सच्ची मोहब्बत हो जाए तोफिर जिस्म की बात नहीं होती….!!
धीरे-धीरे
हर चीज बेवकूफ लगेगी...
जन्म, प्रेम, जिंदगी
और
आखिरी बेवकूफ़ी मृत्यु।
सुसिल ग़ाफ़िल
इंतजार रहेगा जिंदगी के आखरी पन्नो कासुना है आखिर में सब ठीक हो जायेगा
शाम से आँख में नमी सी हैआज फिर आप की कमी सी है
~गुलज़ार
गिले शिकवे मिटा कर सोया करो मौत मुलाकात का मौका नहीं देती…
मरने वाला तो मर गया लौट कर नहीं आएगापर अपनी सोचो उसके चले जाने की टीस जीने नही देगी होगी घुटन पर कह नहीं पाओगे
लाख रोओगे पर उसे वापस...
बोलने में मर्यादा मत छोड़ना,
गालियाँ देना तो कायरों का काम हैं...
अंशुओ का शायद इसीलिए कोई रंग नहीं होता
क्योंकि जब ये आते है तब कोई संग नही होता
वो आईने में कैसे बर्दाश्त करता होगा खुद को
उसे तो धोकेबाज़ लोगो से सख्त नफरत थी..।।
बगैर मंजिल का प्रेम
लौटने का रास्ता भूल जाता है..
#वफा का समुन्दर कभी रूकता नहीं इश्क़ मे चला हैं वो कभी झुकता नही, मरहम धीरे से ही लगाना मेरे जख्मों पर, तूं ये ना समझ मेरा दिल दुखता नहीं...!!!
भिड़ते,टकराते,छील के निकलते हैं रिश्ते,
कितने चौराहों से गुजरते है रिश्ते,
ज़ख्म जिस्मो पर नजर आते है सारे,
कहने को रूह से उतरते है रिश्ते ..
बाद तुम्हारे सब अपनो के मन माने बर्ताव रहे
मुश्काने क्या आंसू क्या सालाना त्यौहार हुए
भावनाएं अच्छी रखिए अच्छे की,
संभावनाएं स्वतः बढ़ जाएंगी....
जीवन में ऐसे लोगों को चुने जो आपको,
मानसिक रूप से स्वस्थ रख सके।
हालात बिगड़ने लगे तुम बिछड़ने लगे
हम दोनों को हालातो से लड़ना था,
तुम हमसे लड़ने लगे
छुप छुप कर क्यूँ पढ़ते हो अलफाजों को मेरे,सीधे दिल ही पढ़ लो सांसों तक तुम ही हो..!!
मैं कितनी भी कोशिश कर लूअपनी शायरी में प्यार के रंग नहीं उड़ेल पाती
मेरेशब्दोंमें अक्सर जिक्र होता है
रुसवाई, बेवफाई,बेरुखी,बेचैनी,आँसूक्योंकि आज तकमुझे तुमसे यही सब मिला हैइश्क क्या होता है?कभी जान ही नहीं पाईजो तुमसे आजतक नही मिलाशायद वही इश्क था
जहाँ मेहनत की ऊँचाई ज्यादा होती है..
वहाँ किस्मत को भी झुकना पड़ता है..!!
गांव की मिट्टी में पले बढ़े है,हमें अदाएं कम मर्यादाएं ज्यादा पसन्द हैं।
जब किसान के बेटे कोगोबर में बदबू आने लग जाएतो समझ लो कि देश मे अकाल पड़ने वाला है।