तुम न कर सकोगे मेरे दिल के दर्द का इलाज़ ,
ज़ख्म को नासूर हुए मुद्दतें गुजर गयीं
समझता है कि अपनी तेज बहती धार से या लहरों के वार सेडुबो देगा हमारे हौंसलों की कश्तियाँ तो ये फितूर है पानी का
भूखा पेट, खाली जेब और टूटा हुआ दिल, ज़िंदगी के बेहतरीन सबक देते हैं।
अपना ज़मीर जिंदा रखो,
ये पार्टीया तो आती जाती रहेंगी…
मुझ पर तरस खाने वाले लोगहद्द से ज़्यादा बुरे लगते हैं मुझे
बेहद ख्याल रखा करो तुम अपना,मेरी आम सी जिंदगी में बहुत खास हो तुम ..!!
अगर मैं सबके जैसा होता,
तो यकीन करो इतना परेशान ना होता...
डिग्रिया तो आपकी पढ़ाई के खर्च की रसीदें है.. ज्ञान वही है जो आपके किरदार में झलकता है.!
विनय विफल हो जहाँ, बाण लेना पड़ता है।
स्वेच्छा से जो न्याय नहीं देता है, उसको
एक रोज आखिर सब-कुछ देना पड़ता है।
कुछ हालातों में ये रास्ते ज़िंदगी केबिल्कुल भी आसान नहीं होते!चलना तो होता है अंगारों परऔर हाथ थके रहते हैं–बर्फ ढोते-ढोते!
ज्ञान का उपयोग न हो तो वह भार के ही समान है.!
~ अज्ञात
मालिक करने वजूद ए ख़ाक चला है दोस्तजिस्म की जिंदा कल जिसकी हम रूह थे।
रास्ते जो भी चमक-दार नज़र आते हैंसब तेरी ओढ़नी के तार नज़र आते हैं
कोई पागल ही मोहब्बत से नवाज़ेगा मुझेआप तो ख़ैर समझदार नज़र आते हैं
~ ज़ुबैर अली ताबिश
ज़िम्मेदारी क्या उठा ली मैंने ,
लोग मुझे मेरी उम्र से बड़ा समझ बैठे ...
रूठ जाने कि सदी गुज़र गई..
अब नज़र अंदाज़ करने का ज़माना है..!!
इस समाज में जो आदमी बुरा नहीं है,
वो बेवकूफ समझा जाता है...
मुझे जब भी उसकी याद आती है,
मुझे सुलाने में सारी रात हार जाती है!!
हसरत थी किसी के दिल में ज़िंदा रहने की
अफ़सोस हम ख़ुद के अंदर ही मर गए…
जिस शहर से कुंवारों को, मयस्सर न हो दुल्हन...
लाज़िम है कि उस शहर के मैरिज हाल गिरा दो.!
जिंदा रहने के लिए भोजन जरुरी है। भोजन से भी ज्यादा पानी जरुरी है, पानी से भी ज्यादा वायु जरूरी है और वायु से भी ज्यादा आयु जरूरी है, मगर मरने के लिए कुछ भी जरुरी नहीं है। आदमी यूं...