क्यों अपना दर्द महफ़िल में सुनाया जाए
चलो मुस्कुरा कर सबका दिन बनाया जाए
आभा
कबीरा ते नर अँध है, गुरु को कहते और
हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर
कबीरदास
इश्क बेहद किया है हमने..इसलिए बस हदें ना लांघ सके..🍁
कभी किसी को हैसियत से मत तोलो,
एक रुपए की मोमबत्ती भी खुद
मिटकर किसी घर को रोशन कर जाती है।
दिल पर तो बहुत ज़ख़्म ज़माने के लगे हैंख़ुद-दारी से लेकिन कभी रोया नहीं जाता
पहरे मिरे होंटों पे लगा रक्खे हैं उस नेचाहूँ मैं गिला करना तो बोला नहीं जाता
~ अज़हर नय्यर
पता है मुझे ऐ ज़िन्दगी
कदम कदम पर
तू मुझे रुलायेगी
मगर याद रख
तेरे ज़ुल्मों सितम की उम्र है छोटी
मेरे होंठों की हंसी से
तू पल पल मात खायेंगी
आँखों से छलक आता है,जो हृदय में अतिरिक्त हो जाता है, प्रेम, गुस्सा, नफरत या फिर पीड़ा.
न मुझे किसी को हराना है न ही मुझे किसी से जीतना, मुझे अपनी एक राह बनाना है और उस पर चलते जाना है!
भूले-बिसरे हुए ग़म फिर उभर आते हैं कईआईना देखें तो चेहरे नज़र आते हैं कई
~ फ़ुज़ैल जाफ़री
जो चीज वक्त पर ना मिले ,
बाद मिले या ना मिले क्या फ़र्क पड़ता है...
गिरगिट तो बेवजह बदनाम है,
असली रंग तो अपने बदलते हैं...
जुल्म की छाती पर रख कर पांव हम लड़ते रहेंगे,
हक न्याय का मिलने तक हम लड़ते रहेंगे...
भगवान को जो लिखना था लिख चुके क़िस्मत में,
अब बारी मेरी हैं अपनी किस्मत बनाने की,
कुछ तो लिखा ही होगा,
इन हाथो की लकीरों में बस उसी पे जिंदगी बितानी हैं...
मैं शून्य ही सही तुम्हारी जिंदगी में,पर,मेरी कोशिश रहेगी कि तुम्हारे पीछे खड़े रहकर तुम्हारी कीमत बढ़ा सकूं।
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।कह कबीर हरि पाइए मन ही की परतीत।।"
खाली होना भी एक दुख हैजैसे जेब का खाली होंना,मन का खाली होंना,दिन का खाली होंना,जीवन का खाली होंना,किसी किताब के पन्ने का खाली होनाहालांकि सब अलग अलग रूप से असर करते हैं
हम पूजते है तुम्हें, कृष्ण की मीरा की तरह,हर मर्द के अंदर एक औरत का दिल होता है.
तेरी यादों ने रखा है हर वक्त बेचैन मुझे ,
ये दिसंबर भी कट रहा है तुझे याद करते करते ...
बालों के सफेद होने से लेकर चेहरे कि सिलवटें बनने तक,
तुम्हारा साथ चाहिए मेरी अर्थी के पास बैठकर रोने तक..!!