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इंसानियत की बातें सब करते हैं लेकिन गुस्से में आते ही भूल जाते हैं, वो इंसान हैं।

थक गई हूँ जिम्मेदारियों से,,ज़िंदगी मुझे चंद पल तू सुक़ून के उधार दे..!!

मसला सुकून का है, जिंदगी काट तो हर कोई रहा है !

जिंदगी में सिर्फ पहली बार, इतना ही कहा है मैंने बहुत मजबूत रिश्ते थे, बहुत कमजोर लोगों से...!

जीवन का परिचय बहुत सीधा सा है….आसूं वास्तविक है और मुस्कान में अभिनय है..!!

मितरों 20 मिनट तक सांस रोक कर रखो, 👇 आपकी 'महबूबा' आपके कदमों मे होगी !

गिले शिकवे मिटा कर सोया करो मौत मुलाकात का मौका नहीं देती… मरने वाला तो मर गया लौट कर नहीं आएगापर अपनी सोचो उसके चले जाने की टीस जीने नही देगी होगी घुटन पर कह नहीं पाओगे लाख रोओगे पर उसे वापस...

आंखें थक गई थी "इंतज़ार" में फिर भी दस्तक लगाए बैठा रहा, हलक सूख गया रोते रोते मगर वो अपनी अकड़ में ऐंठा रहा..!! विरक्ति

कबीरा तेरे जगत की है कैसी ये तकदीर जनता सारी सड़कों पर, बैठे महल फ़कीर

पिता का क्रोध कदापि आपका अवरोध नहीं, सही मार्ग पर चलने का अनुरोध है।

अच्छे शब्दों के प्रयोग से बुरे लोगों का भी दिल जीता जा सकता है। ~ गौतम बुद्ध

लोग छूट जाते हैं, मोह नहीं छूटता.

दर्द का कहर बस इतना सा है,कि आँखें बोलने लगी और आवाज रूठ गई ..

ये नफ़रत नहीं फितरत है मेरी , जिसे छोड़ दिया मतलब छोड़ दिया...

अच्छे संस्कार किसी मॉल या बाजार में नहीं, परिवार के माहौल से मिलते हैं...

गांव बदलकर शहर हो रहे हैं, और इंसान बदलकर जहर हो रहे हैं…

अरमान सिर्फ उतने ही अच्छे है जहाँ, स्वाभिमान गिरवी रखने की जरूरत ही ना पड़े…!!

झूठे इल्जामों की फिक्र ना करें वक्त का ग्रहण चाॅंद ने भी झेला था!!

जितना बड़ा संघर्ष होगा, जीत उतनी ही शानदार होगी। स्वामी विवेकानंद

अगर मुझमें कोई हुनर होता तो, मैं तुम्हें अपना कायल बना लेता, और जहान जीत लेता उस रोज, जब मैं तेरे पांवों में पायल पहना लेता..!!


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