वो जो है ही नहीं हक़ीक़त में
उससे कैसे कहें के घर आए
आसमां पे उसे निहारेंगे
जिसको मिट्टी में दफन कर आए
तमाम शहर की हमदर्दी का क्या करता मुझे , किसी की ज़रूरत थी हर किसी की नहीं !!
ज्यादा Available होने से भी,
इंसान की Value घट जाया करती हैं...
हर चीज़ महंगी होती जा रही है
सस्ता है तो बस इंसान और उसके जज़्बात.!!
सहनशील होना अच्छी बात है,
परन्तु अन्याय का विरोध करना उससे भी उत्तम है !
तलवारों की छाए पर इतिहास हमारा बनता है ,,
जिस ओर ज़वानी चलती है उस और ज़माना चलता है..!!
धीरे धीरे सब छोड़ जाते हैं,
दिसंबर तो बस एक महीना है....
कैसा रहेगा आपके शहर में ,,मुखौटे का दुकान खोलूं अगर.?
भरे बाजार से अक्सर मैं खाली हाथ आया हूँ ,
कभी ख्वाहिश नहीं होती कभी पैसे नहीं होते ।।
“छत टपकती हैं उसके कच्चे मकान की….फिर भी बारिश हो जाये तमन्ना हैं किसान की”
हर लम्हा लंबा और भारी है,
तुम्हें भुलाने की जंग जारी है...
वो जो साँसों में बसे रहते हैं,
उन्हीं से मिलती चोट भारी है...
गुनाह और ज़ख़्म छिपते नहीं,
कोशिशें शिद्दत से जारी है...
हर एक तंज़ का जवाब है,
कुछ तो हमनें...
दो ग़ज सही ये मेरी मिल्कियत तो हैऐ मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया।
किस चीज़ का बनवाती हो लिबास तुम अपना ,
कपड़ा तो इस आग को छूकर जल जाता होगा..!
सम्पूर्ण जीवन ही एक प्रयोग है।
जितने प्रयोग करोगे उतना ही अच्छा है।
उसे बुलाया नहीं जाता ना उसे रोका जाता है.... जिसपर अधिकार ना हो उसे ही मांगना पड़ता है , जो तुम्हारा होता है वो हर परिस्थिती मे तुम्हारा होता है और जो तुम्हारी पीड़ाओं का आक्रोश नहीं समझ पाता, उसके...
दुआ के वक्त आंखों का भर आना,
कुबूलियत की सबसे बड़ी दलील है !!
जरा अदब से जनाब
हम शांत हैं ' संत नहीं।
ज्यादा अच्छे मत बनो
अच्छे से इस्तेमाल कर लिए जाओगे !
लड़का अगर बेरोजगार होकर घर बैठ जाए
तो दूसरे ही नहीं अपने भी नफ़रत" करते हैं
सारा ज़माना जब खिलाफ था भूलो नहीमें आपके बाप के कंधे से कन्धा मिलाए खड़ा था