हर तरफ़ ज़ीस्त की राहों में कड़ी धूप है दोस्तबस तेरी याद के साये हैं पनाहों की तरह
गुजरता है मेरा हर दिन, मगर पूरा नही होता,
मैं चलता जा रहा हूं, और सफर पूरा नही होता…!
तर्क किये बिना किसी भी बात को आँख मूंदकर मान लेना भी एक प्रकार की गुलामी है
भगत सिंह
ना जाने यह ज़िंदगी कैसे-कैसे इम्तिहान लेती है
फूलों के गुलदस्ते में छुपाकर खंजर जान लेती है
गलतफहमियां तो होंगी रिश्ते में,
तुम संभाल लोगे ना..
यूं तो वक्त मिलेगा नहीं कभी,
पर तुम निकाल लोगे ना..!!
अगर हमे छोड़कर वो खुश है,
तो शिकायत कैसी,
अब हम उन्हें खुशी भी न दे,
तो महोब्बत कैसी...
जहाँ कर्म से भाग्य बदलते,
श्रम निष्ठा कल्याणी है।
त्याग और तप की गाथाएँ,
गाती कवि की वाणी है॥
ज्ञान जहाँ का गंगा जल सा,
निर्मल है अविराम है।
हर बाला देवी की प्रतिमा,
बच्चा-बच्चा राम है॥
कुछ लोग ऐसे मिले जिंदगी मेंसाथ बैठकर हंस गए और पीठ पीछे डंस गए
संबंध बनाना,ऋण लेने जैसा आसान है.!किन्तु संबंध निभानाकिश्तें भरने जैसा कठिन है..!!
बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी...
किस चीज़ का बनवाती हो लिबास तुम अपना ,
कपड़ा तो इस आग को छूकर जल जाता होगा..!
ये जो तुम लोग बिना बॉयफ्रेंड बाली लड़की ढूंढ रहे हो न ...? शास्त्रों में इसे पत्थर में से तेल निकालना कहा गया हैं
सिर्फ हम ही हैं तेरे दिल में ,
बस यही गलतफहमी हमें बर्बाद कर गई ..!!
अहंकार की...सबसे बड़ी खराबी यही है कि...यह कभी भी इन्सान को..महसूस नहीं होने देता कि... वह गलत है...
हवाएँ ज़ोर कितना ही लगाएँ आँधियाँ बन कर
मगर जो घिर के आता है वो बादल छा ही जाता है
यादों से न पूछें तरबियत उनकीये वो आजाद परिंदे हैं जो पल में सागर पार कर लेते हैं
तुमने ही बदल दिए सिलसिले वफाओं के…वरना हमें तो आज भी तुम से अज़ीज़ कोई नही..!!
अपने मन और आत्मा से कर्म करें,
और प्रेम करें तो जीवन आनंदित हो जाएगा !
वह जवाब मायने खो देते हैं, जो वक्त पर नही मिलते ...
अल़फाज सुनने वाले हजारों लोग है मगर
खामोशी सुनने वाला सिर्फ मेरा अल्लाह है...