तेरा ख़ामोशी पर फ़िदा तो हम हैं ही, कुछ कह दो तो शायद फ़ना हो जाएँ
ना कोई शिकवा ना कोई गम
जब जैसी दुनिया तब वैसे हम
जो वक्त नहीं दे सकता..
वो साथ कैसे देगा..!!
थोड़े बहुत संस्कार अब गांव में ही बचे हैं,
शहरों में लोग अंग प्रदर्शन को फैशन समझते हैं...
मेरा मोहब्बत मेरा तजुर्बा हैअमीर होना और हसीन होनादोनो ही लाजिम है ,वरना आपकी मोहब्बतआपके मुंह पे मार दी जाएगी
भस्म तेरा श्रृंगार प्रभु, तू मेरा पहला–आखिरी प्यार प्रभु,सबके लिए महादेव है तू…पर मेरे लिए संसार प्रभु.
चेहरे अजनबी हो जाये तो कोई बात नही !रवैये अजनबी हो जाये तो बडा दर्द होता है
वक़्त और समझ एक साथ खुशकिस्मत लोगों को मिलते हैं………
वक़्त पर अक्सर समझ नहीं होतीऔर समझ आने तक वक़्त नहीं मिलता..!!
आग का क्या हैं पल दो पल में लगती है
बुझाते बुझाते एक जमाना लगता है
कैसे करूँ मैं खुद को तेरे काबिल ऐ जिन्दगी ,
हम आदतें बदलते हैं, तो तू शर्तें बदल लेती है ..!!
कभी कभी ऐसा क्यों लगता है तू मेरा होकर भी जुदा सा क्यों लगता है ?माना तेरी भी कुछ मजबूरिया है पर ये तों बता ये जो तेरी हर आहट का इंतजार करता है ये शक्श आखिर तेरा क्या लगता...
दवा की बोतलाे में प्यार भर के बेचो यार,
लोग बीमारी से नहीं तन्हाई से मारे जा रहे हैं...
खामोशी जुर्म है इस दौर में बोलना सीखो..
वरना मिट जाओगे हालातों के तूफानों में..!!
इल्म किसी भी यूनिवर्सिटी से हासिल करलो,
पर तजुर्बा वक्त की ठोकरों से ही हांसिल होगा।
『 𝐙𝐞𝐡𝐚𝐫𝐥𝐢𝐧𝐞 』
किताब के पन्ने की तरह मोडे गए
फिर ना कभी खोले गए ना पढ़े गए
जिन्दगी में सबसे ज्यादा पीड़ादायक है, “मां” का जिंदगी में ना होना..!!
आँखों से निकले हर आँसू कोतलाश होती है अपनी एक मुस्कान की …
-मधुलिका
मैं वो दरिया हूँ की हर बूंद भँवर है जिसकी,तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा करके।
"CRUSH" तो दूर की बात है,
मुझ पर तो किसी को
तरस भी नहीं आता..,!!