खुश रहने के लिये जिंदगी में खुद के स्थिति क्षमता देख कर ही फैसले लेने चाहियेलोगों को खुश करने या दिखाने के लिये गये फैसले हमेशा दुख के कारण बनते हैं
एक ही नदी के है यह दो किनारे दोस्तोदोस्ताना ज़िन्दगी से, मौत से यारी रखो।
संघर्ष प्रकृति का निमंत्रण है,
जो स्वीकार करता है वही आगे बढता है....
किताबें इस लिए पढ़ो ताकि आप ,लोगों से बहस नहीं तर्क कर सको …
अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए,
हिम्मत और ज़मीर का ज़िंदा होना चाहिय...
सम्पूर्ण ब्राम्हाण्ड में जितना कोई और आपके प्रेम और स्नेह के लायक है उतना आप खुद भी है।
चलो कल्पनवाओं का सैर करे
दुनियां के भीड़ से पार चले
उन्मुक्त भाव उड़ने के चाह भरे
मन के उम्मीदें पे पंख जड़े
होले होले दुनियां से पार चले
जन्नत के चौखट पे पग रखे
अलग ही जहां का दीदार करे
होगी अनुभूति जो ख्याल करे
चांद...
हुए बदनाम मगर फिर भी न सुधर पाए हम , फिर वही शायरी फिर वही इश्क फिर वही तुम ..!!
वास्ता पड़ता है तो नस्लो का पता चलता हैं,
बातों से तो हर कोई खानदानी लगता हैं...
अहमियत यहां हैसियत को मिलती है
और हम जज़्बात लिए घूम रहे हैं!
भारत कृषि प्रधान देश था अब कुर्सी प्रधान देश है !!!
मानता हूँ कि मैं बुरा हूं बहुत,
जो हो अच्छा वो सामने आए-?
हमे देखो हमारे पास बैठो हमसे कुछ सीखो ,
हमने प्यार मांगा था हमने दाग़ पाए हैं...
खाने और सोने का नाम जीवन नहीं है।
जीवन नाम है सदैव आगे बढ़ते रहने की लगन का।
मुंशी प्रेमचंद
अगर तुमअपनी सांसों को रोक सकोतभी किसी को रोकना,अगर तुमअपनी धड़कनों को रोक सकोतभी किसी को रोकना,अगर तुमअपने छूटते प्राण को रोक सकोतभी किसी को रोकना,अन्यथाजाने दो जिसे जाना है,
मत करो विलाप किसी के जाने का
~ अम्बष्ठ
शिक्षा कहीं से भी प्राप्त कर सकते हैं ,
लेकिन संस्कार हमेशा घर से मिलते हैं !!
नौकरी के साथ सबसे बड़ी चुनौती यह है,कि यह अमीर बनने के मार्ग को रोकती है..!!
सावन का महीना है तू घर से निकली भी नहीं
माना कि खूबसूरत है तू, मगर इतनी भी नहीं।
~सौरभ
गुस्से में केवल मेरे शब्द बदलते हैं
तुम्हारे लिए मेरा प्यार नहीं जान...
दुख, फरेब, गरीबी और बदनसीबी को मापना सिखाता हूं,
अपनी कलम कि धार से, मैं समाज को आईना दिखाता हूं..