वक्त अच्छा हो तो लोग हाथ पकड़ते हैं ,और वक्त खराब हो तो गलतियाँ पकड़ते हैं ...
नियम के बिना और अभिमान के साथ
किया गया तप व्यर्थ ही होता है।
वेदव्यास
तुम्हारी आँखों ने बसाएं रखा है शहर कोई,कोई तन्हा हो सकता है, कानपुर से खफ़ा नहीं,
मुनाफिक और बत्तमिज में अगर फ़र्क किया जाए तो बत्तमिज ज्यादा खतरनाक नही होता जितना मुनाफिक होता है
तस्वीर तो है ही तुम्हारी है तारीफ-ए-काबिलउससे भी ज्यादा कातिल है होंठों के नीचे ये काला तिल🧚🏻♀️
वृंदावन की कूंज गली मेंमही बैचने में गईनंद जी के लाल मुझे सामने मिले जबमें तो शरमा गई रेकनैया तेरी मुरली बैरन भई
मेरे बस में नहीं हैं खुले आसमान में उड़ना ,इसलिए मैंने अपने पिंजड़े को ही अपनी दुनिया मान लिया हैं ..
फिर वही दिल की गुज़ारिश फिर वही उनका गुरूर
फिर वही उनकी शरारत फिर वही मेरा कसूर!
और फिर मैने उसे जाने दिया..... मैंने सदिया बिताई थी उसकी प्रतीक्षा मे... दिन को दोपहर, दोपहर को शाम , शाम को रात , रात को दिन होने में युग लग जाते हैं ये मैने सिर्फ जाना , नहीं जीया...
खुद को शरीफ बस इतना ही रखो, जितना आपके साथ दुनिया रहे !
आज शाम है बहुत उदासकेवल मैं हूँ अपने पास।
~ भगवतीचरण वर्मा
जीवन में ऐसे लोगों को चुने जो आपको,
मानसिक रूप से स्वस्थ रख सके।
सर्दी है कि बढ़ती जा रही है ,
और मुझे तुम्हारी कमी खलती जा रही है ...
इच्छाएं स्वार्थी बना देती हैं,
वर्ना जरूरतें तो स्वाभिमान में रहकर भी पूरी हो जाती हैं।
चाहने वालों की संख्या कम हो जाए चलेगा..मगर, जलने वालों की संख्या बढ़ती रहनी चाहिए…
दूर होने के फ़ैसले, काफ़ी क़रीब आ जाने के बाद लिए जाते हैं.
हम भूल सके हैं, न तुझे भूल सकेंगे,तू याद रहेगा हमें, हाँ याद रहेगा.
धूप भी कहां कुछ कर पाया है ,
जब तक सर पर मां का साया है ।।
स्नेह के उत्तर में माँ शीर्ष पर है, पिता तो सदा प्रश्नों में आते हैं !
वफ़ा और मोहोबतों के ज़माने गए,अब तो दिल बहलाने का सामान है मोहोबत !!