इस दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं ,
हम वो सब कर सकते हैं जो हम सोच सकते हैं !
ना में बदला
ना मेरा किरदार बदला
ना अंदाज बदला
ना मिजाज बदला,,,,
चन्द सिक्के ही तो
कम हुवे थे जेब मे
दुनिया के देखने का
सलीका बदल गया
न हम-सफर न किसी हम नशीं से निकलेगा,हमारे पाँव का काँटा है हमीं से निकलेगा !
बरसी हैं घटाएं आज फिर अंगड़ाइयां लेकर ,
नया सावन तो आया है मगर तन्हाईयां लेकर ..!!
मुझसे जो तुम मेरा हाल पूछते हो,
बहुत मुश्किल सवाल पूछते हो....
तूने उस मोड़ पर तन्हा कियाजहाँ लगता थातू है तो मुझे फिर और क्या चाहिए…..
दिल पर तो बहुत ज़ख़्म ज़माने के लगे हैंख़ुद-दारी से लेकिन कभी रोया नहीं जाता
पहरे मिरे होंटों पे लगा रक्खे हैं उस नेचाहूँ मैं गिला करना तो बोला नहीं जाता
~ अज़हर नय्यर
शादीशुदा मर्द की इज्जत,
औरत की वफादारी पर टिकी होती है।
सिर्फ मेरा दिल ही जानता है कि
ये तुम्हें खोने से कितना डरता है
पवित्र महीना सावन का है,
भोले तू मुझको भी पवित्र कर दे,
महका सकूं अपने कर्मों से,
सबको तू मुझको ऐसा इत्र कर दे..!!
पैसा इंसान के असली रूप को बाहर लता है.
लिया नहीं दरियाओं का एहसान क़भी,मैं कुआं खोद के पानी पीता आया हूँ।
ये दुनिया कांटों जंगल है
नफ़रत की आग दिलों में दहकती है
एक तू ही मेरे इश्क किताब
जहां तूं बसंती फूलों सी महकती है
हाथ खाली हैं तेरे शहर से जाते जाते,जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते,अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है,उम्र गुजरी है तेरे शहर में आते जाते !
अब तो हमारे जिक़्र पर न मोड़िए गा मुंहअब तो हमारे शेर भी मशहूर होने लगें है
बहुत अच्छे होकर भी आप हर किसी के लिए अच्छे नहीं हो सकते , कहीं बुरे बना दिए जाते हैं तो कहीं बुरे साबित कर दिए जाते हैं …
ना हक़ दो इतना कि तकलीफ़ हो तुम्हें,
ना दो वक्त इतना कि गुरुर हो उन्हें.....
ये जिस जगह तूने मुझे लाकर छोड़ा हैतमाम उम्र मेरी लौटने में गुजर जायेगी..
जब हम निकलते है अपने तेवर में,तब दुश्मन भी बोल उठते हैं अपने फेवर में !
अगर दिशा दिखाने वाला सही हो तो,
दीपक का प्रकाश भी सूर्य का कार्य करता है...