हालात इंसान को वो बना देते हैं,
जो वो कभी था ही नहीं....
घर बटा बर्तन बटे सारी ज़मीनें बाँट लीं
बाप के मरते ही बच्चों ने पतंगें छाँट लीं
इक तरीक़ा ये भी था फल बाँटते वो उम्र-भर
भाइयों ने पेड़ काटा और लकड़ी बाँट लीं
कभी-कभी लोग सच नहीं सुनना चाहते क्योंकि
वे नहीं चाहते कि उनका भ्रम टूट जाए।
फ़्रेडरिक नीत्शे
शाखें तराशने से ना बनेगी कोई बात,
नफ़रत के सारे पेड़ जड़ों से उखाड़ दो.
औसतन…..आदमी अपनी जिंदगी का एक वर्ष औरतों को घूरने में ही बिता देता है.
घाट का एक पत्थर हूं मैं
मैंने नदी के हजार रूप देखे हैं!
दर्द नहीं, "दवा" बनिये….!!आप बशर रहिए, ना खुदा बनिये..!!(बशर- इंसान)
मेरे दिल मे मत झांकना धुंआ बहुत है ,
बची कुची ख्वाइशें जला रही हूँ मैं ।।
किसी काकिरदार सजानेखुद को गलत लिखना पड़तावरनाखुद की कहानी मेंअपने आप कोखराब कोन लिखता…
जरा भी असर नहीं होता मुझ पर इन सांपों के ज़हर का,
मैंने अपनी जवानी में एक मशहूर नागिन को मुंह लगाया था !
बिसाते-जिंदगी पर हसरतों के प्यादे हैं,
मुकम्मल लोग भी कितने अधूरे-आधे हैं...
बोलने में मर्यादा मत छोड़ना,
गालियाँ देना कायरों का काम है।
सरदार पटेल
किताबें पढ़कर " विद्वान " बनना बहुत आसान है, लेकिन " नेक इंसान " बने रहना बेहद मुश्किल।
कुछ लोगों की सोच चाय ने डूबे बिस्किट,
की तरह होती है कब गिर जाए पता नहीं चलता....
हाथ भी नहीं मिलाते उन लोगों के साथ
जिनकी रूह से हमें गद्दारी की बदबू आती है।
हिम्मतें जब एक जुट हो जाती हैं...
तभी मुसीबतें अकेली पड़ जाती हैं..!!
लोग हत्या होते देख लेते हैं प्रेम होते नहीं देख पाते....!!
जो धधक रहे हैं दिन रात मेहनत की आग में
वे सब भविष्य के सूर्य हैं अपने परिवार के...।
डर लगता है अब ..
किसी से बात करने में कही फिर से ..
किसी की आदत न लग जाये..
कभी कभी ऐसा क्यों लगता है तू मेरा होकर भी जुदा सा क्यों लगता है ?माना तेरी भी कुछ मजबूरिया है पर ये तों बता ये जो तेरी हर आहट का इंतजार करता है ये शक्श आखिर तेरा क्या लगता...