sj_coat_512x512_web

World's Best Cow Hospital

भटकने की आरजू किसको है ,मिल जाओ तुम तो ठहर जाऊं मैं..❤️

जितना कम सामान रहेगा उतना सफ़र आसान रहेगा गोपाल दास ‘नीरज’

बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी...

मुझ पर तरस खाने वाले लोगहद्द से ज़्यादा बुरे लगते हैं मुझे

✯||तुम्हे साढ़ी बिंदी में देख मेरा मुंह उतर जानाठीक वैसा हैं जैसे किसी महंगे ख्याव का टूटकरबिखर जाना…||✯

माथे पर बिंदी.आंखों पर हया.हायक्या खूबसूरत बला है तेरी हर इक अदा…

पानी अगर शांत हो तो,गहराई से मज़ाक नहीं करते….

जब कभी मुझे तुम्हारी याद आती हैं तो मैं नहीं देखती हमारी तस्वीरें,मैं पढ़ती हूं तुम्हारी लिखी कविताएं जहां मैं और तुम हमेशा साथ होते हैं !

पढ़ा जाये या कमाया जाये ये दिमाग़ नहीं पेट तय करता है

दुआ करना दम भी उसी तरह निकले…जिस तरह तेरे दिल से हम निकले…!!

मैं तुम को भूल तो जाऊँ .. मगर छोटी सी उलझन है, सुना है दिल से धड़कन की जुदाई .. मौत होती है

इतनी शिद्दत से पाला कि वफादार हो गया आहिस्ता आहिस्ता जख्म भी यार हो गया।

अनुमान मन की कल्पना हैं, और अनुभव जिंदगी का सबक हैं…

सोचता हूँ कि उस की याद आख़िर अब किसे रात भर जगाती है...

शतरंज सी जिन्दगी में कौन किसका मोहरा है आदमी एक है मगर सबका किरदार दोहरा है

मैंने अपनी पीड़ा किसी को नहीं बताई,क्योंकि मेरा मानना है कि व्यक्ति मेंइतनी ताकत हमेशा होनी चाहिए कि अपने दुख,अपने संघर्षों से अकेले जूझ सके

बस सफ़र के मज़े लो, मंजिल सबकी मौत है.....

प्रसन्न रहना बहुत सरल है, लेकिन सरल होना बहुत कठिन है।- रवींद्रनाथ टैगोर

तन को सौ बंदिशें , मन को लगी न रोक तन की दो गज कोठरी , मन के तीनों लोक !!

ठोकरें खा कर भी न समझे तो मुसाफ़िर का नसीबवरना पत्थरों ने तो अपना फ़र्ज़ निभा दिया था !


Concept, Created & Designed by sureshjain.com


© copyright 2025. sureshjain.com All Rights Reserved.

Translate »