जिंदा इंसान को गिराने में और मरे हुए इंसान ,
को उठाने में गजब की एकता दिखाते है लोग !!
गिर कर उठना आसान है
कोशिश कर के तो देखो तुम
बिखर गया है जो कुछ भी
एक बार तो उसको समेटो तुम
तू समझा नहीं जिंदगी का मकसद,तू उलझा रहा लोगों की गलती ढूंढने में.
इस संसार में सबसे सुखी वह व्यक्ति है,
जो अपने घर में शांति पाता है...
होंगे तुम्हारे शहर में तुम्हारी खूबसूरती के चर्चे ,
हमारे गांव में तो हमारी सादगी मशहूर है...
आंखें थक गई थी "इंतज़ार" में फिर भी दस्तक लगाए बैठा रहा,
हलक सूख गया रोते रोते मगर वो अपनी अकड़ में ऐंठा रहा..!!
विरक्ति
जो किताबों में है वो सब का हैतू बता तेरा तजरबा क्या है
निदा फ़ाज़ली
कौन रखेगा मेरे होठों पे उंगली अपनी..कौन बोलेगा "नहीं, ऐसा नहीं कहते"..
जितने सच्चे रहोगे,
उतने ही अकेले रहोगे...
एकांत स्वयं को जानने का एक जरिया है।
फ्रैंज काफ्का
“ये फ़र्ज़ रहे ध्यान में,लिखा है संविधान में,अगर कोई भी बात,तेरा मन गई कचोट कर,तू वोट कर,ये प्रश्न तेरे बल का है,सवाल तेरे कल का है,समय ये फ़ैसले का फिर से,आ गया है लौट कर,तू वोट कर”
मैं वो चिराग हूँ,जो आँधियों में भी रोशन था...खुद अपने घर की हवा ने,बुझा दिया है मुझे...
विचारों के युद्ध मे,
पुस्तकें ही अस्त्र है।
नर हो न निराश करो मन को कुछ काम करो कुछ काम करो।
मैथिलीशरण गुप्त
हाथ खाली हैं तेरे शहर से जाते जाते,जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते,अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है,उम्र गुजरी है तेरे शहर में आते जाते !
"किडनी" से काम चले तो बता देना,
अब किसी को "दिल" देना अपने बस की बात नहीं..!!
तेरे राहों में काँटे बहुत है।
तेरी निगाहों के प्यासे बहुत है।
ख़ामोश हूं मैं भी वक्त की तरह,
शोर करूंगी तो समझना कयामत आ गईं!
मैं फ़िज़ूल खुली किताब सा हो लियाऔर तुमने अनपढ़ बनना सीख लिया
सफल होने के लिए तुम्हें.. खुद की दुनिया में कैद होना पड़ेगा..!!