खुद मे झाकने के लिए ज़िगरा चाहिए,,,
दुसरो की शीनाखत् मे हर शख्स माहिर है,,,
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अपनी ज़िंदगी में खुद रोशनियां पैदा करो,यकीन
जानो तुम्हारे अलावा तुम्हारा कोई भी वफादार नही है ...
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रूठी हुई ख़ामोशी से 
बोलती हुई शिकायतें अच्छी होती हैं
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जिसकी मति और गति सत्य की हो,
उसका रथ आज भी श्री कृष्ण चलाते हैं
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सब नज़र का फेर है 
रावण की नज़र हो तो,
राम भी गलत दिखेंगे.
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एक छींक की तरह
आ जाएगी मृत्यु
जेब में
रूमाल तक नहीं होगा...
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एक घुटन सी हो रही थी मुझे संपूर्ण रात्रि ,
घबराहट सी हो रही थी अपने ही अंधेरे कमरे में....
भोर की सुनहरी रौशनी आई एक हल्की दस्तक लिए ,
उदासी तमाम मेरे कमरे के दरवाज़े से फ़ौरन ही विदा हो कर नई ताज़गी भर गई ।।
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लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में
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क्रोध से शुरू होने वाली हर बात,
लज्जा पर समाप्त होती है
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दिल का मामला है तो,
दर्द से बनाकर रखिएगा हुज़ूर!

किसी-न-किसी मोड़ पर,
ठोकर ये खाएगा ज़रूर !
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