स्त्री और मिस्त्री से,
टकराने का मतलब घर का नक्शा बिगाड़ना।
दूसरों की आंखों में आंसू लाने वाले ये क्यों भूल जाते हैंकि भगवान ने दो आंखें उन्हें भी दी हैं और कर्म समय चक्र के साथ घूमकर एक दिन हमारे समक्ष अवश्य आते हैं।
नानक नाम चढ़दी कला,
तेरे भाणे सरबत दा भला
दिन पे दिन बढ़ रही है तेरी बेरुखी ...
किसी और से दिल लगा तो न लिया !
लोग देखतें हैं तमाशा सिक्का फेंक केसड़कों पे मजबूरी करतब करवाती है
एक दिन मर जाना है माना सबको मगरफिर क्यों ये आग पेट कि हर रोज जलाती है
कामयाबी का तभी "सिंहासन" होगा,
जब आपका अपने "मन" पर शासन होगा।
सेजल
वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा...
हम भी तेरे आने कि आस में,अपनी दुनिया उजाड़ बैठे हैं,मेरी सांस टूटना बाकी है अभी,मगर चिता सजाए लेटे हैं..!!
कच्ची उम्र में इश्क़ और पक्की उम्र में वहम, बहुत जल्द होता है।
बड़े ही खुशनुमा वहम थे ,
की हम उनकी जिंदगी में अहम थे ..!!
इक़ अरसे बाद मिलना हुआ
उसने बस इतना ही पूछा था
आपका मिजाज कैसा है...!
बोल नहीं फूटे बस..आंखे भर आईं
मोहब्बत कहीं न कहीं अपनी हम-ख़्याल पसंदीदा रूह के साथ सारी उम्र , बिना उकताये हम-कलाम होते रहने का नाम है .!!
मैं सागर से भी गहरा हूॅं
तुम कितने कंकड़ फेंकोगे।
ये दुनिया है इधर जाने का नहीं,मेरे बेटे किसी से इश्क कर,मगर हद से गुजर जाने का नहीं ।
कुछ पीड़ाओं में ध्वनि नहीं होती ,
लेकिन उनकी गूंज अनंत तक होती है...
भरोसा टूटा हैं वहम की दवाई मत दो,
कहीं और जाकर शरीफ़ बनो मुझे सफ़ाई मत दो ..!!
सभी अनुभवों का स्वागत कीजिए,पता नहीं कौन सा अनुभव आपकी ज़िन्दगी बदल दे..!!
जिस रिश्ते को बचाने के लिए आपको अकेले लड़ना पड़े, वो रिश्ता लड़ाई के भी काबिल नही होता...
जंगल में जानवर मांस नोचकर खाते हैं,
जबकि
इंसानी बस्तियों के दो पैरों वाले भेड़िये,
देह के साथ आत्मा भी नोचकर खा जाते हैं ।
राजेश गौरी
बाजार से खरीदी हुई मूर्ति के सामने हाथ जोड़कर धन मांगते हो,
अगर मूर्ति धन देती तो दुकानदार इसे बेचता ही क्यों ??