कुछ भी मेरा नही मेरे पास,
ये बदुआये भी लोगों की दी हुई है..
अकेले चलना सीखो क्योकि सहारा कितना भी सच्चा हो, एक दिन औकात दिखा ही देता है...
"सहनशील होना अच्छी बात है,परन्तु अन्याय का विरोध करनाउससे भी उत्तम है।"
-जयशंकर प्रसाद
हार और जीत का कोई अर्थ नहीं होता
जो हौंसला न हारे ,वो जज़्बा व्यर्थ नहीं होता
रात दिन जो सिर्फ फ़तेह के गीत गाते है
जो, लड़ते रहते हैं वो इक दिन जीत जाते हैं
पहले निचोड़ लेते हैं जिस्म अपनी आंखों से, फिर दुपट्टा संभालने कि हिदायत देते हैं..!!
दिल तुझे नाज था जिस शख्स पर दिलदारी पर..देख अब वो भी उतर आया अदाकारी पर..
जागना भी कबूल है तेरी यादों में रात भर तेरे एहसासों में जो मजा है वो नींद में कहा!!
सुध बुध खो कर
सौंप दिया तुझको
मुझमें जो भी था मेरा
चाहे तो रख लो सहेज कर
चाहे तो छोड़ दो तजकर
हम तो समझे थे कि इक ज़ख़्म है भर जाएगा
क्या ख़बर थी कि रग-ए-जाँ में उतर जाएगा
मैं केवल दो लोगों को ही सुंदर लगता हूं
मम्मी को और कपड़ा बेचने वालों को
सब कुछ चुराया जा सकता है।
पर दुनिया में कोई किसीका इरादा नहीं चुरा सकता।
सोच रहा हूँ बंद करदु ये शाएरी का सफर
बस तेरी लाल लिपिस्टिक पर पूरी ग़ज़ल लिखदूँ...
गलती कीमाफी ना मांगीमाफी से मुक्ति मिल जाए तोबंधे रहना मुझेबुरी सी याद बनकरकुछ तो पाप धूल जायेंगेबद्दुआओं से…
ना हक़ दो इतना कि तकलीफ़ हो तुम्हें,
ना दो वक्त इतना कि गुरुर हो उन्हें.....
किस्मत के सहारे मुझे ना छोड़ना मेरे "कान्हा,मुझे तेरी दया के सिवा किसी पर यकीन नही है.