हम तो समझे थे कि इक ज़ख़्म है भर जाएगा
क्या ख़बर थी कि रग-ए-जाँ में उतर जाएगा
वक्त तो आने दो हम तुम्हे,बताएंगे तूफान कैसे आता है !
मैं "हिंदी" का "आलिंगन" हूँवो "उर्दू" में "आग़ोश"उसको मेरे "बाजुओं" में सुकूँन है,मैं उसकी "बाहों" में मदहोश…
रात को जब अकेला होता हूॅं
खुद को सवालों के कठघरे में पाता हूं
किस्मत जब मेरी बदलने लगी,तब कुछ कुत्तो की जलने लगी !
बड़े ही खुशनुमा वहम थे ,
की हम उनकी जिंदगी में अहम थे ..!!
कब कौन समेटता है यहाँ,खुद तोड़ कर पूछते है महफूज तो हो तुम…
इंसानियत दिल में होती है हैसियत में नहीं
ऊपर वाला कर्म देखता है वसीयत नहीं!
अब तो इस राह से वो शख़्स गुज़रता भी नहीं
अब किस उम्मीद पे दरवाज़े से झाँके कोई
परवीन शाकिर
चाय से दोस्ती कल थी,
आज है और कल भी रहेगी...
फिर चाहे मौसम बदले या ज़माना !
तस्वीरों पर फिल्टर इतना ही लगाएं कि मिलना पड़े!..
तो शर्मिंदगी ना हो…!
मुस्कुराना इतना भी मुश्किल नहीं हैंबस तुम्हारे बारे में सोचना ही तो है !!
कुछ ऐसे लोग भी मिलेंगे जिंदगी में ,
जो साथ बैठकर हंसेंगें और पीठ पीछे डसेंगे
सभ्यता का युग तब आएगा
जब औरत की मर्ज़ी के बिना
कोई औरत को हाथ नहीं लगायेगा।
बुरा लगता है ना,,,जब कोई अपनागैर बन जाता है ,,,
दर्द होता है ना,,जब कोई सालोंका रिश्ता पल भरतोड़ देता है ना ,,,,
अच्छा नहीलगता है ना,,,,
जब कोई जानकारअजनबी बनजाता है ना,,,,,
समय इतना ताकतवर होता है कि ,
कोयले को भी हीरा बना देता है ...
सरल व्यक्ति के साथ किया गया छल ,
आपके बर्बादी के सारे द्वार खोल देता है ...
ख़ुदकुशी को टालकर आया हूँ मैं,
हाँ बताओ! क्या ज़रूरी बात है ?
गांव की मिट्टी के पले बढ़े हैं,हमें अदाएं कम और मर्यादाएं ज्यादा पसंद हैं….
माफी के हकदार गलती करने वाले होते हैं
चालाकी करने वाले नही !