जिंदा आदमियों के अंदर,कई बार मारे हुए लोग भी रहते हैं….
अंगड़ाई पर अंगड़ाई लेती है रात जुदाई की...
तुम क्या समझो तुम क्या जानो बात मिरी तन्हाई की...
ये दुनिया कांटों जंगल है
नफ़रत की आग दिलों में दहकती है
एक तू ही मेरे इश्क किताब
जहां तूं बसंती फूलों सी महकती है
अदाओं का खेल है बहुत सारा.
कुछ लोग ज़िस्म पर भी मरते होंगे.!
"मां नहीं है"पीहर के Gate पर पहुंचते हीमां, मां, मांका शोर करते हुए अंदर घुसनाअब थम सा गया हैक्योंकि मां नहीं हैकुछ अपनी कुछ पराई बातें होती थींकुछ जुबान से तो कुछ आंखों ही आंखों मेंसमझ जाती थीअब कहने को...
तुम्हें गुरुर है तुम्हारा वक्त बोल रहा है!
हमें यकीन है हमारा सब्र बोलेगा!!
“संगीत”
लगाता है मन की पीड़ाओं परमरहम सुकून का
ना शाखों ने जगह दी न हवाओं ने बख्शा
वो पत्ता आवारा न बनता तो और क्या करता!
किसी रात कभी ऐसा भी हो,हम म'र जाएं, उसे खबर न हो.
आ देख मेरी आँखों के ये भीगे हुए मौसम,ये किसने कह दिया कि तुझे भूल गए हैं हम.
कुछ लोगों की सोच चाय ने डूबे बिस्किट,
की तरह होती है कब गिर जाए पता नहीं चलता....
किताबें हमें रोटी नहीं देतीं लेकिन यह बताती ज़रूर हैंकि हमारे हिस्से की…….रोटी कौन खा रहा है !!
दुनिया के बाकी सभी रिश्ते स्वार्थ से भरें होते हैं
केवल मां बेटे का रिश्ता ही प्यार से भरा होता है
सोचा था हर मोड़ पर याद करेंगे तुम्हे
लेकिन पूरा रस्ता ही सिदा था..
संघर्षों की समर भूमि में, हमसे पूछो हम कैसे हैं,
कालचक्र के चक्रव्यूह में, हम भी अभिमन्यु जैसे हैं !
शराब तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ेगी,
तुम एक शख्स के नशे में मरोगे..
मैं गांव की अबोध लड़की कहां छुपा पाऊंगी तुम्हारे प्रेम को….मैं मुस्कुराती भी हूं, तो लोगों को शक हो जाता है…
तेरे इख़्तियार में क्या नहीं, मुझे इस तरह से नवाज़ दे
यूँ दुआएँ मेरी क़ुबूल हों, मेरे दिल में कोई दुआ न हो
यूँ तो न हुईं मेरी राहें रौशन, मैंने बाप को जलते हुए देखा है -- अम्बष्ठ
समझने वाले ख़ामोशी भी समझ लेते हैं
और न समझने वाले
जज़्बात का भी मज़ाक बना देते हैं।