पहाड़ तोड़ने का साहस तो हर इंसान में है,
पर वो डरता है "कामयाबी" के पहले
पागल घोषित किए जाने से।
हम वहाँ हैं जहाँ से हम को भी
कुछ हमारी ख़बर नहीं आती ।
मुहब्बत की निशानी ख़ाक करके,
ज़ख्म छुवन के कहानी कह रहे।
गलियों में छिपकर बहा करती थी,
समंदर में मौज ए रवानी कह रहे।
भरता नही ज़ख्म अगर नासूर बन जाये ॥
जिसे अपना समझो वही जब दूर हो जाये ॥
पानी की बूंद जब
समुन्दर में होती है
तब उसका कोई
अस्तित्व नहीं होता,
लेकिन जब वो बूँद
पत्ते पर होती है तो
मोती की तरह चमकती है।
आपको भी जीवन में
ऐसा ही मुकाम हासिल करना है।
हमेशा मोती की तरह चमको...