सुन्दरता सस्ती चारित्र महंगा, घडी सस्ती समय महंगा....!!
चेहरे अक्सर झूठ भी बोला करते हैं,
रिश्तों की हकीकत वक़्त पर पता चलती हैं.
मैंने अपनी ज़िंदगी के सारे,महंगें सबक सस्ते लोगों से सीखे हैं….
सारे जग की उम्मीदों से
निज स्वार्थ बड़े जब हो जायें
पद हेतु, शत्रु के पाले में
कुछ मित्र खड़े जब हो जायें
तब दिल पर पत्थर रखकर
उनसे हाथ छुड़ाना पड़ता है
निज संबंधों को भूल
पार्थ को शस्त्र उठाना पड़ता है
फंस गया तुम्हारा...
तुम कहते हो कि तुम्हें
बारिश से प्यार है
लेकिन उसमें चलने के लिए
तुम छाता इस्तेमाल करते हो
तुम कहते हो तुम्हें हवा से प्यार है
लेकिन जब वो आती है तो
तुम खिड़कियां बंद कर देते है
इस लिए मैं डरता हूँ
जब...
नैतिकता, समानता तथा न्याय के सिद्धांत कैलेंडर के साथ नहीं बदलते।
नाराजगी चाहे कितनी भी क्यों ना हो,पर तुझे छोड़ देने का ख्याल हम आज भी नहीं रखते
वफा के रश्मों रिवाजों को बहुत देखा जमाने में
निभाने का हुनर तो बस किताबों में होता है..
प्रज्ञा शुक्ला
जब रात है ऐसी मतवाली
फिर सुबह का आलम क्या होगा….
गिरते हुए मैने जब भी तेरा नाम लिया है
गिरने ना दिया तुने मुझे थाम लिया है।।
रूठना मनाना और छोड़ देना तुम्हारा शौक है..
हमें तो आदत है तुम्हें मना कर मुस्कुराने की..!!
तुम्हारी हर बात का अर्थ मुझे समझ आता है ,, कान्हा ... इसलिए अब मैं किसी से ,, कोई शिकायत नहीं करती ...
ज़िन्दगी ने दिए हैं बहुत से धोखे,
बट कोई बात नहीं...इट्स ओके.
फस गया हूँ जिंदगी के कुरुक्षेत्र में अभिमन्यु की तरफ ,
बचाने कोई आने वाला नही और मैदान मैं छोड़ूंगा नही...
दुःख रूप बदलता हैलेकिन खत्म नहीं होता
इश्क हारा है तो दिल थाम के बैठें क्यों हो ,
तुम तो हर बात पे कहते थे कोई बात नहीं ।।
जो ‘तुम’ ना कह कर ‘आप’ कहेबस इतने पर तो जान लुटा जाए
बारात में #नोटों की गड्डी उड़ाने वाले #लोग #पूजा की #आरती के लिए खुल्ले #पैसे ढूंढते हैं अभी हमे बहुत बदलना है
शादी उसकी भी होगी, और मेरी भी होगी,लेकिन "हमारी" होती तो क्या बात थी.
इतनी शिकायत, इतनी शर्तें, इतनी पाबन्दी
तुम मोहब्बत कर रहे हो या एहसान?