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दर्द छुपाते छुपाते,दर्द में जीने की आदत हो गई।

बढ़ रहा है ज़िंदगी का कैनवस हर दिन मगर रंग गहरा अब नहीं दिखता किसी तस्वीर में राघवेंद्र द्विवेदी

रात भर ज़हर बनाता है।सुबह से फैलाता है

कुछ लोग ऐसे मिले जिंदगी मेंसाथ बैठकर हंस गए और पीठ पीछे डंस गए

संघर्षों की समर भूमि में, हमसे पूछो हम कैसे हैं, कालचक्र के चक्रव्यूह में, हम भी अभिमन्यु जैसे हैं। हरिओम पंवार

बेहिसाब झूठ कहा तो खुदा मान बैठे, जरा सा सच बोल दिया बुरा मान बैठे!

मेरे लिखे शब्दो का हूबहू अर्थ हो तुम,खुद को तेरा न कहुँ तो मुझ बिन व्यर्थ हो तुम।

बेवजह बेमतलब की ही ये सारी तकरार हैकिनारे लड़ रहे हैं सब, जाना दरिया पार है।

उनकी एक झलक पे ठहर जाती है नजर मेरी कोई हमसे पूछे हमसफर दीवानगी क्या होती है..!!❤️

हम खाली किताब थे... लोग आते गए सबक छपता गया..!!

बारात में #नोटों की गड्डी उड़ाने वाले #लोग #पूजा की #आरती के लिए खुल्ले #पैसे ढूंढते हैं अभी हमे बहुत बदलना है

हम बने ही थे तबाह होने के लिए तेरा मिलना तो बस एक बहाना था

लाख समझाया था उसको की दुनिया विश्वास के लायक नही हैफिर भी उसने मुझे छोड़ थामा किसी गैर कोअब वो खाए लाख ठोकरें मुझे उसका हाथ थामना ही नहीं हैजेहन में रहेगा ताउम्र वो हां ज़िंदगी में अब मुझे उसको...

मेरी हर गुफ्तगू जमीन से रही, यूँ तो फुर्सत में आसमान भी था...

इंसानों की इस दुनिया में बस यही तो एक रोना है,,अपना दिल दिल होता है,दूजे का खिलौना है..!!

कदर कर लिया करो कुछ लोग बार-बार नहीं मिलते मेरे जैसे तो बिल्कुल भी नहीं मिलते...

हकीकत से सामना हुआ तो पता चला.. लोग तो सिर्फ़ बातों से अपने थे..!!

तुम किताबों के सामने झुक जाओ , ये तुम्हारे सामने दुनिया झुका देगी ..!! डॉ. भीमराव आंबेडकर

ज़्यादा प्रशंसा करने वालों से खुश नहीं , सावधान रहने की ज़रूरत है ...

वो ख़्वाब रात काचाय साँझ कीबारिश की बूंदें रूमानीवही समां पुरानाधड़कनों से बतियानाबदला नहीं है कुछ भीवही मिज़ाज़ आशिकानाचलो निभाते हैं हम तुमवही पुराना याराना लेकर चुस्कियाँ चाय कीकरेंगे गुफ्तगू शायराना


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