लफ़्ज़ जो भी हैं वही दिल को दुखाने वाले
सब हुनर सीख लिए तू ने ज़माने वाले 💔
तू मेरा दुःख समझतीअगर तेरा भी इश्क में हारा हुआ एक भाई होता..
हर तरफ से असफल व्यक्ति ही,
सबसे उत्तम शिक्षक होता है।
न कर यूं बेवक्त बारिश हे भगवान
किसान के चेहरे की खुशी खेतों में पड़ी है।
ख़्वाब क्या देखें थके हारे लोग
ऐसे सोते हैं कि मर जाते हैं!
मोहब्बत मेरी आख़री शरारत थीफिर यूं हुआ के मैं बचपन से निकल आया….!
तेरा ख़ामोशी पर फ़िदा तो हम हैं ही, कुछ कह दो तो शायद फ़ना हो जाएँ
मैं बेरागी हूं… महादेव नहींपर तुम्हारी काया से अधिक तुम्हारी आत्मा को चाहूंगा..!
मैं प्रेमी हूँ… कान्हा नहींपर तुम्हारे नाम को सदैव अपने आगे लगाऊंगा..!
मैं मर्यादित हूं… श्रीराम नहींपर तुम्हारे अलावा मैं किसी और का न हो पाऊंगा..!
रोने के लिए हम एकांत ढूँढ़ते हैं,
हँसने के लिए अनेकांत।
प्रेमचंद
माना सबकुछ नहीं मिला है ज़िन्दगी में,
पर क्या घर में माँ का होना काफ़ी नहीं है।
मां के आगे, यूं ही कभी खुल कर मत रोना..
जहां बुनियाद हो, वहां ज़्यादा नमी अच्छी नहीं होती..!!
तौक़ीर अँधेरों की बढ़ा दी गई शायद...
इक शम्अ जो रौशन थी बुझा दी गई शायद...
पिता की बनियान में बने झरोखे ,..संतान के उड़ान की मयस्सर खिड़कियां है !!
संबंध बनाना,ऋण लेने जैसा आसान है.!किन्तु संबंध निभानाकिश्तें भरने जैसा कठिन है..!!
उन्हें ढूंढना आसान हो जाता उस पराए देश में ,अगर मेरे पास उनकी कोई एक तस्वीर होती ...
जीने कि "ललक" तब और ज्यादा होती है,
जब दादा कि बैसाखी उनकी "पोती" होती है..!!
विरक्ति
चाय कड़क होती है,उनके नरम हाथों की .!!
स्वभाभिमान से जीने की आदत डालिए और
कुछ फ़ालतू लोगों को सूची से ब्लॉक कर दीजिए..!!
मैं तुम्हारे प्रेम का पूर्ण विराम बनना चाहता हूं...
प्रथम नहीं, प्रेम पथ का अंतिम विश्राम चाहता हूं.
चले जाना चाहता हूँ
बहुत दूर...
जहाँ कोई भी न हो!
चले जाना चाहता हूँ
उन बर्फीली पहाड़ियों के अनज़ान सफ़र पर
जिसका कोई अंत न हो!
मैं ख़ुद को भी भूल जाना चाहता हूँ!
परिन्दों की तरह सब कुछ छोड़
आसमां में उड़ना चाहता हूँ!