तुझे पा लूं गर मैंपल भर को भी,
तो पल भर में मैंसदियां बिता दूं।
तमीज़ बताती है परवरिश आपकी, आप पढ़े लिखे हैं तो क्या हुआ
बाप गरीब जरूर है लेकिन इस बेटी के लिए ,
एक राजा की तरह सभी ख्वाइशें पूरी करता है ।।
खिड़कियां मत खोलो
अजनबियों के वास्ते
कितने ही खास हो जाएं
पर ये वफादार नही होते
जीवन की एक कड़वी सच्चाई ये भी है कि ,आधे रिश्ते तो लोग इसलिए निभाते हैं ' क्योंकि भविष्य में उनसे काम पड़ सकता है ….
खूबियां जान कर चाहना आकर्षण है,
कमियां जान कर चाहना प्रेम है....
प्रतिभा सब में है,पर लक्ष्य तक केवल वही पहुंचेंगें,जो आकर्षणों से बचे रहेंगे।
सफर मुस्किल है मगर काटेंगे अकेले ही..!
बहते पानी की तरह रहोगेतो कचरा ख़ुद किनारे हो जाएगा !
उमीदे टूटी तो उमीद करना छोड़ दिया,सपने टूटे तो सपने देखना छोड़ दिया,जबसे दिल टूटा है, साँसे तो ले रहे है,पर अब उन्होंने जीना छोड़ दिया !
उनकी भी क्या इज्ज़त करना,
जिनकी हरकते कुत्तों जैसी हो।....
सालों बाद उन पर नज़र पड़ी, उन पर ही ठहरी रह गयीं ... ~ दीपक चौधरी
कभी-कभी थोड़ा पलायन बहुत स्वस्थ होता है।
~ धर्मवीर भारती
मनुष्य कितना भी बड़ा क्यो न बन जाए,
उसे हमेशा अपना अतीत याद करते रहना चाहिए।
ईश्वरचन्द्र विद्यासागर
बस लिबास ही महंगा हुआ है...
लोग अभी भी दो कौड़ी के हैं...!
साजिशे वो रचते है जिन्हे कोई जंग जितनी हो
वरना कोशिशे तो दिल जीतने की होनी चाहिए..
वो ज़माना अब नहीं रहा दोस्तों,जब लोगों को किसी से बिछड़कर अफ़सोस होता था।
मै लेखक हू लेकिन मै उद्दंडता नही लिखता,देश को पृथक करने वाली उग्रता नही लिखता,इंसान हू मै इसलिए हिन्दू मुस्लिम नही लिखता,हिन्दुस्तान के गौरव पर चोट करती अशिष्टता नही लिखता,और इश्क चाहती है मेरी कलम मै दुष्टता नही लिखता,मै द्वेष...
वो मस्जिद गया मन्दिर भी गया और गया समुद्र के बीच…..
लेकिन रहा फिर भी नीच का नीच