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World's Best Cow Hospital

बीते मीठे लम्हों का है जो आसराहसरतें खामोश ठहरा ज़ज्बातो का दायरातेरी भीनी आंखों में खो जाए मन मेरातुझसे ही जाने क्यूँ  मेरा है ऐसा राब़्ताचादर की सिलवटें में है जो थोड़े फ़ासलेतेरे पास ना होने का करे हर पल...

बहुत लोग हमसे पीछे हैं,इसका मतलब यह नहीं कि हम आगे हैं.. !!

हौंसला और रुतबा बनाए रखिए,दिन अच्छे बुरे आते जाते रहेंगे।

तेरे हुस्न को परदे की क्या जरूरत,,, कौन होश मे रहता है तुझे देखने के बाद,,,

रब से कभी उम्मीद मत छोड़ना , और दुनिया से कभी उम्मीद मत करना

न मुझे किसी को हराना है न ही मुझे किसी से जीतना, मुझे अपनी एक राह बनाना है और उस पर चलते जाना है!

सुबह शाम तू मेरी इबादत सा लगे जो कभी ना छूटे वो आदत सा लगे

बढ़ रहा है ज़िंदगी का कैनवस हर दिन मगर रंग गहरा अब नहीं दिखता किसी तस्वीर में राघवेंद्र द्विवेदी

घर वालों को ज़रूर बताइए उलझने अपनी,मर जाने से अच्छा है उनके लिए जिया जाए….

लोकतंत्र ज़िंदाबाद..!संविधान ज़िंदाबाद..!हिन्दुस्तान ज़िंदाबाद..!

ईलाज़ ये है कि मज़बूर कर दिया जाऊ,वरना यूं तो किसी की नही सुनी मैंने..

लोग छूट जाते हैं, मोह नहीं छूटता.

भिन्न मत का मान रखो, गलत का नहीं

बगावत हमेशा ईमानदार और स्वाभिमानी लोग ही करते हैं, चालाक लोग तो चापलूसी और तलवे चाट कर अपना काम निकालते रहते हैं।

नदियों का बहना और समंदर के खारेपन में समाहित हो जाना; प्रेम का इतना सा ही भाव है, प्रेम प्रारंभ भी अंत भी और अनन्त भी है। नेहा यादव

ये कैसा भार हैं जब मैं मुझमें ही रिक्त हूं..!!

खुद से बेखबर हूंपता नही मैं कौन हूंदर्द है ज्यादाफिर भी मौन हूंइधर उधर मैंगलियों में फिरता हूंकोई पूछले गर इकबारकी मैं कौन हूंकह दूंगा ..खुद की तलाश में हूंभटकता मैं कोई राहीदीन दुनिया से भी बेखबर हूं शायद...

पीने का अंत बर्बादी ही है, चढ़ गई तो आदमी बर्बाद, और न चढ़ी तो पैसे।

यह कविता नहीं  जीवन का सार है जिसने ख़ुद को ना चाहा उसका जीना बेकार है सौ सितारों के जहां भी उसके लिए अंधकार है जो ख़ुद को ना चाहे खुद को  सजा दे जो खुद को ना चाहे किसी को क्या  ख़ुशी दे जो खुद को खुशी दे मोहब्बतें जगा दे जो खुद...

आपका गिरना एक हादसा हो सकता है मगर वहीं पड़े रहना आपकी मर्ज़ी !


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