दुनिया को आग लगाने की कोई जरुरत नहीं
तुम मेरे साथ चलो दुनिया तो वैसे ही जल जायेगी
प्रेम में पुरुष भावुक बन जाते हैं और स्त्रियां प्रैक्टिकल…अजीब बात है, परंतु सत्य है…!!!
तानों की भट्ठी में तपा आदमी,
राख नहीं सोना बनता है....
बहुत कम लोग जानते हैं
कि वो बहुत कम जानते हैं
दया अगर लिखने बैठूं होते हैं अनुवादित रामरावण को भी नमन किया ऐसे थे मर्यादित राम
~अज़हर इक़बाल
नहीं है प्यार उससे अब नहीं है
मगर वो शख़्स प्यारा आज भी है
चले जाना चाहता हूँ
बहुत दूर...
जहाँ कोई भी न हो!
चले जाना चाहता हूँ
उन बर्फीली पहाड़ियों के अनज़ान सफ़र पर
जिसका कोई अंत न हो!
मैं ख़ुद को भी भूल जाना चाहता हूँ!
परिन्दों की तरह सब कुछ छोड़
आसमां में उड़ना चाहता हूँ!
शतरंज हो या ज़िंदगी,
जीतने के लिए धैर्य रखना पड़ता हैं...
बिन मेहनत तरक्की चाहकर, रूपयों से खुशियां छांट लेते हैं,
स्वाभिमान बेचकर अपना, वो किसी के भी तलवे चाट लेते हैं..
मेरे पास से जो गुजरा, मेरा हाल तक ना पूछा
मैं कैसे मान जाऊँ कि वो दूर जाके रोया
परवीन शाकिर
दुःख देखिएहम सब अकेले हैंफिर भी हमारे पास समय नहीं हैकिसी अकेले के लिए।
जिनको हर मोड़ पे कोई मिल जाएउनको पुराने रास्ते क्या ही याद रहेंगे!!
कितना ख़ास बनाया था हमें ईश्वर ने
हम कितने आम बन गए हैं
मशीनों से ग़ुलामी कराते कराते
मशीनों के ग़ुलाम बन गए हैं
तू मेरा दुःख समझतीअगर तेरा भी इश्क में हारा हुआ एक भाई होता..
खामोशी गवाह है,
इंसान अंदर से थक चुका है...
बीतने को पूरी रात पड़ी है और जीतने को कितने स्वप्न!
~ बाबुषा कोहली
खुद की पहचान बनाने मे जो मजा हैं,
वह किसी की परछाई बननें मे कहा हैं यारों...
आज फिर चाय की मेज़ पर , एक हसरत बिछी रह गयी.... प्यालियों ने लब छू लिए, केतली देखती रह गई !!!!
बड़ी चालाकी से खेल गया वो एक शख़्स जो मेरी ज़िंदगी है….
धोखा भी मुझे दिया और धोखेबाज भी मुझे कहा..!!
हजारो विकल्प होते हुए भी, "किसी एक पर अडिग रहना ही " प्रेम " है।