बड़ी कस केबांधे रक्खी है मुझेयादें तेरीबिछड़ना मुझे भी नहीइन से…..
उम्मीद अच्छी है,
पर हर किसी से नहीं...
तेरे ना होने से बात कुछ यूँ बिगड़ गयी,आँखें सुखी ही नहीं और रातें गुजर गई।
प्यार जब भीख बन जाए,और भीख देने वाला उसे अपनी जायदाद समझे __ तो पीछे हटने में कोई बुराई नहीं है
गरीबी शिक्षा सस्ती करने से कम होगी ,मुफ्त के राशन से नही।
किसी का मिलना, मिलकर बिछड़नाकभी हसना कभी मुस्कुरानाऔर फिर मुस्कुराकर रो देनायहीं तो हैं ज़िंदगी..!!
यूं तो सब समेट लाया था शहर से तेरे
मगर वो मन्नत के धागे मज़ार पर बंधे रह गए..
उबाऊ से दिन, अज्ञात भविष्य और अनियमित नींद, दिन बीतते जाते हैं और कुछ भी नया नहीं होता…!!!
ज़िंदगी के रास्तों मेंखुद से चलने,गिरने,उठने,का हुनर सीख लो,क्यूॅंकि सहारे कितने भीभरोसेमंद क्यूॅं न हों,एक न एक दिन साथछोड़ ही जाते हैं!!!
हम खुद को बेच भी देते तो कम पड़ता, उसके खुशियों की कीमत इतनी ज्यादा थी
हर बात पर शुक्र करना ये भी अल्लाह पाक की
नेमत है, कयोंकि अल्लाह पाक शुक्र करने की
तौफीक उन्हीं को देता है, जिससे वो राजी होता है
अपनी आग को ज़िंदा रखना कितना मुश्किल है, पत्थर बीच आईना रखना कितना मुश्किल है...
मन करे कभी कुछ अच्छा करने का,
तो हांथ किसी विधवा का थाम लेना,
किसी बेसहारा अभागी स्त्री कि,
मांग फिर से तुम संवार देना,
और ये कैसा समाज है जो बेटे को,
दूसरे विवाह के लिए हां कहता है,
वहीं दिखाकर डर घर कि इज्ज़त,...
ना दशहरा ना होली ना दिवाली होता हैं,
बेरोज़गारो का त्योहार नौकरी होता हैं...
मैं इसलिए ज़िंदा हूँ कि मैं बोल रहा हूँ
दुनिया किसी गूँगे की कहानी नहीं लिखती
अनवर जलालपुरी
धन दौलत को चाहने वाला बिखर जाता है,
और महादेव को चाहने वाला निखर जाता है !
जान अगर लेनी है तो अच्छे से लो ये गाल पर डिंपल का क्या मतलब है...
हजारो विकल्प होते हुए भी, "किसी एक पर अडिग रहना ही " प्रेम " है।
कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसें
इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-दाग़दार में
तुम्हारी आवाज वो संगीत है, जिसे ताउम्र सुना जा सकता हैं…!!