निभा न सकेंगे एक भी दिन मेरा किरदार
मशवरें जो देते फिरते हैं हज़ार...!!
असत्य है ईश्वर नहीं मारताउसकी निर्माण सत्ता का भवन नहीं बिखरता एक पिता की मृत्यु परथरथरा कर रेत साधड़ाम से गिर पड़ता हैईश्वरीय सत्ता का भवनऔरप्रत्येक मां की मृत्यु परसंतान दृष्टि मेंमर जाता है ईश्वरक्योंकि मां ही ईश्वर का प्रतिबिंब...
विश्वास और अहंकार एक साथ नहीं रह सकते, जैसे जल और तेल एक साथ नहीं मिल सकते !!
बेशक उठाओ उंगली मेरे किरदार परमगर शर्त ये है कि उंगली बेदाग होनी चाहिए
वृंदावन की कूंज गली मेंमही बैचने में गईनंद जी के लाल मुझे सामने मिले जबमें तो शरमा गई रेकनैया तेरी मुरली बैरन भई
किसी के साथ किसी भी प्रतियोगिता की कोई ज़रूरत नहीं है। तुम जैसे हो अच्छे हो, अपने आप को स्वीकार करो।
आज की दुनिया का यही कायदा है,
उधर कदम जिधर फायदा है....!!
जो झूठ पर भी वाह करेगा,
वो ही तुम्हें तबाह करेगा.
कुछ लम्हे ऐसे होते हैं,जो उम्र भर की याद बन जाते हैं,वो पल, वो वक्त, वो एहसास,दिल के सबसे करीब आ जाते हैं।
इन्तज़ार मत करो
जो कहना है कह डालो
क्योंकि हो सकता है
फिर कहने का कोई अर्थ न रह जाय...!!
कुछ भी मेरा नहीं मेरे पास,
बद्दुआ भी लोगों की दी हुई है....
बुद्धि अगर स्वार्थ से मुक्त हो,
तो हमे उसकी प्रभुता मानने में कोई आपत्ति नहीं।
सुविधाएं अगर हमारी आजादी को गिरवी रख लें,
तो उन सुविधाओं का सुख सहूलियत मात्र नहीं होता,
गुलामी में बदल जाता है।
चित्रा मुग्दल
मेरी तड़प ना समझी मेरे जज़्बात समझती,गर प्यार ना दे सकी तो नफ़रत भी ना करती,और हर पल बिलखने के लिए छोड़ दिया मुझको,मुकम्मल मौत दे देती यूं अधमरा ना छोड़ती..!!
इतना अजीब शख़्स हूँ कि मेरे साथ रहकरबिगड़े हुए सुधर गए सुधरे हुए बिगड़ गए
अनुभव उम्र से नहीं..
परिस्थितियों का सामना करने से आता है..!!
दुनियां एक खतरनाक जगह है,
बुराई करने वालों से नहीं बल्कि उन लोगों की वजह से
जो देखते हैं और कुछ नहीं करते!!
कभी-कभी हमें उन लोगों से शिक्षा मिलती है,
जिन्हें हम अभिमान वश अज्ञानी समझते हैं।
ये सोचना ग़लत है के’ तुम पर नज़र नहीं,मसरूफ़ हम बहुत हैं, मगर बे-ख़बर नहीं
हम आपके इशारे पे घर-बार छोड़ दें ?दीवाने हैं ज़रूर ! मगर इस क़दर नहीं !!
~ आलोक श्रीवास्तव
बरसात गिरी और कानों में इतना कह गई,
गर्मी किसी की भी हो हमेशा नहीं रहती..