कैसे करूँ मैं खुद को तेरे काबिल ऐ जिन्दगी ,
हम आदतें बदलते हैं, तो तू शर्तें बदल लेती है ..!!
रुतबा रोब का होना चाहिए,
अकड़ तो कुत्ते की पूंछ में भी होती हैं…
जो नज़र से उतरते हैं
वो दिल से भी उतर ही जाते ही हैं..!!
तुम्हारी शोहरतों पर दाद देता होगा जमाना...मेरे चाहने वाले तो मेरी बदनामियों पर फिदा हैं
बेटियाँ जो सिर्फ़ बेटियाँ होती हैं
माँ की अनुपस्थिति में माँ
पिता की ग़ैरमौजूदगी में पिता।
सुख को तब तक महसूस नहीं कर सकते,जब तक दुख का अनुभव नहीं होता…
मुझे अकेले चलेने में बहुत मज्जा आता है,
क्योंकि ना कोई आगे चलता है और ना कोई पीछे छूटता है…
खरीद लूं खुशियां सारी ऐसी इच्छाएं पलती हैं,
ना ख्वाब पूरे होते हैं ना ही तक़दीर बदलती है..!!
तेरी आँखें नीले आसमान को लज्जित कर देती हैं,
तेरा मुस्काना फूलों को भी फीका कर देता है।
तेरे बालों की लहरों में, समंदर भी खो जाएगा,
तेरी आवाज़ से बुलबुल की चहचहाहट फीकी पड़ जाएगी।
तू है अपनी खूबसूरती में बेमिसाल।
तुझमें सारी सुंदरता...
तेरे ख्यालने किसी काहोने ना दिया ,,,,,
और खुशी इसबात की है कितूने खुश कभीरहने ना दिया ,,,,,,
सुनो प्रिय,
आप पुष्प नहीं पुस्तकें लाना मेरे लिए !!
खुद की पहचान बनाने में जोमजा़ है, वह किसी की परछाईबनने में नहीं।
रास्ते ख़ूबसूरत हो तो मंज़िल की परवाह क्यूँ करनादिल में अगर सुकून हो तोबेचैनियों की फ़िक्र क्यूँ करना
मैं जो कहता था बदलूंगा नहीं कभी खुद कोइन दिनों मैं उस पुराने लड़के को ढूंढ रहा हूॅं !!
छुप छुप कर क्यूँ पढ़ते हो अलफाजों को मेरे,सीधे दिल ही पढ़ लो सांसों तक तुम ही हो..!!
चार दिन बाज के ना उड़ने से
आसमान कबूतरों का नहीं होता.!!
पानी अगर शांत हैं तो,
गहराई से मज़ाक नही करते...!
इस देश में पिता की इज़्ज़त बेटियां संभालती हैं और सम्पति बेटे।
~ दीपाली दास
जब जिम्मेदारियां गले लगाती है ,तो हर चीज़ से हिसाब करना पड़ता है!
भर जाएंगे जब ज़ख्म तो आऊंगा दोबारा
मैं हार गया जंग मगर दिल नहीं हारा