तुम्हारे साथ बिताए हुए वो कुछ लम्हें दोस्त ...
उम्र भर की मेरी आवारगी पे भारी हैं...
दूरियां बढ़ाता दौलत का घमंड भी एक दिन खाक हो जाएगा,
ये रूह भी साथ छोड़ देगी, जिस दिन जिस्म राख हो जाएगा..!!
अपनी बेटी को ज्ञान देकर अच्छे और बुरे का,
उसे इस गंदे समाज का आईना दिखाता है,
एक पिता ही है जो मजबूती से हांथ पकड़कर,
उसे कदम से कदम मिलाकर चलना सिखाता है..
बेहद ना हो तो चाहत कैसी
जान पर ना बन आए तो मोहब्बत कैसी...!!
ज़िंदगी उस रेल के सफ़र की तरह है बाबू मोशाय,
जिसमें "लोअर बर्थ" माया और "उपर बर्थ" मोक्ष है..