना के मां की गोद बहुत लाजवाब है एहसान पिता का भी कोई कम तो नहीं है...
सारे सफर मन ही मन इसी बात पे रोना,कि जहां से लौट रहे है, वहाँ हंसने गए थे.
मैं कोई रिश्ता नहीं हूं जो तुम निभाओगे मुझे ,
मैं मोहब्बत हूं बस मोहब्बत से ही पाओगे मुझे ..!!
गुरुर नही हम खुद पर नाज करते है,
जो जैसे मिलता है , हम वैसे बात करते है...!!
अच्छा इंसान जब बुरा बनता है,
तब बहुत बुरा बन जाता है....
देख सूरज तु हार जायेगा…,
माँ दुपट्टा भीगो के लाई है..!!!
अंत सभी का समान है,
हम जीते जी क्या करते हैं,
बस वही हमें अलग बनाता है
दिखा के मदभरी आंखें कहा ये साकी ने , हराम कहते हैं जिसको यह वो शराब नहीं
हर उस आँख में चुभना है मुझे,
जिसने मुझे देख कर नजरें फेरी थी कभी…!!
और फिर मैने उसे जाने दिया..... मैंने सदिया बिताई थी उसकी प्रतीक्षा मे... दिन को दोपहर, दोपहर को शाम , शाम को रात , रात को दिन होने में युग लग जाते हैं ये मैने सिर्फ जाना , नहीं जीया...
दवा की बोतलाे में प्यार भर के बेचो यार,
लोग बीमारी से नहीं तन्हाई से मारे जा रहे हैं...