"खोना" हमारे जीवन की एक ख़ौफ़नाक क्रिया है,
और मैं क्रिया से बहुत डरता हूँ…!!
ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं,
मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बे-ख़बर नहीं.
आलोक श्रीवास्तव
अगर दूसरों की मदद करते समय दिल में,खुशी हो तो वही सेवा है बाकी सब दिखावा है…
स्त्री तुम्हारी ब्याहता जरूर है ,
पर तुम उसके विधाता नहीं हो
तुम इस शहर की रिवायत से
अनजान हो मेरे दोस्त,
यहाँ याद रहने के लिए
पहले याद दिलाना पड़ता है.....
ये आईने कभी आँखों को पढ़ नहीं पाते
ये लबों की हँसी से आगे बढ़ नहीं पाते
है जिनके दम से ज़माने में रंग और ख़ुश्बू
वो फूल अपने ही काँटों से लड़ नहीं पाते
मालविका हरिओम
अच्छे कपड़ों में कुछ स्वाभिमान का अनुभव होता है।
मुंशी प्रेमचंद
उठे तो सैकड़ों हांथ थे उसके चरित्र पर,काश एक हांथ उसकी आबरू भी ढकता..!!
होशियारी नोच लेगी सारे ख्वाब,लुत्फ जो भी है नादानी में है...
बिलकुल! चलिए जारी रखें। जहां निर्मलता की किरण हर कदम दिखाए।
दुनिया जो कठिनाईयों से भरी हो सकती है, हम निर्मलता को पकड़ेंगे, एकमात्र अद्भुत वस्त्र।
चमकती हुई आँखों के साथ हम...
त्याग वहीं करें जहां उसकी जरूरत हो,
दोपहर में दिया जलाने से अंधकार नहीं खुद का वजूद कम होता है !
तुझे पाने की कोशिश में कुछ इतना रो चुका हूँ, मैं कि तू मिल भी अगर जाये तो अब मिलने का ग़म होगा - वसीम बरेलवी
दो ग़ज सही ये मेरी मिल्कियत तो हैऐ मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया।
ख्वाब टूटें हैं मगर हौसले जिंदा हैं... हम वो हैं जहां मुश्किलें शर्मिंदा हैं....!!
इश्क की सुई से जहर रगो में उतारा गया हैमें भी हसमुख था मुझे जहरीला बनया गया है
निभा न सकेंगे एक भी दिन मेरा किरदार
मशवरें जो देते फिरते हैं हज़ार...!!
अक्सर, पिताओं के गुज़र जाने के बाद ही
हम उनसे प्यार करना सुरु करते हैं.
युद्ध का ज्वालामुखी है फूटताराजनैतिक उलझनों के ब्याज सेया कि देशप्रेम का अवलम्ब ले !किन्तु, सबके मूल में रहता हलाहल है वहीफैलता है जो घृणा से, स्वर्थमय विद्वेष से !युद्ध को पहचानते सब लोग हैंजानते हैं, युद्ध का परिणाम अन्तिम...
ज़िंदगी बेहतर बनाने में ज़िंदगी को ही वक्त नहीं दे रहे है। कल की परेशानी के चलते आज को जी नहीं पा रहे है I