और फिर मैने उसे जाने दिया..... मैंने सदिया बिताई थी उसकी प्रतीक्षा मे... दिन को दोपहर, दोपहर को शाम , शाम को रात , रात को दिन होने में युग लग जाते हैं ये मैने सिर्फ जाना , नहीं जीया...
बालों के सफेद होने से लेकर चेहरे कि सिलवटें बनने तक,
तुम्हारा साथ चाहिए मेरी अर्थी के पास बैठकर रोने तक..!!
कद्र करेगा वो भी एक दिन मेरीजब अकेलापन उसे भी खायेगा..!!
कुछ लोगों को उम्र नहीं..जिम्मेदारियां समझदार बना देती हैं..!!
आज खुद को खुश रखना ही
दुनिया का सबसे बड़ा संघर्ष बन गया है।।
बारिश की बूंदों ने शब ए फुरकत का रंज कुछ यूं आसान कर दियामेरे अश्क़ छुप गए और मैं तन्हा रह गया….!
अकेला चलना किसी के,
पीछा चलने से बेहतर है....
दिल जलाये नही जाते,
जख्म जलाये होंगे,
जिनको रोशनी चाहिए
जख्मो से भी पा लेंगे।
गीत ग़ज़लों में शामिल गर हो ना सके, तो तुम्हारे दर्द में बसर हम ज़रूर करेंगे।
जब तक इंसान मजबूत नही होता,तब तक इंसान मजबूत नहीं होता ।
रोज़ अच्छे नही लगते आँसू खास मौको पे मज़ा देते है..!!
हाय वो जिम्हें देखा भी नही याद आये तो रुला देते है..!!
आग अपने ही लगाते हैगैर तो सिर्फ हवा देते है…!!
सुंदरता का मोह त्याग चूके है हम ,
जिसे पसंद आना था आ चूके है हम...
शुक्रिया है जिंदगी यहाँ तक लाने के लिये,
यहाँ से अब मैं अकेला ही चला जाऊंगा…!!
तू कितनी कठिन है ज़िंदगी,,
कि तुझे पढ़ने के लिए,,
मुझे अपने स्कूल की पढ़ाई छोड़नी पड़ी,,
कीर्ति चन्द्रा
धैर्य बनाकर रखें और मेहनत करते रहें,आपका किस्सा नहीं एक दिन कहानी बनेगी..!!
बहाने बना कर तुम अपना वर्तमान तो सरल कर लोगे लेकिन भविष्य कठिन बना लोगे !
जिंदगी की जंग में वही जीतता है.... जो हर परिस्थिति में चलना जानता है...!!
हम को रोज़ी खींच लाई शहर के सहराओ में
फूल, तितली, एक लड़की रह गए सब गाँव में
आज शोहरत के सफ़र में याद आता है वो पल
अपना दिल रखा था हमने जब किसी के पाँव में..!!
कमाल की थी तेरी वो मुस्कुराहट जिसके हम कायल थे,
आज तो तेरा लहजा मेरे मौन को भी घायल किये हुए है..!!
विरक्ति