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World's Best Cow Hospital

यूँ तो अमरोहा से मेरा कोई नाता ना था फिर कमबख्त नामुराद मोहब्बत हुई और उसपर सितम तुझ बेवफा से हुई और हम खुद बे खुद जॉन ऐलिया के मुरीद हो गए

मुँह की बात सुने हर कोई दिल के दर्द को जाने कौन आवाज़ों के बाज़ारों में ख़ामोशी पहचाने कौन निदा फ़ाज़ली

तुम्हारा ये भ्रम झूठा है कि आंखों में कोई ओर है चीर के देखो दिल मेरी सांसों में तुम्हारा ही शोर है

कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूत जिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है।

सब्र करना सीख लो,हर चीज जिद से नहीं मिलती।

जिंदगी की जंग में हालात चाहे जैसे भी हों।। धडकनों में नशा जीत का ही होना चाहिए।।

इंतज़ार करने वालों को उतना ही मिलता है, जितना कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं!

लड़की खूबसूरत हो, लेखिका हो, उम्र में बड़ी हो, हाईट में 'छोटी' हो, काजल लगाती हो और नोज रिंग पहनती हो, तो उससे इश़्क कैसे न हो…❤️

संघर्ष भी उन्हीं को चुनता है, जिनमें लड़ने की क्षमता होती हैं।

आ ज़ा फिर से मेरे ख्यालों में….कुछ बात करते हैं… कल जहाँ खत्म हुई थी…वहीं से शुरुवात करते है…

तुम्हें छूकर मैंने जाना किसी रेलगाड़ी के गुजरने पर धरती कांपती क्यों है। तुम्हें चूमकर मैंने जाना छूइमूई के पौधे का रहस्य। तुम्हारे आलिंगन से मैंने जाना चन्द्रमा पर प्रथम मनुष्य होने का एहसास। तुमसे प्रेम करके मैंने जाना मछुआरे और मछली के बीच...

लहू में घरौंदा कर के अहसास बैठे थे नस नस से उभर कर वो आज तूलिका के द्वार से फलक पर उतर रहे हैं लोग ये समझ रहे हैं मैं तेरी #तस्वीर बना रहा हूं हकीकत में तो मैं तूलिका की आंखों से तुझे देख रहा हूं.... मैं कहां #तस्वीर...

चिड़ियाघर एक ऐसी जगह होती है जहाँ सारे क़ैदी बेगुनाह होते हैं

अपने घर से नए शहर निकलते वक्त बस यहीं सोच कर सब्र किया कि,"कुछ होना भी चाहिए छुटने को, एक दिल ही हैं अब बस टूटने को!"

इरादा है बदलने का तो कोशिश कर बदलने की अगर सूरज नहीं है तो चराग़ों से उजाला कर मिलेगी हार या फिर जीत का परचम उठाएगा नतीजा जो रहे लेकिन नया सिक्का उछाला कर राघवेंद्र द्विवेदी

समय जब विपरीत हो, तो शांत रहना ही सही होता है...

अकेले चलना सीखो क्योकि सहारा कितना भी सच्चा हो, एक दिन औकात दिखा ही देता है...

आप बस किरदार हैं अपनी हदें पहचानिएवरना फिर एक दिन कहानी से निकाले जाएंगे

वो शख्स तू ने जिसे छोड़ने में जल्दी की, तेरे मिजाज़ के साँचे मे ढ़ल भी सकता था.

लफ़्ज़ों के दांत नहीं होते, मगर ये काट लेते हैं...


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