हवा ने किया ऐसे स्पर्श तनजैसे छू कर मन मीत गयाकुछ भरा हृदय प्रेम मगरदृग जल से कुछ रीत गया।
मेरे रोने कि तू परवाह ना कर, अब हालातों से लड़ लेता हूं,
तब अश्कों से थे खून बहे, अब खामोशी से रो लेता हूं..!!
विरक्ति
गुस्सा करना अपने पैरो पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है,क्योकि आप जिसपे गुस्सा करते है,उससे ज्यादा आपका खुद का नुकशान हो जाता है !
एक शख़्स सुकून जैसा,जो कभी मिला ही नहीं।
बदलाव कभी दर्दनाक नहीं होता,
केवल बदलाव का विरोध दर्दनाक होता है।
बुद्ध
जिंदगी में आप जितनी बार प्रयास करेंगे..
उतनी ही बार आप कुछ नया प्राप्त करेगे..!!
हम दोनों धोखा खा गए हैं..मैंने तुम्हें औरों से अलग समझा, और तुमने मुझे औरों जैसा समझा..!!
हुस्न की क़ीमत कुछ खास नहीं होती
बदन अक्सर ऊंचे दामों में बिकता है !
गिरगिट तो बस नाम के लिए बदनाम है सरवरना इंसान से अच्छा रंग बदलना कौन जानता है..
हर कोई इश्क़ का मारा नही होता कुछ लोग शौक़ से भी लिखते है...
गुज़रता हुआ वक्त क्या क्या सिखा देता है.….. कभी हँसना तो कभी रोना सिखा देता है वक्त है कभी जहर पीना तो,कभी जख्म सीना सिखा देता है...!
वो ख़्वाब रात काचाय साँझ कीबारिश की बूंदें रूमानीवही समां पुरानाधड़कनों से बतियानाबदला नहीं है कुछ भीवही मिज़ाज़ आशिकानाचलो निभाते हैं हम तुमवही पुराना याराना लेकर चुस्कियाँ चाय कीकरेंगे गुफ्तगू शायराना
यहां दरिया पे पाबंदी नहीं है,मगर पहरे लबों पे लग रहे है !
क़ासिद दयारे यार से लाए हो कुछ ख़बर । ईद तो दहलीज़ पर है वो आए क्यू नही ।
ताश में जोकर और अपनों,
की ठोकर अक्सर बाज़ी घुमा देते हैं....
माँ
एक बोझा लकड़ी के लिए
क्यों दिन भर जंगल छानती,
पहाड़ लाँघती,
देर शाम घर लौटती हो?
माँ कहती है :
जंगल छानती,
पहाड़ लाँघती,
दिन भर भटकती हूँ
सिर्फ़ सूखी लकड़ियों के लिए।
कहीं काट न दूँ कोई...
सबके अपने सत्य हैं,
सबके अपने झूठ।
कोई कहता लाभ इसे,
तो किसी को लगती लूट।
सबके अपने कष्ट हैं,
सबकी अपनी जंग।
कोई कभी टूट जाता है,
कोई हो जाता तंग।
सबकी अपनी मान्यता,
सबका निज विश्वास।
कोई कभी...
जिंदगी में अहमियत उसी को दो...
जिसमे अहम न हो..!
ये कैसा नशा है मैं किस ख़ुमार में हूँ तू आके जा भी चुका है मैं इंतज़ार में हूँ
किसी मंदिर के बाहर लिखा था बेझिझक भीतर चले आइये…." पाप " करके आप थक गए होंगे ?मगर….." माफ़ " करके मैं नहीं थका.।।