दिल्ली में थूका, चाटा,गधे को बनाया बाप
नाम तो लिया नहीं फिर कैसे समझे आप ?
जोगीरा सारा रारा...
शादी विवाह में जिनको ग़रीब समझकर बुलाया नहीं जाता है,
वही लोग अक़्सर अंतिम यात्रा में सबसे पहले पहुंचते हैं।
पुरुषों ने प्यार में ताजमहल बनवाया,
नस काटी,पहाड़ तोड़े...स्त्रियों ने क्या किया
आपके अल्फाज आपकी परवरिश,
का बेहतरीन सुबूत देते हैं....
कर्म से डरिये…..ईश्वर से नहीं…..ईश्वर माफ़ कर देता है…..कर्म नहीं ….. !!!
नसीब में कुछ रिश्ते अधूरे ही लिखे होते हैं..
लेकिन उनकी यादें बहुत खूबसूरत होती हैं..!!
अनुभव से ही सत्य का पता चलता है, न कि विचार से !
चश्मदीद अन्धा बना, बहरा सुने दलील
झूठों का है दबदबा, सच्चे हुये ज़लील
हम जो आपसे मिले है इत्तेफाक थोड़ी है,
मिल कर तुमको छोड़ दे मज़ाक थोड़ी है।
लोग पराए की तलाश में,
अपने खो देते हैं...
ख़ुद को ख़ुद से आज़ाद किया, जा, तुझको हमने माफ़ किया !
मुहब्बत की निशानी ख़ाक करके,
ज़ख्म छुवन के कहानी कह रहे।
गलियों में छिपकर बहा करती थी,
समंदर में मौज ए रवानी कह रहे।
तुम मिल सको तो मिल लेना,
कुछ कह सको तो कह लेना...
मैं जी नहीं पाया जुदा होकर तुमसे,
तुम जी सको तो जी लेना...
मान ही लो अब जो भी कुछ है सच्चा झूठा सा,
कब तलक करते रहें दिल की वक़ालत हम ?
मेरे दिल को चकनाचूर करके,
उसने मेरे भरोसे को तोड़ा था,
दुनिया समझ बैठा था जिसे अपनी,
उसने ही अकेला छोड़ा था.
तुम्हें लिखा जाना चाहिए था कविताओं की तरह
तुम्हें भुला गया हैं पुराने किस्सों की तरह,
तुम्हें तो पूरा हो जाना चाहिए था
तुम्हें तो खुदा से मांगा गया था दुवाओं की तरह!
उन अक्लमंदो से दूरी अच्छी है,
जो हमें बेवकूफ समझते हैं...
किसी से हमेशा दिल से जुड़ें,
मतलब से कभी नहीं....
ख़ुद से ही भाग रही हूँ
क्या ढूँढ रही हूँ मालूम नहीं
क्या पाना है जानती नहीं
भटक रही हूँ एक न ख़त्म होने वाले सफ़र में
चल रही हूँ इन काँटों से भरे रास्तों पे
न कोई ख़ुशी है...
इंसान की ये आदत है ना मिले तो सब्र नही करता
और मिल जाये तो कद्र नही करता..