घर में पड़ी दरार जब भरती नहींदीवार बन कर उठ खड़ी होती है।
हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते है,मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिन्दुस्तान कहते हैं,
जो ये दीवार का सुराख है साज़िश है लोगों की,मगर हम इसको अपने घर का रोशनदान कहते हैं !
अगर विश्वास खुद पर हो तो, उजड़ी हुई जिंदगी भी खिल जाती है ..!!
और ,फिर मेरा खुद को संभाल के संभल जाना ही इस आधी अधूरी प्रेम कहानी का अंत होगा।
लाचार है बीमार है सही से चल नहीं सकता,एक गरीब बिना मेहनत किये पल नहीं सकता,और जो खुद कांटे हैं उन्हें तक़दीर सुख भेजती है,वहीं मुफलिसी उम्मीद लिए सड़कों पर फूल बेचती है..!!
बूँद पानी को मेरा शहर तरस जाता है
और बादल है कि दरिया पे बरस जाता है
महरुमीयों की अपनी कोई इंतेहा नहीं ,कभी चेहरा नही, तो कभी आईना नही ।तुम जिस से कर रहे हो मेरे हक में बद्दुआ ,मेरा भी है खुदा, वो फकत तुम्हारा नही ।
उनकी भी क्या इज्ज़त करना,
जिनकी हरकते कुत्तों जैसी हो।....
अगर मोहब्बत की हद नहीं कोई,तो दर्द का हिसाब क्यूँ रखूं।
विज्ञान का विद्यार्थी रहा हूँ इसलिए बता रहा हूँकि भूत जैसी कोई चीज नहीं होती…पर चुड़ैलें सच में होती हैं भाई.!!
इतनी बदसलूकी ना कर ए जिंदगी,हम कौन सा यहां बार बार आने वाले हैं…
उसूलों पे जहाँ आँच आये वहां टकराना जरूरी है, जो जिन्दा हों तो फिर जिन्दा नजर आना जरूरी है !
बुराई पर अच्छाई की
असत्य पर सत्य की
अधर्म पर धर्म की
नफ़रत पर मोहब्बत की
जीत सदैव सुनिश्चित है
पढ़ा जाये या कमाया जाये
ये दिमाग़ नहीं पेट तय करता है
मन करे कभी कुछ अच्छा करने का,
तो हांथ किसी विधवा का थाम लेना,
किसी बेसहारा अभागी स्त्री कि,
मांग फिर से तुम संवार देना,
और ये कैसा समाज है जो बेटे को,
दूसरे विवाह के लिए हां कहता है,
वहीं दिखाकर डर घर कि इज्ज़त,...
जब मूड ख़राब हो तो
जिंदगी नहीं मौत प्यारी लगती है
चश्मदीद अंधा बना‚ बहरा सुने दलील;
झूठों का है दबदबा‚ सच्चे हुए ज़लील।
गलतफहमियां तो होंगी रिश्ते में,
तुम संभाल लोगे ना..
यूं तो वक्त मिलेगा नहीं कभी,
पर तुम निकाल लोगे ना..!!
आ तेरे संग एक पेंग बनायी जाये , ज़िन्दगी आ बैठ तुझे चाय पिलाई जाए...
औरत को समझता था जो मर्दों का खिलौना
उस शख़्स को दामाद भी वैसा ही मिला है