अपनी बेटी को ज्ञान देकर अच्छे और बुरे का, उसे इस गंदे समाज का आईना दिखाता है, एक पिता ही है जो मजबूती से हांथ पकड़कर, उसे कदम से कदम मिलाकर चलना सिखाता है..

बेहद ना हो तो चाहत कैसी जान पर ना बन आए तो मोहब्बत कैसी...!!

ज़िंदगी उस रेल के सफ़र की तरह है बाबू मोशाय, जिसमें "लोअर बर्थ" माया और "उपर बर्थ" मोक्ष है..

कभी कभी जहर भरी जिंदगी में, अमृत का काम करता है एक बूंद इश्क़ !

पानी से पानी मिले, मिले कीच से कीच, ज्ञानी से ज्ञानी मिले, मिले नीच से नीच ‌‌

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